एक छोटी दंतकथा

अनुवाद: पुनीत कुसुम

“आह!”, चूहे ने कहा, “पूरी दुनिया प्रतिदिन छोटी होती जा रही है। शुरुआत में यह इतनी बड़ी थी कि मैं डर गया था। मैं दौड़ता रहा, दौड़ता रहा और आखिरकार जब मैंने दूर दाएँ-बाएँ दीवारें देखीं तो मुझे ख़ुशी हुई, किन्तु ये लम्बी दीवारें इतनी तेजी से संकरी हुईं कि मैं पलक झपकते ही अंतिम कक्ष में आ पहुँचा हूँ, और वहाँ कोने में वह पिंजड़ा रखा है जिसकी ओर मैं बढ़ता जा रहा हूँ।”

“तुम्हें केवल अपनी दिशा बदलने की ज़रुरत है।”, बिल्ली बोली, और उसे खा गई।