कविता संग्रह ‘लौटा है विजेता’ से

मरदों ने घर को
लौटने का पर्याय बना लिया
और लौटने को मर जाने का
घर को फिर उन्होंने देखा ही नहीं
लौट कर उम्र भर
मरने से डरने का
यही तो था एक संभव नतीजा!

घर भर की औरतें
जाने किसी प्रतीक्षा में
तवा चढ़ाए चूल्हा लहकाए
बैठी रहीं सदियों कि
आते ही
गरम रोटी उतार सकें।

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