कविता: ‘मैदानों में’ – हरमन हेस

अनुवाद: पुनीत कुसुम

आकाश में, बादल चलते हैं
खेतों में, हवा
मैदानों में, मेरी माँ का
खोया हुआ बच्चा भटकता है

सड़क के पार, पत्ते उड़ते हैं
पेड़ों के पार, रोते हैं पक्षी
पहाड़ों के पार, बहुत दूर
मेरा घर होगा।

■■■