ब्लॉग | Blog

हरिवंशराय बच्चन: जन्मदिन पर विशेष

नोट: यह लेख मूल रूप से हिन्दी अखबार अमर उजाला के ऑनलाइन पोर्टल ‘काव्य’ के लिए लिखा गया था। यहाँ पुनः प्रस्तुत है। हरिवंशराय बच्चन हिन्दी साहित्य के सबसे अधिक लोकप्रिय कवियों में से एक Read more…

By Puneet Kusum, ago
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दुविधा (मुक्तिबोध की कविता ‘मुझे कदम कदम पर’ से प्रेरित)

कविताएँ अपने पाठकों के भीतर बहुत कुछ जगा देती हैं और उन्हें बहुत जगह भी देती हैं जिसमें कुछ न कुछ चुपचाप बैठा रहता है, जीता रहता है, बढ़ता रहता है और मौका ढूँढता रहता Read more…

By Posham Pa, ago
ब्लॉग | Blog

हिन्दी हाइकु (Hindi Haiku)

पिछले दिनों रोशनदान ग्रुप द्वारा आयोजित पोएट्री वर्कशॉप में लक्ष्मी शंकर वाजपेयी जी द्वारा हाइकु, माहिया और दोहे जैसे काव्य रूपों को संक्षेप में समझने का मौका मिला। चूंकि यह पोस्ट हाइकु समझने हेतु है Read more…

By Puneet Kusum, ago
कविता | Poetry

कविता: ‘कहते हो.. प्यार करते हो.. तो मान लेती हूँ’ – पुनीत कुसुम

तुम कहती हो “कहते हो.. प्यार करते हो.. तो मान लेती हूँ” मगर, क्यों मान लेती हो? आख़िर, क्यों मान लेती हो? पृथ्वी तो नहीं मानती अपने गुरुत्व को जब तक कोई ज़मीन से अपनी Read more…

By Puneet Kusum, ago
कविता | Poetry

कुँवर नारायण: अबकी बार लौटा तो..

लेखक लक्ष्मण राव को एक वीडियो में कहते सुना था कि कोई कवि या लेखक पचास वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद जन्मता है और उसकी ज़िन्दगी उसकी मृत्यु के बाद शुरू होती है। Read more…

By Puneet Kusum, ago
कहानी | Story

रानी पद्मावती/पद्मिनी की कहानी (जायसी की ‘पद्मावत’ का व्याख्यान)

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ के कारण फिर से चर्चा में आयी रानी पद्मावती की कहानी, हिन्दी साहित्य के प्रेममार्गी शाखा के कवि मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ के महान और चर्चित ग्रन्थ ‘पद्मावत’ में पायी Read more…

By Posham Pa, ago
कविता | Poetry

खजूर बेचता हूँ – पुनीत कुसुम

न सीने पर हैं तमगे न हाथों में कलम है न कंठ में है वीणा न थिरकते कदम हैं इस शहर को छोड़कर जिसमें घर है मेरा उस ग़ैर मुल्क जाके लोगों के मुँह देखता Read more…

By Puneet Kusum, ago
किताबें | Books

एक अतिरिक्त ‘अ’ – रश्मि भारद्वाज

भारतीय ज्ञानपीठ के जोरबाग़ वाले बुकस्टोर में एक किताब खरीदने गया था। खुले पैसे नहीं थे तो बिलिंग पर बैठे सज्जन ने सुझाया कि कोई और किताब भी देख लीजिए। यद्यपि मैं ऐसे बहाने ढूँढा Read more…

By Puneet Kusum, ago

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