पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

The Night Train at Deoli – Ruskin Bond

बहुत अच्छे लेखकों के बारे में यह एक आम धारणा है कि उन्हें उनकी मूल भाषा में ही पढ़ा जाना चाहिए। रस्किन बॉन्ड, जिन्होंने मूलतः अंग्रेजी में लिखा है, उनके बारे में भी यही कहा Read more…

By Posham Pa, ago
कविता | Poetry

छायावाद का बह चला ‘झरना’

कोई भी बहुत लम्बे समय तक केवल मनोरंजन के लिए कविताएँ नहीं सुन सकता। चाहे कविताओं के विषय हों या कवि की कथन-शैली, एक पाठक कहीं न कहीं खुद को उन कविताओं में ढूँढने लगता Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पंचलाइट’ (पंचलैट)

अपने उपन्यासों और कहानियों में लोकजीवन को एक कविता के जैसे पेश करने वाले फणीश्वरनाथ रेणु के कहानी संग्रह ‘ठुमरी’ की यह कहानी बड़ी मजेदार है। एक गाँव में विभिन्न जातियों की विभिन्न टोलियाँ हैं। Read more…

By Posham Pa, ago
नव-लेखन | New Writing

कविता: ‘पथिक’ – आदर्श भूषण

चलते चलते रुक जाओगे किसी दिन, पथिक हो तुम, थकना तुम्हारे न धर्म में है; ना ही कर्म में, उस दिन तिमिर जो अस्तित्व को, अपनी परिमिति में घेरने लगेगा, छटपटाने लगोगे, खोजना चाहोगे, लेकिन Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पूस की रात’ – प्रेमचंद

‘पूस की रात’ – प्रेमचंद 1 हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर Read more…

By Posham Pa, ago
कविता | Poetry

‘कविता’ पर कविताएँ

जब कविताएँ पढ़ते या लिखते हुए कुछ समय बीत जाता है तो कोई भी पाठक या कविता-प्रेमी अनायास ही कभी-कभी कुछ ऐसे सवालों में खोने लगता है जिनका कोई एक नियत जवाब नहीं हो सकता। Read more…

By Puneet Kusum, ago
ब्लॉग | Blog

हिन्दी मुकरी

नहीं नहीं, हिन्दी अपने किसी वादे से नहीं मुकरी है, यह तो एक हिन्दी विधा (form) है जो मुकरे हुए लोगों का सैंकड़ों साल बाद भी इंतज़ार कर रही है कि कब वो मुड़कर उसकी Read more…

By Puneet Kusum, ago
पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

जगदीश चंद्र की ‘धरती धन न अपना’

जगदीश चंद्र की किताब ‘धरती धन न अपना’ एक और किताब है जो मुझे बड़ी मशक्कतों के बाद केवल ऑनलाइन एक सॉफ्टकॉपी के रूप में मिल पायी, जबकि यह किताब अपने विषय की एक उम्दा Read more…

By Puneet Kusum, ago
पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘आज़ादी मेरा ब्रांड’ – अनुराधा बेनीवाल

अनुराधा बेनीवाल की यह पहली किताब ‘आज़ादी मेरा ब्रांड’, राजकमल प्रकाशन की ‘यायावरी आवारगी’ शृंखला का पहला पड़ाव है। वैसे तो शृंखला के नाम से जाहिर है कि यह एक यात्रा-वृत्तांत (travelogue) है, लेकिन किताब Read more…

By Puneet Kusum, ago
error: