कविताएँ | Poetry
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“बहुत नहीं चाहिए, बहुत चाहने का मतलब लूटना होगा”

— रघुवीर सहाय
गद्य | Prose
समीक्षा | Reviews
‘अपनी अपनी बीमारी’ – हरिशंकर परसाई की व्यंग्य चिकित्सा
तीन-चार पेजों की बीस-इक्कीस कहानियों में अपने समाज की लगभग सारी बुराईयों को पृष्ठ-दर-पृष्ठ उघाड़ देना हरिशंकर परसाई ही कर…
ब्लॉग | Blog
जब भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने लिखीं अंग्रेज़ों की प्रशंसा में कविताएँ
भारतेन्दु हरिश्चंद्र हिन्दी आधुनिक काल के प्रथम प्रमुख कवि माने जाते हैं। भारतेन्दु का कार्यकाल लगभग उसी समय का रहा…
नयी किताबें | New Books
नयी किताब: दिलीप पाण्डेय, चंचल शर्मा कृत ‘कॉल सेंटर’
विवरण: दिलीप पाण्डेय और चंचल शर्मा की कहानियाँ हिंदी कहानियों में कुछ नए ढंग का हस्तक्षेप करती हैं। यहाँ बहुत-सी कहानियाँ…
नयी किताब: कृष्ण बलदेव वैद कृत ‘अब्र क्या चीज़ है? हवा क्या है?’
  विवरण: कृष्ण बलदेव वैद की डायरियों की जो पुस्तकें इससे पहले प्रकाशित हुई हैं उन्होंने अपनी बेबाकी, लेखक के निर्मम…
नयी किताब: अयोध्या प्रसाद कृत ‘चौथा धंधा – किस्से जर्नलिज़्म के’
विवरण: मीडिया, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, एक धंधे में बदल चुका है- ‘चौथा धंधा’। धंधा शब्द देह व्यापार…
लप्रेक | Laprek

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