घोर जातिवादी देश में
जहाँ अपवित्रता की भाषा
पानी भी जानता है
बच्चा भी जाना जाता है जाति के नाम से
धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में
विद्यालयों से ज़्यादा
बनाई जाती है सरस्वती की प्रतिमा
औरतों का पढ़ना-लिखना कैसे आसान होता
इस पुरुषवादी देश में
जहाँ महिलाएँ जानी जाती हैं
पिता, पति और भाई के नाम से।





