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‘हिंदीनामा’ के बारे में

‘हिंदीनामा’ के बारे में

फेसबुक पेज ‘हिंदीनामा’ एक और प्रयास है हिन्दी के लेखकों/कवियों को एक दूसरे के और इस संसार के सामने लाने का! जल्दी ही यह पेज एक काव्य संकलन भी प्रकाशित करने वाला है, जिसमें आप अपनी रचनाएं भेज सकते हैं.. परिचय और बाकी आधारभूत जानकारी दे रहे हैं ‘हिंदीनामा’ के संस्थापक अंकुश कुमार इस पोस्ट में!

‘हिंदीनामा’ एक छोटी मगर खूबसूरत पहल है तमाम हिंदी बोलने, लिखने, पसंद करने और उसे साहित्यिक भाषा के रूप में गहराई से स्थापित होते देखने वाले लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने और रू-ब-रू कराने की। अनेक हिंदी पढ़ने और लिखने वाले लोग इस पेज से जुड़े हैं । वे, जो अच्छा लिख रहे हैं और चाहते हैं कि उन्हें पढ़ा जाए उन्हें ‘हिंदीनामा’ एक बड़े वर्ग के सामने उनकी रचनाओं के माध्यम से ला रहा है और वे, जो अच्छा पढ़ना चाहते हैं उन्हें भी यह मौका मिल रहा है कि वे कुछ अच्छे और नए लोगों को पढ़ें। इस पेज ने नवोदित लेखकों को एक प्रोत्साहन दिया है कि वे और बेहतर लिखें।

यह पेज समय-समय पर प्रतिष्ठित लेखकों और उनकी रचनाओं से युवा वर्ग को परिचित कराता रहा है, चाहे वह उनकी जन्मतिथि/ पुण्यतिथि के बहाने हो या अपने यूट्यूब चैनल के बहाने। ‘हिंदीनामा’ ने पूरा ख़्याल रखा है कि आज के युवाओं की पहुँच कहाँ तक है और हिंदी को कैसे अनेक माध्यमों से पढ़वाया जा सकता है।

अभी एक नई पहल के तहत यह पेज एक कार्यक्रम शुरू कर चुका है जिसमें वे लोग शामिल हैं जो लेखन में अभिरुचि रखते हैं और लिखने की बारीकियों को सीखना चाहते हैं। सबसे नायाब बात ये है कि बहुत से ख़ास लोग स्वेच्छा से ‘हिंदीनामा’ से जुड़ रहे हैं और अपने लेखन के अनुभव नए लेखकों से साझा कर रहे हैं। पेज की स्थापना जिस उद्देश्य से की गई थी उसकी तरफ़ बढ़ते हुए पेज से जुड़े सभी लोगों के कदम निश्चित ही हिंदी की परिस्थिति आज के युग में कुछ और सुदृढ़ करने में अपनी छोटी सी भूमिका बख़ूबी अदा कर रहे हैं, जिसे सबके एकजुट प्रयास से और सफल बनाया जा सकता है।

जल्दी ही हम खुद को पुस्तक के रूप में भी आपके समक्ष पेश करने वाले हैं, अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी रचना इस संकलन का हिस्सा बने तो आप अपनी रचना hindinama1@gmail.com पर भेज सकते हैं। ‘हिंदीनामा’ पेज से यहाँ जुड़ा जा सकता है!

– अंकुश कुमार
संस्थापक, हिंदीनामा


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अंकुश कुमार
अंकुश कुमार

अंकुश कुमार दिल्ली में रहते हैं, इंजीनियरिंग की हुई है और फिलहाल हिन्दी से लगाव के कारण हिन्दी ही से एम. ए. कर रहे हैं, साथ ही एक वेब पोर्टल 'हिन्दीनामा' नवोदित लेखकों को आगे लाने के लिये संचालित करते हैं।

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