Its counterpart being torn apart

the yellow leaf of my book

sat in reclusion.

They had been one for long.

Silently holding each other

Withstanding the shudder of wind,

of reckless shuffle.

Never met.

One didn’t know what depths

the other’s script unfolds.

The staple pin was their horizon.

There was a page between them,

like a glitch. And another. Yet another.

One half got torn

and the other also loosened itself

Of the pin. Of all connections.

Its scrimmage with the pin irritates,

requests to break free.

And so it did.

Leaving a chapter, no two, incomplete…

 

Note: Image by Patrick Tomasso


Shiva

अपने बारे में बताने को कुछ आकर्षक सा हो, इसका तो अभी इंतज़ार ही है।
एक परंपरागत भारतीय लड़की की छवि से ज़्यादा दूर नहीं हूँ। समाज की अनेक बातों से बेचैन, खुद को लेकर बहुत असुरक्षित, दिन में सपने देखती और रात में घर की छत को तकती रहती एक आम लड़की। हर तरह की किताबों से बहुत प्यार करती हूँ, तरह तरह से उन्हें अलमारी में सजाया करती हूँ, और एक ‘विश’ माँगने को बोला जाए तो यही चाहूँगी की हज़ारों किताबों का निचोड़ दिमाग़ में समा जाए।
अपनी असुरक्षाओं से लड़ने के लिए कुछ कुछ लिख लेती हूँ, और लोगों की सच्ची-झूठी तारीफों में सुकून पा लेती हूँ।
लिखने- पढ़ने के अलावा संगीत एक और ऐसी चीज़ है जो मैं कस के अपने पास रखे रहना चाहती हूँ।

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