ग़ज़ल | Ghazal

ग़ज़ल: ‘ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल’ – अमीर ख़ुसरो

‘ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल’ – अमीर ख़ुसरो ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ न लेहू काहे लगाए छतियाँ शाबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ ओ रोज़-ए-वसलत चूँ उम्र-ए-कोताह सखी पिया को जो Read more…

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लघुकथाएँ | Short Stories

लघुकथा: ‘प्रेम’ – इवान तुर्गनेव

‘प्रेम’ – इवान तुर्गनेव शिकार से लौटते हुए मैं बगीचे के मध्य बने रास्ते पर चला जा रहा था, मेरा कुत्ता मुझसे आगे-आगे दौड़ा जा रहा था। अचानक उसने चौंककर अपने डग छोटे कर दिए Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘सूर्योदय की प्रतीक्षा में’ – कुँवर नारायण

‘सूर्योदय की प्रतीक्षा में’ – कुँवर नारायण वे सूर्योदय की प्रतीक्षा में पश्चिम की ओर मुॅंह करके खड़े थे दूसरे दिन जब सूर्योदय हुआ तब भी वे पश्चिम की ओर मुॅंह करके खड़े थे जबकि Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘रेल की रात’ – इलाचंद्र जोशी

‘रेल की रात’ – इलाचंद्र जोशी गाड़ी आने के समय से बहुत पहले ही महेंद्र स्टेशन पर जा पहुँचा था। गाड़ी के पहुँचने का ठीक समय मालूम न हो, यह बात नहीं कही जा सकती। Read more…

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ग़ज़ल | Ghazal

ग़ज़ल: सूफ़ियों में हूँ न रिन्‍दों में, न मयख़्वारों में हूँ – बहादुर शाह ज़फ़र

सूफ़ियों में हूँ न रिन्‍दों में, न मयख़्वारों में हूँ सूफ़ियों में हूँ न रिन्‍दों में, न मयख़्वारों में हूँ, ऐ बुतो, बन्‍दा ख़ुदा का हूँ, गुनहगारों में हूँ! मेरी मिल्‍लत है मुहब्‍बत, मेरा मज़हब Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘प्यारी डकार’ – ख़्वाजा हसन निज़ामी

‘प्यारी डकार’ – ख़्वाजा हसन निज़ामी कौंसिल की मेंबरी नहीं चाहता। क़ौम की लीडरी नहीं मांगता। अर्ल का ख़िताब दरकार नहीं। मोटर,और शिमला की किसी कोठी की तमन्ना नहीं। मैं तो ख़ुदा से और अगर Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘प्रेमपत्र’ – बद्रीनारायण

‘प्रेमपत्र’ – बद्रीनारायण प्रेत आएगा किताब से निकाल ले जायेगा प्रेमपत्र गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खायेगा चोर आयेगा तो प्रेमपत्र ही चुरायेगा जुआरी प्रेमपत्र ही दाँव लगाएगा ऋषि आयेंगे तो दान में माँगेंगे प्रेमपत्र Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘भेड़िये’ – भुवनेश्वर

‘भेड़िये’ – भुवनेश्वर ‘भेड़िया क्या है’, खारू बंजारे ने कहा, ‘मैं अकेला पनेठी से एक भेड़िया मार सकता हूँ।’.. मैंने उसका विश्वास कर लिया। खारू किसी चीज से नहीं डर सकता और हालाँकि 70 के Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘लड़की’ (क़ंदील बलोच के नाम) – सोफ़िया नाज़

नज़्म: ‘लड़की’ – सोफ़िया नाज़ (क़ंदील बलोच के नाम) पतले नंगे तार से लटकी जलती, बुझती, बटती वो लड़की जो तुम्हारी धमकी से नहीं डरती वो लड़की जिसकी मांग टेढ़ी है अंधी तन्क़ीद की कंघी से Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘शून्य’ – गजानन माधव मुक्तिबोध

‘शून्य’ – गजानन माधव मुक्तिबोध भीतर जो शून्य है उसका एक जबड़ा है जबड़े में मांस काट खाने के दाँत हैं; उनको खा जाएँगे, तुमको खा जाएँगे। भीतर का आदतन क्रोधी अभाव वह हमारा स्वभाव Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘कहीं कभी’ – भुवनेश्वर

‘कहीं कभी’ – भुवनेश्वर कहीं कभी सितारे अपने आपकी आवाज पा लेते हैं और आसपास उन्हें गुजरते छू लेते हैं… कहीं कभी रात घुल जाती है और मेरे जिगर के लाल-लाल गहरे रंग को छू Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘गूंगी’ – रवींद्रनाथ टैगोर

कहानी: ‘गूंगी‘ – रवींद्रनाथ टैगोर कन्या का नाम जब सुभाषिणी रखा गया था तब कौन जानता था कि वह गूंगी होगी। इसके पहले, उसकी दो बड़ी बहनों के सुकेशिनी और सुहासिनी नाम रखे जा चुके Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘क्या करूँ’ – यासमीन हमीद

‘क्या करूँ’ – यासमीन हमीद क्या करूँ मैं आसमां को अपनी मुट्ठी में पकड़ लूँ या समुन्दर पर चलूँ पेड़ के पत्ते गिनूँ या टहनियों में जज़्ब होते ओस के क़तरे चुनूं डूबते सूरज को उंगली Read more…

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लघुकथाएँ | Short Stories

लघुकथा: ‘कविता’ – खलील जिब्रान

‘कविता’ – खलील जिब्रान अनुवाद: बलराम अग्रवाल एक कवि से मैंने एक बार कहा, “तुम्हारी मौत से पहले हम तुम्हारे शब्दों का मूल्य नहीं जान पाएँगे।” उसने कहा, “ठीक कहते हो। रहस्यों पर से परदा Read more…

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ग़ज़ल | Ghazal

इन्‍क़िलाब आया, नई दुन्‍या, नया हंगामा है

इन्‍क़िलाब आया, नई दुन्‍या, नया हंगामा है इन्‍क़िलाब आया, नई दुन्‍या, नया हंगामा है शाहनामा हो चुका, अब दौरे गांधीनामा है। दीद के क़ाबिल अब उस उल्‍लू का फ़ख्रो नाज़ है जिस से मग़रिब ने Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘कड़वा सत्य’ – विष्णु प्रभाकर

‘कड़वा सत्य’ – विष्णु प्रभाकर एक लंबी मेज दूसरी लंबी मेज तीसरी लंबी मेज दजीवारों से सटी पारदर्शी शीशेवाली अलमारियाँ मेजों के दोनों ओर बैठे हैं व्यक्ति पुरुष-स्त्रियाँ युवक-युवतियाँ बूढ़े-बूढ़ियाँ सब प्रसन्न हैं कम-से-कम अभिनय Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘रहमान का बेटा’ – विष्णु प्रभाकर

कहानी: ‘रहमान का बेटा’ – विष्णु प्रभाकर क्रोध और वेदना के कारण उसकी वाणी में गहरी तलखी आ गई थी और वह बात-बात में चिनचिना उठता था। यदि उस समय गोपी न आ जाता, तो Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘रोटी’ – आकांक्षा गौड़

‘रोटी’ – आकांक्षा गौड़ रोज़ सवेरे ऑफिस जाते वक़्त ट्रैफिक की लाल बत्ती पर गाड़ी रुकती थी रोज़ देखती थी मैं उस भीड़ में ज़िन्दगी से ज़द्दोज़हद करते लोगों को कहीं ऑटो के लिए भागते Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘ओ देस से आने वाले बता’ – अख़्तर शीरानी

‘ओ देस से आने वाले बता’ – अख़्तर शीरानी ओ देस से आने वाले बता किस हाल में हैं यारान-ए-वतन आवारा-ए-ग़ुर्बत को भी सुना किस रंग में है कनआन-ए-वतन वो बाग़-ए-वतन फ़िरदौस-ए-वतन वो सर्व-ए-वतन रैहान-ए-वतन Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना’ – अमृता प्रीतम

‘एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना’ – अमृता प्रीतम ‘पालक एक आने गठ्ठी, टमाटर छह आने रत्तल और हरी मिर्चें एक आने की ढेरी’, पता नहीं तरकारी बेचनेवाली स्त्री का मुख कैसा था कि मुझे Read more…

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Miscellaneous

‘हिंदीनामा’ के बारे में

‘हिंदीनामा’ के बारे में फेसबुक पेज ‘हिंदीनामा’ एक और प्रयास है हिन्दी के लेखकों/कवियों को एक दूसरे के और इस संसार के सामने लाने का! जल्दी ही यह पेज एक काव्य संकलन भी प्रकाशित करने Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘जब सोच रही थी मैं एक नज़्म’ – तनवीर अंजुम

नज़्म: ‘जब सोच रही थी मैं एक नज़्म’ – तनवीर अंजुम जब सोच रही थी मैं एक नज़्म वो निकल गई बराबर से नाराज़गी से मुझे देखती तवज्जोह नहीं दे सकी मैं उनकी दानिश-मंदाना बातों पर Read more…

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कविताएँ | Poetry

विजय गुँजन के हाइकु

विजय गुँजन के हाइकु डॉ विजय श्रीवास्तव लवली प्रोफेशनल यूनिवसिर्टी में अर्थशास्त्र विभाग में सहायक आचार्य है। आप गांधीवादी विचारों में शोध की गहन रूचि रखते हैं और कई मंचों पर गांधीवादी विचारों पर अपने Read more…

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कविताएँ | Poetry

भोपाल में थोड़ा-थोड़ा कितना कुछ है।

भोपाल पर गौरव ‘अदीब’ की एक कविता भोपाल में थोड़ा-थोड़ा कितना कुछ है भोपाल में बहुत सारा लख़नऊ है यहाँ ऐशबाग है, हमीदिया रोड है यहाँ पुलिया है और कैसरबाग सा छत्ता भी नदवा की Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘दो ज़िंदगियाँ’ – अज़रा अब्बास

नज़्म: ‘दो ज़िंदगियाँ’ – अज़रा अब्बास हम दो ज़िंदगियां जी रहे हैं एक वो जो तुम देख रहे हो हमें अच्छे कपड़े पहन कर घूमते हुए हंसते मुस्कुराते हुए एक वो, जो हम सह रहे हैं Read more…

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लेख । Articles

‘सरस्वती के आविर्भाव के समय हिन्दी की अवस्था’ – अम्बिका प्रसाद वाजपेयी

‘सरस्वती के आविर्भाव के समय हिन्दी की अवस्था’ – अम्बिका प्रसाद वाजपेयी जिन मुसलमान आक्रमणकारियों ने भारत पर आक्रमण कर उसका शासन अनेक वर्षों तक किया था, वे न अरब थे और न ईरानी, वे Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: प्रणय कुमार कृत ‘जंगल गाथा और कुछ प्रेम कविताएँ’

विवरण: प्रणय कुमार की कविताओं में अँधेरा है, चीख है, पुकार है, हाहाकार है और एक सन्नाटा है, किंतु यह अँधेरा मुक्तिबोध का नहीं है, न ही सन्नाटा नयी कविता वाला। इक्कीसवीं सदी का यह Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘बोल! अरी ओ धरती बोल!’ – मजाज़ लखनवी

‘बोल! अरी ओ धरती बोल!’ – मजाज़ लखनवी बोल! अरी ओ धरती बोल! राज सिंघासन डाँवाडोल बादल बिजली रैन अँधयारी दुख की मारी प्रजा सारी बूढ़े बच्चे सब दुखिया हैं दुखिया नर हैं दुखिया नारी Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘फूल और काँटा’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

‘फूल और काँटा’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं जन्म लेते जगह में एक ही, एक ही पौधा उन्हें है पालता रात में उन पर चमकता चाँद भी, एक ही सी चाँदनी है डालता। मेह Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ग्राम’ – जयशंकर प्रसाद

‘ग्राम’ – जयशंकर प्रसाद टन! टन! टन! स्टेशन पर घंटी बोली। श्रावण-मास की संध्या भी कैसी मनोहारिणी होती है! मेघ-माला-विभूषित गगन की छाया सघन रसाल-कानन में पड़ रही है। अंधियारी धीरे -धीरे अपना अधिकार पूर्व-गगन Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘सिंड्रेला’ – गौरी चुघ

‘सिंड्रेला’ – गौरी चुघ सुनो लड़की! इस बार कोयले की राख को पेशानी पर रगड़ लेना हालात की सौतेली बहनों से समझौता तुम कर लेना नहीं आएगी परी कोई तुम्हारा मुस्तक़बिल बदलने को कोई घोड़ागाड़ी Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘कला का जोखिम’

विवरण: निर्मल वर्मा के निबन्ध-संग्रहों के सिलसिले में कला का जोखिम उनकी दूसरी पुस्तक है, जिसका पहला संस्करण लगभग बीस साल पहले आया था। स्वयं निर्मलजी इस पुस्तक को अपने पहले निबन्ध-संग्रह शब्द और स्मृति तथा Read more…

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उद्धरण | Quotes

पाब्लो पिकासो – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

पाब्लो पिकासो – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण (अनुवाद: मनोज पटेल) कला एक झूठ है जो सत्य जानने में हमारी सहायता करती है। हर वह चीज वास्तविक है जिसकी तुम कल्पना कर सकते हो। सभी बच्चे कलाकार होते Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘देखेगा कौन?’ – शंभुनाथ सिंह

‘देखेगा कौन?’ – शंभुनाथ सिंह बगिया में नाचेगा मोर, देखेगा कौन? तुम बिन ओ मेरे चितचोर, देखेगा कौन? नदिया का यह नीला जल, रेतीला घाट, झाऊ की झुरमुट के बीच, यह सूनी बाट, रह-रह कर Read more…

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पत्र | Letters

‘शिक्षक को पत्र’ – अब्राहम लिंकन

‘शिक्षक को पत्र’ – अब्राहम लिंकन सम्माननीय सर… मैं जानता हूँ कि इस दुनिया में सारे लोग अच्छे और सच्चे नहीं हैं। यह बात मेरे बेटे को भी सीखनी होगी। पर मैं चाहता हूँ कि Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘मेघदूत’ – फ़हमीदा रियाज़

‘मेघदूत’ – फ़हमीदा रियाज़ सनसनाहटों के साथ गड़गड़ाहटो के साथ आ गया पवन रथ पे बैठ कर मेरा मेघ देवता दोश पर हवाओं के बाल उड़ाता हुआ उसका जामुनी बदन आसमाँ पे छा गया दूर तक Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: सीत मिश्रा कृत ‘रूममेट्स’

  विवरण: युवा लेखिका और पत्रकार सीत मिश्रा की पहली कृति है- रूममेट्स। पहला उपन्यास। कस्बे से निकली हुई लड़कियाँ छोटे शहरों से लिखते-पढ़ते और परिवार की वर्जनाओं और हिचक को झटकते हुए नोएडा पहुँचती हैं। Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘रतजगों का ज़वाल’ – शहरयार

‘रतजगों का ज़वाल’ – शहरयार वो अँधेरी रात की चाप थी जो गुज़र गई कभी खिड़कियों पे न झुक सकी किसी रास्ते में न रुक सकी उसे जाने किस की तलाश थी मिरी आँख ओस Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘ईद मुबारक’ – केदारनाथ अग्रवाल

‘ईद मुबारक’ – केदारनाथ अग्रवाल हमको, तुमको, एक-दूसरे की बाहों में बँध जाने की ईद मुबारक। बँधे-बँधे, रह एक वृंत पर, खोल-खोल कर प्रिय पंखुरियाँ कमल-कमल-सा खिल जाने की, रूप-रंग से मुसकाने की हमको, तुमको Read more…

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निबन्ध | Essay

‘हँसी-खुशी’ – बालमुकुंद गुप्त

निबन्ध: ‘हँसी-खुशी’ – बालमुकुंद गुप्त हँसी भीतर आनंद का बाहरी चिह्न है। जीवन की सबसे प्यारी और उत्तम से उत्तम वस्तु एक बार हँस लेना तथा शरीर के अच्छा रखने की अच्छी से अच्छी दवा Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘ये वो धरती नहीं है’ – गुलनाज़ कौसर

‘ये वो धरती नहीं है’ – गुलनाज़ कौसर नहीं ये वो धरती नहीं है नहीं ये वो धरती नहीं है जहां मेरा बचपन मेरा तितलीयों, फूलों, रंगों से लबरेज़ बचपन किसी शाहज़ादी की रंगीं कहानी की Read more…

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कविताएँ | Poetry

इब्ने इंशा के कवित्त

इब्ने इंशा के कवित्त (1) जले तो जलाओ गोरी, पीत का अलाव गोरी अभी न बुझाओ गोरी, अभी से बुझाओ ना। पीत में बिजोग भी है, कामना का सोग भी है पीत बुरा रोग भी Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: मुज़फ़्फ़र हनफ़ी कृत ‘ग़ज़ल झरना’

विवरण: “मुज़फ़्फ़र साहब की शायरी फ़लक से गुनगुनाती हुई गिरती बरसात की बूँदों की याद दिलाती है जिसमें लगातार भीगते रहने का मन करता है। भाषा की ऐसी मिठास, ऐसी रवानी और कहीं मिलना दुर्लभ है Read more…

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लघुकथाएँ | Short Stories

विजय ‘गुंजन’ की लघु कथाएँ

विजय ‘गुंजन’ की लघु कथाएँ डॉ विजय श्रीवास्तव लवली प्रोफेशनल यूनिवसिर्टी में अर्थशास्त्र विभाग में सहायक आचार्य है। आप गांधीवादी विचारों में शोध की गहन रूचि रखते हैं और कई मंचों पर गांधीवादी विचारों पर Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘इक बार कहो तुम मेरी हो’ – इब्ने इंशा

‘इक बार कहो तुम मेरी हो’ – इब्ने इंशा हम घूम चुके बस्ती बन में इक आस की फाँस लिए मन में कोई साजन हो कोई प्यारा हो कोई दीपक हो, कोई तारा हो जब Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘क़ैद में रक़्स’ – किश्वर नाहीद

‘क़ैद में रक़्स’ – किश्वर नाहीद सब के लिए ना-पसंदीदा उड़ती मक्खी कितनी आज़ादी से मेरे मुँह और मेरे हाथों पर बैठती है और इस रोज़-मर्रा से आज़ाद है जिस में मैं क़ैद हूँ मैं तो Read more…

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लघुकथाएँ | Short Stories

लघुकथा: ‘शेर की गुफा में न्याय’ – शरद जोशी

‘शेर की गुफा में न्याय’ – शरद जोशी जंगल में शेर के उत्पात बहुत बढ़ गए थे। जीवन असुरक्षित था और बेहिसाब मौतें हो रही थीं। शेर कहीं भी, किसी पर हमला कर देता था। Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘आँखों की धुंध में’ – भुवनेश्वर

‘आँखों की धुंध में’ – भुवनेश्वर आँखों की धुंध में उड़ती-सी अफवाह का एक अजब मजाक है यह पिघलते हुए दिल और नमाई हुई रोटी का हीरा तो खान में एक प्यारा-सा फसाना है किसी Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘एक पुरानी कहानी’ – ज़हरा निगाह

‘एक पुरानी कहानी’ – ज़हरा निगाह किसी शहर में इक कफ़न चोर आया जो रातों को क़ब्रों में सूराख़ करके तन ए कुश्तगां से कफ़न खींच लेता आख़िर ए कार पकड़ा गया और उसको मुनासिब सज़ा Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘आख़िरी बातचीत’ – लू शुन

‘आख़िरी बातचीत’ – लू शुन पिताजी बहुत मुश्किल से ही साँस ले पा रहे थे। यहाँ तक कि उनकी सीने की धड़कन भी मुझे सुनाई नहीं दे रही थी। मगर अब शायद ही कोई उनकी Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: गीतांजलि श्री कृत ‘रेत समाधी’

विवरण: अस्सी की होने चली दादी ने विधवा होकर परिवार से पीठ कर खटिया पकड़ ली। परिवार उसे वापस अपने बीच खींचने में लगा। प्रेम, वैर, आपसी नोकझोंक में खदबदाता संयुक्त परिवार। दादी बजि़द कि अब Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘मैंने आहुति बन कर देखा’ – अज्ञेय

‘मैंने आहुति बन कर देखा’ – अज्ञेय मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने? काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा Read more…

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लघुकथाएँ | Short Stories

लघुकथा: ‘रसोई-घर और पाखाना’ – हरिशंकर परसाई

लघुकथा: ‘रसोई-घर और पाखाना’ – हरिशंकर परसाई गरीब लड़का है। किसी तरह हाई स्‍कूल परीक्षा पास करके कॉलेज में पढ़ना चाहता है। माता-पिता नहीं हैं। ब्राह्मण है। शहर में उसी के सजातीय सज्‍जन के यहाँ Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: समीर ‘अनजान’ कृत ‘समीराना गीत’

विवरण: जहाँ से चले थे वहीं आ गये हम, चले उम्र भर फ़ासले हुए न कम-यही है समीर की पूरी यात्रा। एक गीतकार के आईने में अगर समीर को उतारा जाये तो उनकी तस्वीर पानी की Read more…

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कविताएँ | Poetry

अंकिता वर्मा की कविताएँ

अंकिता वर्मा की कविताएँ अंकिता वर्मा हिमाचल के प्यारे शहर शिमला से हैं। तीन सालों से चंडीगढ़ में रहकर एक टेक्सटाइल फर्म में बतौर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव काम कर रही थीं, फिलहाल नौकरी छोड़ कर किताबें पढ़ रही हैं, Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘जलते हुए मकान में कुछ लोग’ – राजकमल चौधरी

‘जलते हुए मकान में कुछ लोग’ – राजकमल चौधरी इस बात में शक की कोई गुंजाइश नहीं। वह मकान वेश्यागृह ही था। मंदिर नहीं था। धर्मशाला भी नहीं। शमशाद ने कहा था – तुम्हें कोई Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘ठाकुर का कुआँ’ – ओमप्रकाश वाल्मीकि

‘ठाकुर का कुआँ’ – ओमप्रकाश वाल्मीकि चूल्‍हा मिट्टी का मिट्टी तालाब की तालाब ठाकुर का भूख रोटी की रोटी बाजरे की बाजरा खेत का खेत ठाकुर का बैल ठाकुर का हल ठाकुर का हल की Read more…

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कहानी | Story

लोककथा: ‘कमजोर’ – अंतोन चेखव

‘कमजोर’ – अंतोन चेखव (Hindi Translation of the Short Story ‘A Nincompoop’ by Anton Chekhov) आज मैं अपने बच्चों की अध्यापिका यूलिमा वार्सीयेव्जा का हिसाब चुकता करना चाहता था। “बैठ जाओ, यूलिमा वार्सीयेव्जा।” मेंने उससे Read more…

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उद्धरण | Quotes

‘झूठा सच’ से यशपाल की कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

‘झूठा सच’ से यशपाल की कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण “सच को कल्पना से रंग कर उसी जन समुदाय को सौंप रहा हूँ जो सदा झूठ से ठगा जाकर भी सच के लिए अपनी निष्ठा और उसकी ओर Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘बिजली फेल होने पर’ – बेढब बनारसी

‘बिजली फेल होने पर’ – बेढब बनारसी फेल बिजली हो गयी है रात मेरे ही भवन में आज आकर खो गयी है आ रही थीं वह लिए थाली मुझे भोजन खिलाने मैं उसी दम था Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: प्रेम भारद्वाज कृत ‘फोटो अंकल’

विवरण: प्रेम भारद्वाज का कहानीकार मूलत: काव्यात्मक संवेदना से समृद्ध है। वे कहानी को न दूर बैठकर देखते हैं और न फासला रखकर सुनाते हैं। महसूस करते हुए वे अपने समूचे वजूद के साथ उसमें डूब Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘टिटवाल का कुत्ता’ – सआदत हसन मंटो

‘टिटवाल का कुत्ता’ – सआदत हसन मंटो कई दिनों से दोनों तरफ से सिपाही अपने-अपने मोर्चे पर जमे हुए थे। दिन में इधर और उधर से दस-बारह गोलियाँ चल जातीं, जिनकी आवाज़ के साथ कोई Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘ओ अपाहिज आस्थाओं’ – हरीश भादानी

‘ओ अपाहिज आस्थाओं’ – हरीश भादानी ओ अपाहिज आस्थाओ! घुटन-कुण्ठा-अहम् भुभुक्षा की चौकोर शैयां पर लेटी रहो- चीखो नहीं, यह नहीं होगा कि- मैं तुम पर दया करने तुम्हारे पायताने लौट आऊँ, जीव हत्या के Read more…

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कविताएँ | Poetry

मैं क़सम खाता हूँ कि बग़ैर किसी क़सम के तुम्हें प्रेम करूँगा।

अनुराग तिवारी की कविताएँ अनुराग तिवारी ने ऐग्रिकल्चरल एंजिनीरिंग की पढ़ाई की, लगभग 11 साल विभिन्न संस्थाओं में काम किया और उसके बाद ख़ुद का व्यवसाय भोपाल में रहकर करते हैं। बीते 10 सालों में Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘मेरी जेब’ – कामता प्रसाद सिंह‍ ‘काम’

व्यंग्य: ‘मेरी जेब’ – कामता प्रसाद सिंह‍ ‘काम’ जादू का खजाना, भानुमती की पिटारी, रहस्‍यों और भेदों को गुप्‍त रखने के लिए चोली, देखने में भोली-भाली पर कमाल का काम करने वाली यह मेरी जेब Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: दिव्या माथुर द्वारा सम्पादित ‘इक सफ़र साथ-साथ’

विवरण: प्रवासी साहित्य की जिन विशेषताओं स्मृति, अस्मिता के सवाल, प्रकृति, स्त्री विमर्श, स्त्री-पुरुष सम्बन्ध, पीढ़ियों के संघर्ष व द्वन्द्व, सभ्यतामूलक अन्तर्द्वन्द्व, रंगभेद, यांत्रिकता पर चर्चा होती है; वे सब विशेषताएँ किसी सायास प्रयास के तहत Read more…

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ग़ज़ल | Ghazal

‘तराना-ए-बिस्मिल’ – राम प्रसाद बिस्मिल

‘तराना-ए-बिस्मिल’ – राम प्रसाद बिस्मिल बला से हमको लटकाए अगर सरकार फांसी से, लटकते आए अक्सर पैकरे-ईसार फांसी से। लबे-दम भी न खोली ज़ालिमों ने हथकड़ी मेरी, तमन्ना थी कि करता मैं लिपटकर प्यार फांसी Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘छाप तिलक सब छीनी’ – अमीर खुसरो 

‘छाप तिलक सब छीनी’ – अमीर खुसरो  अपनी छवि बनाइ के जो मैं पी के पास गई, जब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई। छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाइ के Read more…

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उद्धरण | Quotes

‘स्त्रियों के लिए नसीहतें’ – माया एंजेलो

‘स्त्रियों के लिए नसीहतें’ – माया एंजेलो  (अनुवाद: विपिन चौधरी) 1. एक औरत के पास अपने नियंत्रण में पर्याप्त पैसा होना चाहिए ताकि बाहर जाते वक्त या खुद के लिए एक जगह किराए पर लेकर वह Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘युधिष्ठिर’ – अम्बर बहराईची

‘युधिष्ठिर’ – अम्बर बहराईची अभी चीड़ के जंगलों से गुज़रना बहुत जाँ-फ़ज़ा है कई मील के बाद बर्फ़ीले तूदों का सहरा मिलेगा जहाँ सर्द पुरवाइयों के थपेड़े थिरकते मिलेंगे उमूदी ढलानों का इक सिलसिला भी Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: अविनाश मिश्र कृत ‘नये शेखर की जीवनी’

विवरण: शेखर मानता है कि ईश्वर को न मानना एक अवगुण है। उसे उन सारे विचारों से घृणा है जो उससे उसका ईश्वर छीनते हैं। उसका ईश्वर दर्शक-दीर्घा में हँसता हुआ एक त्रासद व्यक्तित्व और एक Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘आहुति’ – प्रेमचंद

‘आहुति’ – प्रेमचंद आनन्द ने गद्देदार कुर्सी पर बैठकर सिगार जलाते हुए कहा- आज विशम्भर ने कैसी हिमाकत की! इम्तहान करीब है और आप आज वालण्टियर बन बैठे। कहीं पकड़ गये, तो इम्तहान से हाथ Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘व्याकुल चाह’ – सुभद्राकुमारी चौहान

‘व्याकुल चाह’ – सुभद्राकुमारी चौहान सोया था संयोग उसे किस लिए जगाने आए हो? क्या मेरे अधीर यौवन की प्यास बुझाने आए हो?? रहने दो, रहने दो, फिर से जाग उठेगा वह अनुराग। बूँद-बूँद से Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘भेड़-भेड़िये, भाई-भाई!’ – रामनारायण उपाध्याय

‘भेड़-भेड़िये, भाई-भाई!’ – रामनारायण उपाध्याय बोले – कहानी कहो। कहा – कहानी सुनो, एक था राजा। बोले – राजाओं की कहानी हमें नहीं सुननी है, वे तो इतिहास की वस्‍तु बन चुके। कहा – एक Read more…

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ग़ज़ल | Ghazal

ग़ज़ल: ‘टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली’ – मीना कुमारी

‘टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली’ – मीना कुमारी टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी आँखें हँस दीं Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: गगन गिल कृत ‘मैं जब तक आयी बहार’

विवरण: ‘मैं क्यों कहूँगी तुम से/अब और नहीं/सहा जाता/मेरे ईश्वर’- गगन गिल की ये काव्य-पंक्तियाँ किसी निजी पीड़ा की ही अभिव्यक्ति हैं या हमारे समय के दर्द का अहसास भी? और जब यह पीड़ा अपने पाठक Read more…

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उद्धरण | Quotes

हेनरिक हाइने – कुछ पंक्तियाँ

हेनरिक हाइने – कुछ पंक्तियाँ ईश्वर मुझे माफ कर देगा। यह उसका जॉब है। अनुभव एक अच्छा स्कूल है, पर उसकी फीस बहुत ज्यादा है। नींद कितनी प्यारी चीज है, मौत उससे भी ज्यादा और Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘उर्दू का स्यापा’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘उर्दू का स्यापा’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट और बनारस अखबार के देखने से ज्ञात हुआ कि बीबी उर्दू मारी गई और परम अहिंसानिष्ठ होकर भी राजा शिवप्रसाद ने यह हिंसा की– हाय हाय! Read more…

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नज़्में | Nazmein

नज़्म: ‘खंडर’ – शमीम करहानी

‘खंडर’ – शमीम करहानी इसी उदास खंडर के उदास टीले पर जहाँ पड़े हैं नुकीले से सुरमई कंकर जहाँ की ख़ाक पे शबनम के हार बिखरे हैं शफ़क़ की नर्म किरन जिस पे झिलमिलाती है Read more…

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उद्धरण | Quotes

‘जीवन मानो एक दावत हो’ – एपिक्टेटस

‘जीवन मानो एक दावत हो’ – एपिक्टेटस “जीवन को इस तरह ग्रहण करें मानो वह एक दावत हो जिसमें आपको शालीनता के साथ पेश आना है। जब तश्‍तरियाँ आपकी ओर बढ़ाई जाएँ, अपना हाथ बढ़ाएँ Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘अनमोल भेंट’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘अनमोल भेंट’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर रायचरण बारह वर्ष की आयु से अपने मालिक का बच्‍चा खिलाने पर नौकर हुआ था। उसके पश्चात् काफी समय बीत गया। नन्हा बच्‍चा रायचरण की गोद से निकलकर स्कूल में Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सरदार जी’ – ख्वाजा अहमद अब्बास

कहानी: ‘सरदार जी’ – ख्वाजा अहमद अब्बास (अनुवाद: शम्भु यादव) लोग समझते हैं सरदार जी मर गये। नहीं यह मेरी मौत थी। पुराने मैं की मौत। मेरे तअस्सुब (धर्मान्धता) की मौत। घृणा की मौत जो Read more…

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उद्धरण | Quotes

ओरहान पामुक – कुछ पंक्तियाँ (From ‘My Name Is Red’)

ओरहान पामुक – कुछ पंक्तियाँ (From My Name Is Red) “मैं पेड़ नहीं बनना चाहता, मैं पेड़ का मतलब होना चाहता हूँ।” “बताओ तो फिर, प्रेम में इंसान मूर्ख हो जाता है या केवल मूर्ख Read more…

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ग़ज़ल | Ghazal

ग़ज़ल: ‘क्या कहें उनसे बुतों में हमने क्या देखा नहीं’ – बहादुर शाह ज़फ़र

‘क्या कहें उनसे बुतों में हमने क्या देखा नहीं’ – बहादुर शाह ज़फ़र क्या कहें उनसे बुतों में हमने क्या देखा नहीं जो यह कहते हैं सुना है, पर ख़ुदा देखा नहीं ख़ौफ़ है रोज़े-क़यामत का Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘निष्ठा’ – रेनर मरिया रिल्के 

कविता: ‘निष्ठा’ – रेनर मरिया रिल्के  (‘Extinguish My Eyes’ का अनुवाद, धर्मवीर भारती द्वारा) मेरी आँखें निकाल दो फिर भी मैं तुम्हें देख लूँगा मेरे कानों में सीसा उड़ेल दो पर तुम्हारी आवाज़ मुझ तक पहुँचेगी Read more…

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बाल साहित्य | Children's Literature

बाल कहानी: ‘छोटा जादूगर’ – जयशंकर प्रसाद

‘छोटा जादूगर’ – जयशंकर प्रसाद कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। हँसी और विनोद का कलनाद गूँज रहा था। मैं खड़ा था उस छोटे फुहारे के पास, जहाँ एक लड़का चुपचाप शराब पीनेवालों Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘एक बूँद’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

‘एक बूँद’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ ज्यों निकल कर बादलों की गोद से थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी सोचने फिर-फिर यही जी में लगी, आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी? देव Read more…

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कहानी | Story

‘अदला-बदली’ – खलील जिब्रान

लोककथा: ‘अदला-बदली’ – खलील जिब्रान एक गरीब कवि की एक बार शहर के एक चौराहे पर एक धनी मूर्ख से मुलाकात हो गई। उन्होंने बहुत-सी बातें कीं लेकिन सबकी सब बेमतलब। तभी उस सड़क का Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: चंद्रेश्वर कृत ‘सामने से मेरे’

विवरण: चंद्रेश्वर प्रतिरोध और प्रेम के समकालीन कवि हैं। पढ़ने में उनकी कविताएँ जितनी सरल हैं, लिखने में उतनी ही कठिन। वे अदृश्य विडम्बनाओं को सहज ही दृश्यमान कर देने की कला में माहिर हैं। Read more…

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संस्मरण | Memoirs

संस्मरण: ‘कुआँ प्यासे के पास आया’ – पृथ्वीराज कपूर

‘कुआँ प्यासे के पास आया’ – पृथ्वीराज कपूर दरियागंज की एक छोटी-सी गली में, एक छोटे-से मकान की, एक छोटी सी बैठक के छोटे-से दरवाजे में घुसते ही, एक छोटी-सी चारपाई पर एक विशाल मूर्ति Read more…

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निबन्ध | Essay

‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र आज बड़े आनंद का दिन है कि छोटे से नगर बलिया में हम इतने मनुष्यों को एक बड़े उत्साह से एक स्थान पर देखते हैं। इस अभागे Read more…

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कविताएँ | Poetry

ज्योति शोभा की कविताएँ

ज्योति शोभा की कविताएँ सजग पाठिका एवम सदैव साहित्य सृजन में उन्मुख ज्योति शोभा अंग्रेजी साहित्य में स्नातक हैं। ‘बिखरे किस्से’ संग्रह के अतिरिक्त इनकी कई कविताएं राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं।  प्रेम, Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: अनुराग तिवारी कृत ‘अभी जिया नहीं’

विवरण: अनुराग तिवारी में कठिन प्रेत की साधना का संयम है, जोकि उड़ती हुई कविता के पंख में बँधी किसी पंक्ति-सा अपने निशान छोड़ता चलता है। उनके यहाँ सादगी एक त्वचा का नाम है, जो देह Read more…

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पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘पांच एब्सर्ड उपन्यास’ – नरेन्द्र कोहली

‘पांच एब्सर्ड उपन्यास’ – नरेन्द्र कोहली नरेन्द्र कोहली की किताब ‘पाँच एब्सर्ड उपन्यास’ पर आदित्य भूषण मिश्रा की टिप्पणी! मैंने जब किताब के ऊपर यह नाम देखा तो कुछ ठीक-ठीक समझ नहीं पाया. किताब उलटते-पुलटते Read more…

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कविताएँ | Poetry

मैं तुम्हें प्यार करता हूँ

कविता: ‘मैं तुम्हें प्यार करता हूँ’ – एरिश फ्रीड  अनुवाद – प्रतिभा उपाध्याय मैं तुम्हें प्यार करता हूँ इसलिए नहीं कि तुम ऐसी हो अपितु इसलिए कि मैं ऐसा बन जाता हूँ जब मैं तुम्हारे साथ Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘बीच बहस में’

विवरण: बीच बहस में एक मौत हुई थी। लगा था कि दिवंगत के साथ ही उसके साथ होने वाली बहस भी समाप्त हो गयी। पर बहस समाप्त हुई नहीं। हो भी कैसे? बहस केवल उससे तो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘आजादी: एक पत्र’ – भुवनेश्वर

कहानी: ‘आजादी: एक पत्र’ – भुवनेश्वर वही मार्च का महीना फिर आ गया। आज शायद वही तारीख भी हो। पर मेरे लिखने का सबब इतना निकम्मा नहीं है। असल में प्यारे दोस्त, इस एक साल Read more…

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कहानी | Story

लोककथा: ‘कैदी’ – ओ. हेनरी

लोककथा: ‘कैदी’ – ओ. हेनरी अनुवाद – सुकेश साहनी जीवन के सुख-दुख का प्रतिबिंब मनुष्य के मुखड़े पर सदैव तैरता रहता है, लेकिन उसे ढूँढ़ निकालने की दृष्टि केवल चित्रकार के पास होती है। वह Read more…

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कविताएँ | Poetry

धृतराष्ट्रों की आँखें फूट चुकी थीं..

उड़िया कविता: ‘युद्ध’ – शत्रुघ्न पाण्डव कुरुक्षेत्र से कुवैत तक धृतराष्ट्रों की आँखें फूट चुकी थीं रक्त में जल रहा था अहंकार घायल किए बिना नहीं लौटता कोई भी अस्त्र एक-एक अजातशत्रु आपस में जूझ रहे Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: श्यौराज सिंह बेचैन कृत ‘भोर के अँधेरे में’

विवरण: व्यवस्था के ख़ौफ़नाक मंज़र को चीरता कवि श्यौराज सिंह बेचैन का पाँचवाँ कविता संग्रह ‘भोर के अँधेरे में’ आपके हाथों में है। समाज सरोकार से सराबोर ये कविताएँ दलित दर्द का ज़िन्दा इतिहास हैं। मानो Read more…

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