नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘भारत और यूरोप: प्रतिश्रुति के क्षेत्र’

विवरण: ‘ये निबन्ध मेरे उन अकेले वर्षों के साक्षी हैं जब मैं…अपने साहित्यिक समाज की पूर्वनिर्धारित धारणाओं से अपने को असहमत और अलग पाता था…मैं अपने निबन्धों और कहानियों में किसी तरह की फाँक नहीं देखता। Read more…

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पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ – एक टिप्पणी

‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ – एक टिप्पणी असग़र वजाहत की किताब ‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ पर आदित्य भूषण मिश्रा की एक टिप्पणी मैं अभी पिछले दिनों, असग़र वजाहत साब की क़िताब “पाकिस्तान का मतलब क्या” Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘देर से, बहुत देर से बतानी चाहिए जाने की ख़बर!!’ – गौरव अदीब की नयी कविताएँ

गौरव अदीब की कुछ नयी कविताएँ गौरव सक्सेना ‘अदीब’ बतौर स्पेशल एजुकेटर इंटरनेशनल स्कूल में कार्यरत हैं और थिएटर व शायरी में विशेष रुचि रखते हैं। दस वर्षों से विभिन्न विधाओं में लेखन के साथ-साथ Read more…

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निबन्ध | Essay

खड़ी बोली में प्रथम सफल कविता आप ही कर सके हैं।

‘कविवर श्री सुमित्रानन्दन पन्त’ – सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ “मग्न बने रहते हैं मोद में विनोद में क्रीड़ा करते हैं कल कल्पना की गोद में, सारदा के मन्दिर में सुमन चढ़ाते हैं प्रेम का ही पुण्यपाठ Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘अब माँ शांत है!’ – शिवा

‘अब माँ शांत है!’ – शिवा मुझे लोगों पर बहुत प्यार आया ज़रा संकोच न हुआ मैंने प्यार बरसा दिया अब मन शांत है मुझे लोगों पर बहुत गुस्सा आया ज़रा संकोच हुआ मैंने माँ Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर

‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से नज़र आ जाता है। टीले के ऐन नीचे पहाड़ी झील है। एक बल खाती सड़क Read more…

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उद्धरण | Quotes

‘युवा प्रेमियों के लिए लाल गुलाब। पुराने रिश्तों के लिए फ्रेंच बीन्स।’

रस्किन बॉन्ड की कुछ पंक्तियाँ … युवा प्रेमियों के लिए लाल गुलाब। पुराने रिश्तों के लिए फ्रेंच बीन्स। प्रेम जो मृत्यु से परे है, वही जीवन को बचाए रखता है। और जब सारी जंग खत्म Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: भानु भारती कृत ‘तमाशा न हुआ’

विवरण: मानवीय सभ्यता के ‘आधुनिकतावादी’ दौर में ऐसा प्रतीत होने लगा था कि मनुष्य ने अन्ततः अपनी मुक्ति का पथ प्रशस्त कर लिया है और अब वह अपनी नियति के मकड़जाल से निकल कर, अधिक तर्कसंगत Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर

‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष लगाया Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘जेठ’ पर हाइकु

‘जेठ’ पर हाइकु जेठ (ज्येष्ठ) हिन्दू पंचांग के अनुसार साल का तीसरा महीना होता है और इस माह को गर्मी का महीना भी कहा जाता है। आई. आई. टी. रुड़की में कार्यरत रमाकांत जी ने Read more…

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निबन्ध | Essay

‘आचरण की सभ्यता’ – सरदार पूर्ण सिंह

‘आचरण की सभ्यता’ – सरदार पूर्ण सिंह विद्या, कला, कविता, साहित्‍य, धन और राजस्‍व से भी आचरण की सभ्‍यता अधिक ज्‍योतिष्‍मती है। आचरण की सभ्‍यता को प्राप्‍त करके एक कंगाल आदमी राजाओं के दिलों पर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: प्रो. शेरसिंह बिष्ट कृत ‘समीक्षा की कसौटी पर’

विवरण: ‘समीक्षा की कसौटी पर’ पुस्तक में समीक्षा के परम्परित प्रतिमानों पर नये सिरे से विचार किया गया है। समीक्षा के मानकों के परम्परित स्वरूप, साहित्य के बदलते सन्दर्भों में उनकी उपादेयता तथा साहित्यिक मूल्यबोध Read more…

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निबन्ध | Essay

‘जी’ – बालकृष्ण भट्ट

‘जी’ – बालकृष्ण भट्ट साधारण बातचीत में यह जी भी जी का जंजाल सा हो रहा है। अजी बात ही चीत क्‍या जहाँ और जिसमें देखो उसी में इस जी से जीते जी छुटकारा नहीं Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘दुलाईवाली’ – बंग महिला

‘दुलाईवाली’ – बंग महिला काशी जी के दशाश्‍वमेध घाट पर स्‍नान करके एक मनुष्‍य बड़ी व्‍यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती Read more…

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कविताएँ | Poetry

विशेष चंद्र ‘नमन’ की कविताएँ

विशेष चंद्र नमन दिल्ली विवि, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में तृतीय वर्ष, स्नातक (गणित) में अध्ययनरत हैं। गुज़रे तीन वर्षों में कॉलेज के दिनों में साहित्यिक रुचि खूब जागी, नया पढ़ने का मौका Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: जय प्रकाश मानस कृत ‘सपनों के करीब हो आँखें’

विवरण: जय प्रकाश मानस के प्रस्तुत संकलन की कविताएं आम आदमी की फ़िक्र में लिखी गयी कविताएँ हैं। उनकी कविताओं के सरोकार के केन्द्र में उनके आसपास का मामूली आदमी है। वे अपनी कविताओं में Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद

‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद ”यह तुम्हारा दुस्साहस है, चन्द्रदेव!” ”मैं सत्य कहता हूँ, देवकुमार।” ”तुम्हारे सत्य की पहचान बहुत दुर्बल है, क्योंकि उसके प्रकट होने का साधन असत् है। समझता हूँ कि तुम प्रवचन Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी लम्बे देवदारों का झुरमुट झक-झुककर गेठिया सैनेटोरियम की बलैया-सी ले रहा था। काँच की खिड़कियों पर सूरज की आड़ी-तिरछी किरणें मरीज़ों के क्लांत चेहरों पर पड़कर उन्हें उठा देती थीं। मौत Read more…

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लेख । Articles

‘अद्भुत मक्खियाँ’ – महावीर प्रसाद द्विवेदी

‘अद्भुत मक्खियाँ’ – महावीर प्रसाद द्विवेदी ईश्वर की सृष्टि में अनेक जीव-जंतु ऐसे हैं जिनकी विचित्रता का वृत्तांत सुनकर आश्चर्य चकित होना पड़ता है। अभी, कुछ ही समय पूर्व, जॉन जे वार्ड (John J. Ward) Read more…

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निबन्ध | Essay

‘समय’ – बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’

‘समय’ – बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ काव्यशासस्त्र विनोदेन कालो गच्छति धीमताम। व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा॥ यह विख्यात है कि त्रिभुवन में विजय की पताका फहराने वाला, अपने कुटिल कुत्सित परिवार से ब्राह्मणों को दुःख Read more…

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कविताएँ | Poetry

बालकवि बैरागी की बाल कविताएँ

बालकवि बैरागी की बाल कविताएँ यह केवल पाठकों का ही नहीं, हिन्दी साहित्य का भी दुर्भाग्य है, कि हिन्दी के लेखक और कवियों को भारत का एक बड़ा वर्ग उनके निधन के बाद पढ़ना शुरू Read more…

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पत्र | Letters

‘पगली का पत्र’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

‘पगली का पत्र’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध तुम कहोगे कि छि:, इतनी स्वार्थ-परायणता! पर प्यारे, यह स्वार्थ-परायणता नहीं है, यह सच्चे हृदय का उद्गार है, फफोलों से भरे हृदय का आश्वासन है, व्यथित हृदय Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: उषाकिरण खान कृत ‘गई झुलनी टूट’

विवरण: उषाकिरण खान का यह नया उपन्यास गई झुलनी टूट उनकी प्रसिद्धि को एक कदम आगे लेकर जाता है। इसमें उन्होंने एक सीधा-सादा मगर मार्मिक सवाल उठाया है, ‘…जीवन केवल संग-साथ नहीं है। संग-साथ है तो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्‍पन्‍न हुई : मैं अपने स्‍थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा Read more…

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निबन्ध | Essay

निबन्ध: ‘पेट’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘पेट’ – प्रतापनारायण मिश्र इन दो अक्षरों की महिमा भी यदि अपरंपार न कहिए तौ भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि बहुत बड़ी है। जितने प्राणी और अप्राणी, नाम रूप देखने सुनने में आते Read more…

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कविताएँ | Poetry

जोशना बैनर्जी आडवानी की कविताएँ

आज पोषम पा पर प्रस्तुत हैं जोशना बैनर्जी आडवानी की कुछ कविताएँ। जोशना इन्टर कॉलेज में प्राचार्या हैं और कत्थक व भरतनाट्यम में प्रभाकर कर चुकी हैं। जोशना को कविताएँ लिखना बेहद पसंद है और Read more…

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कहानी | Story

लोककथा: ‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान

‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान एक सीप ने पड़ोसी सीप से कहा, “मुझे बड़ा तेज दर्द महसूस हो रहा है। कोई भारी और गोल चीज़ है। मेरा दम निकला जा रहा है।” दूसरी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर

‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर चारपाई को घेरकर बैठे हुए उन सब लोगों ने एक साथ एक गहरी साँस ली। वह सब थके-हारे हुए खामोश थे। कमरे में पूरी खामोशी थी, मरने वाले की साँस भी थकी Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘माँ’ के लिए कुछ कविताएँ

‘माँ’ के लिए कुछ कविताएँ ‘माँ’ – मोहनजीत मैं उस मिट्टी में से उगा हूँ जिसमें से माँ लोकगीत चुनती थी हर नज्म लिखने के बाद सोचता हूँ- क्या लिखा है? माँ कहाँ इस तरह Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘माँ’ – प्रेमचंद

‘माँ’ – प्रेमचंद आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, Read more…

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बाल साहित्य | Children's Literature

बाल कहानी: ‘गिरगिट का सपना’ – मोहन राकेश

‘गिरगिट का सपना’ – मोहन राकेश एक गिरगिट था। अच्‍छा, मोटा-ताजा। काफी हरे जंगल में रहता था। रहने के लिए एक घने पेड़ के नीचे अच्‍छी-सी जगह बना रखी थी उसने। खाने-पीने की कोई तकलीफ Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘दरवाज़े गर ज़बान की चिटखनी खोल पाते तो बताते..’ – गौरी चुघ की नज्में

गौरी चुघ स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक दशक से ज़्यादा समय से सक्रिय हैं। उन्होंने शिक्षा जगत से जुड़े विभिन्न सरकारी, ग़ैर-सरकारी और निजी संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। 2008 में Read more…

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कहानी | Story

‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज

‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज अनुवाद – सरिता शर्मा बच्चों ने सबसे पहले समुद्र से तेजी से आते काले उभार को देखा, तो उन्होंने उसे दुश्मन का जहाज समझा। Read more…

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पत्र | Letters

नेहरू के नाम मंटो का खत

‘नेहरू के नाम मंटो का खत’ – सआदत हसन मंटो (उर्दू से अनुवाद : डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा) पंडित जी, अस्‍सलाम अलैकुम। यह मेरा पहला खत है जो मैं आपको भेज रहा हूँ। आप माशा अल्‍लाह Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘बू’ – सआदत हसन मंटो

‘बू’ – सआदत हसन मंटो बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे सागवन के स्प्रिन्गदार पलंग पर, जो अब खिड़की के पास थोड़ा इधर सरका दिया Read more…

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लेख । Articles

‘मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ!’ – सआदत हसन मंटो

‘मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ’ – सआदत हसन मंटो मेरी जिंदगी में तीन बड़ी घटनाएँ घटी हैं। पहली मेरे जन्म की। दूसरी मेरी शादी की और तीसरी मेरे कहानीकार बन जाने की। लेखक के तौर Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय

‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।। प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर चल रही है और देवताओं की Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘उत्कृष्टता’ – उदय प्रकाश

‘उत्कृष्टता’ – उदय प्रकाश सुन्दर और उत्कृष्ट कविताएँ धीरे-धीरे ले जाएँगी सत्ता की ओर सूक्ष्म संवेदनाओं और ख़फ़ीफ़ भाषा का कवि देखा जाएगा अत्याचारियों के भोज में शामिल सबसे ज़्यादा स्वादों का बखान करता हुआ Read more…

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कविताएँ | Poetry

क्यों पीछे रह जाएगा युवा होने का अद्भुत आश्चर्य

कविता: ‘अकेले क्यों?’ – अशोक वाजपेयी हम उस यात्रा में अकेले क्यों रह जाएँगे? साथ क्यों नहीं आएगा हमारा बचपन, उसकी आकाश-चढ़ती पतंगें और लकड़ी के छोटे से टुकड़े को हथियार बना कर दिग्विजय करने Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: कृपाशंकर चौबे कृत ‘हिन्दी और पूर्वोत्तर’

विवरण: प्रो. कृपाशंकर चौबे द्वारा सम्पादित यह किताब पूर्वोत्तर भारत की भाषाई विविधता और सकारात्मक पहचान से परिचित कराती है। इस किताब का महत्त्व इस बात में है कि यह पूर्वोत्तर के बारे में एकतरफा Read more…

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लेख । Articles

‘सुन्दरता और त्वचा का रंग’ – राममनोहर लोहिया

‘सुन्दरता और त्वचा का रंग’ – राममनोहर लोहिया सौंदर्य की परख की यह विकृति राजनैतिक प्रभाव के कारण आई है। गोरी चमड़ी के यूरोपियन लोग सारी दुनिया पर तीन सदियों से हावी रहे हैं। अधिकांश Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘पत्ते नीम के’ – कुमार शिव

‘पत्ते नीम के’ – कुमार शिव तालियों से बजे पत्ते नीम के। अनवरत चलती रही थी, थक गयी, तनिक आवे पर ठहर कर पक गयी, अब चढ़ी है हवा हत्थे नीम के। था बहुत कड़वा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: राजेश्वर वशिष्ठ कृत ‘प्रेम का पंचतंत्र’

विवरण: कोई प्रेयसी क्षण भर के लिए भी नहीं लौटाती उसे लिखे गये वे प्रेम-पत्र जिन्हें कभी तकिये के लिहा़फ में तो कभी वैनिटी-केस में छिपाया गया था। उन पत्रों में शब्दबद्ध हैं हृदय की धड़कनें Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु

‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है… पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार, मोरंग राज नेपाल से धान Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय

‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय ‘प्रोपगंडा’-प्रभु का प्रताप प्रचंड है – ‘जिन्‍हके जस-प्रताप के आगे, ससि मलीन रवि सीतल लागे।’ यदि आज ‘भूषण’ और ‘पद्माकर’ जीवित होते तो इनके यश और प्रताप का भड़कीला Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: तसनीफ़ हैदर कृत ‘मोहब्बत की नज़्में’

विवरण: मोहब्बत की नज़में एक शायर की ज़िन्दगी में आने वाली मोहब्बत की छोटी सी कहानी को बयान करती हैं। इन नज़्मों मे कहीं मुलाक़ातों की फुआर है, कहीं शामों की सौंधी ख़ुश्बू है। कभी दीदार Read more…

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कहानी | Story

लघुकथा: ‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता

‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता “आंटी जी चंदा इकठ्ठा कर रहें हैं। आप भी कुछ अपनी इच्छा से दे दीजिए।” “अरे लड़कियों, ये काॅलेज छोड़ कर किस बात का चंदा इकठ्ठा करती फिर रही हो?” Read more…

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कविताएँ | Poetry

वह दीवाल के पीछे खड़ी है

कविता: ‘वह दीवाल के पीछे खड़ी है’ – सुदीप बनर्जी वह दीवाल के पीछे खड़ी है दीवाल का वह तरफ़ उसके कमरे में है जिस पर कुछ लिखा है कोयले से कोयले से की गयी Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘कोशिश’ – इन्दु जैन

कविता: ‘कोशिश’ – इन्दु जैन एक चीख लिखनी थी एक बच्चे की चीख अरबी में, तुर्की में, यिद्दिश में, यैंकीस्तानी में असमिया, हिन्दी, गुरमुखी में चिथड़े उड़े बाप और ऐंठी पड़ी माँ के बीच उठी Read more…

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निबन्ध | Essay

‘भय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘भय’ – रामचंद्र शुक्ल किसी आती हुई आपदा की भावना या दुःख के कारण के साक्षात्‍कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्‍तंभ-कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुःख के Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: राकेश कायस्थ कृत ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’

विवरण: नोएडा में एक पकौड़ेवाला था— रामभरोसे। देश की तरह उसकी जिंदगी भी रामभरोसे ही थी। एक दिन किस्मत ने पलटा खाया और एक महापुरुष के दर्शन ने रामभरोसे को रातों-रात युगपुरुष बना दिया। भारत में Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: ‘दक्षायणी’ – अरुणा मुकीम

विवरण: ‘दक्षायणी’ एक सशक्त उपन्यास है। इसमें शिव और शक्ति के प्रेम के वास्तविक स्वरूप की अद्भुत व्याख्या मिलती है। लेखिका ने इसमें अपने को सती के रूप में परिकल्पना कर, नारी जीवन के संघर्षों एवं Read more…

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निबन्ध | Essay

निबन्ध: ‘एक सलाह’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘एक सलाह’ – प्रतापनारायण मिश्र हमारे मान्‍यवर, मित्र, ‘पीयूषप्रवाह’ संपादक, साहित्‍याचार्य पंडित अंबिकादत्त व्‍यास महोदय पूछते हैं कि हिन्दी भाषा में “में से के” आदि विभक्ति चिह्न शब्‍दों के साथ मिला के लिखने चाहिए अथवा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: अरुणा रॉय कृत ‘RTI कैसे आई!’

विवरण: ‘‘ब्यावर की गलियों से उठकर राज्य की विधानसभा से होते हुए संसद के सदनों और उसके पार विकसित होते एक जनान्दोलन को मैंने बड़े उत्साह के साथ देखा है। यह पुस्तक, अपनी कहानी की Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सहपाठी’ – सत्यजित राय

‘सहपाठी’ – सत्यजित राय अभी सुबह के सवा नौ बजे हैं। मोहित सरकार ने गले में टाई का फंदा डाला ही था कि उस की पत्नी अरुणा कमरे में आई और बोली, ‘तुम्हारा फोन।’ ‘अब अभी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद

‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। Read more…

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लेख । Articles

‘बलराज साहनी का असंतोष’ – जयप्रकाश चौकसे

‘बलराज साहनी का असंतोष’ – जयप्रकाश चौकसे भारतीय सिनेमा का शताब्दी वर्ष अभिनेता बलराज साहनी का भी जन्म शताब्दी वर्ष है। उनका जन्म 1 मई 1913 को हुआ था। बलराज साहनी वामपंथी विचारधारा के व्यक्ति Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा

‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा बाईं आँख रह-रह कर फड़क रही थी। कई बार मला मगर कोई फायदा न हुआ। उसे याद आया कि माँ बाईं आँख फड़कने को कितना बुरा मानती थी। Read more…

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कविताएँ | Poetry

बलराज साहनी की कविताएँ

बलराज साहनी एक अभिनेता के रूप में ही ज्यादा जाने जाते हैं, जबकि उन्होंने एक साहित्यकार के रूप में भी काफी कार्य किया है। उन्होंने कविताओं और कहानियों से लेकर, नाटक और यात्रा-वृत्तान्त तक लिखे हैं। Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘समाज’ – पुनीत कुसुम

‘समाज’ – पुनीत कुसुम कल एक प्राणी से मुलाक़ात हुई जब मैंने उससे उसका नाम पूछा तो वह बोला- ‘समाज’ प्राणी इसलिए कहा क्योंकि उसकी शक्ल और हरकतें मानवों से तो नहीं मिलती थीं संवेदनाओं Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: विमलेश त्रिपाठी कृत ‘हमन हैं इश्क़ मस्ताना’

विवरण: प्रेम को खोजकर पाया जा सकता है क्या? क्या देह और प्रेम दो अलग बातें हैं? क्या सदियों से चली आ रही एकनिष्ठता की परिभाषा महज एक मिथक है? क्या एक ही साथ एक व्यक्ति Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: उदय प्रकाश कृत ‘अरेबा परेबा’

विवरण: “उदय प्रकाश समाज के हाशिए में जीने वाले लोगों के कहानीकार हैं। वे समाज की विद्रूपताओं को बेनकाब करते हैं। समर्थों द्वारा असमर्थों को दबाने-कुचलने के षड्यन्त्रों की पोल खोलते हैं। उनकी कहानियों में एक Read more…

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लेख । Articles

दादा साहब फाल्के – भारतीय सिनेमा के पितामह

धुंडीराज गोविन्द फाल्के यानि दादा साहेब फाल्के को भारतीय फिल्मों का जनक माना जाता है। जब अमेरिका में डी. डब्ल्यू. ग्रिफिथ अपनी पहली फिल्म ‘द बर्थ ऑफ़ अ नेशन’ बना रहे थे, उसके पूरी होने Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे- ”मैं विचार किया करता था कि मनुष्य सृष्टि का सबसे सुन्दर निर्माण है, किन्तु मेरा विचार भ्रामक सिद्ध हुआ। Read more…

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कविताएँ | Poetry

झूठ बोलिए, सच बोलिए, खचाखच बोलिए

कविता: ‘खचाखच बोलिए’ – शिवा बोलिए बोलना ज़रूरी है सुनना, पढ़ना, समझना मूर्खों के लिए छोड़ दीजिए सत्ता की शय से बोलिए चढ़ गयी मय से बोलिए ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ के लिए बोलिए ‘अधिकतम आउटरीच’ Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर

‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर मैं चुपचाप खड़ा सब देख रहा हूँ और अब न जाने क्यों मुझे मन में लग रहा है कि दीवानचंद की शवयात्रा में कम से कम मुझे तो शामिल Read more…

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कविताएँ | Poetry

सुन्दरता कितना बड़ा कारण है..

कविता: ‘चाहिए’ – नवीन सागर एक बच्ची अपनी गुदगुदी हथेली देखती है और धरती पर मारती है। लार और हँसी से सना उसका चेहरा अभी इतना मुलायम है कि पूरी धरती अपने थूक के फुग्गे Read more…

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संस्मरण | Memoirs

संस्मरण: ‘अरुंधती’ – शिवानी

‘अरुंधती’ – शिवानी उसका साथ यद्यपि तीन ही वर्ष रहा, पर उस संक्षिप्त अवधि में भी हम दोनों अटूट मैत्री की डोर में बँध गए। उन दिनों पूरा आश्रम ही संगीतमय था। कभी ‘चित्रांगदा’ का Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: अशोक शाह कृत ‘अनुभव का मुँह पीछे है’

विवरण: कल्पना की उड़ान की जगह अनुभव की आसक्ति अधिक त्वरा के साथ पैर जमाती जा रही है। संवेदना के स्थान पर जीवन में विवेक और बुद्धि का अधिक प्रयोग हो रहा है। विचार खुलकर सामने Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे

‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे 1. शहर का रंगमंडल सभागार दर्शकों से खचाखच भर चुका है। वे सभी देश के प्रख्यात नाट्य निर्देशक इरफान अहमद साहब का नाटक देखने आए हैं। इरफान Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ग्यारह वर्ष की आयु से ही अनुपमा उपन्यास पढ़-पढ़कर मष्तिष्क को एकदम बिगाड़ बैठी थी। वह समझती थी, मनुष्य के हृदय में जितना प्रेम, जितनी माधुरी, जितनी शोभा, जितना Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘इक बार कहो तुम मेरी हो’ – आतिफ़ ख़ान

प्रख्यात व्यंग्यकार और शायर इब्ने इंशा की कविता ‘इक बार कहो तुम मेरी हो’ एक ऐसा काव्य झरना है जिसमें भीगने के बाद उसकी नमी एक अरसे तक आपको महसूस होती है। उसी नमी का Read more…

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लेख । Articles

बाईस गज में सिमटे चौबीस वर्ष – जयप्रकाश चौकसे

बाईस गज में सिमटे चौबीस वर्ष – जयप्रकाश चौकसे चार्ली चैपलिन को बरसात बहुत पसंद थी क्योंकि उसमें आंसू लोगों को नहीं दिखाई देते। हॉलीवुड की ‘गुडबॉय अगेन’ में नायिका इन्ग्रिड बर्गमैन अपने प्रेमी से Read more…

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पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

रंग तमाम भर चुकी सुब्ह ब-ख़ैर ज़िन्दगी..

जाने माने युवा शायर और युवा साहित्य अकादेमी विजेता अमीर इमाम की किताब ‘सुब्ह ब-ख़ैर ज़िन्दगी’ कुछ ही दिनों पहले रेख़्ता बुक्स से प्रकाशित हुई है। इसी किताब पर हिन्दी-उर्दू शायरी के एक और महत्त्वपूर्ण Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘हिन्दी की आखिरी किताब’ – यशवंत कोठारी

‘हिन्दी की आखिरी किताब’ – यशवंत कोठारी अकहानी : अकहानी वह है जो न तो कहानी है और न ही जिसमें अ अक्षर का प्रयोग होता है। वास्तव में अकहानी असफल अकहानीकारों की आंतरिक व्यथा है। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ठण्डा गोश्त’ – सआदत हसन मंटो

‘ठण्डा गोश्त’ – सआदत हसन मंटो ईशरसिंह ज्यों ही होटल के कमरे में दाखिल हुआ, कुलवन्त कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज-तेज आँखों से उसकी तरफ घूरकर देखा और दरवाजे की चिटखनी बन्द कर Read more…

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निबन्ध | Essay

‘कुटज’ – हजारी प्रसाद द्विवेदी

ललित निबन्ध: ‘कुटज’ – हजारीप्रसाद द्विवेदी कहते हैं, पर्वत शोभा-निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्‍या। पूर्व और अपार समुद्र – महोदधि और रत्‍नाकर – दोनों को दोनों भुजाओं से थाहता हुआ Read more…

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कविताएँ | Poetry

उड़ना, उड़ते रहना, उड़ते जाना..

गुजराती कविता: ‘अपना तो’ – मफत ओझा ये सब के सब जैसे-के-तैसे सोफासेट, पलंग, कुर्सी, खिड़कियाँ, दरवाज़े, पर्दे सीलिंगफैन, घड़ी की सुइयाँ- टक-टक और बन्द अँधेरी दीवारों पर टँगा है ईश्वर नश्वर पिता के फोटो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद

‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद आर्द्रा नक्षत्र; आकाश में काले-काले बादलों की घुमड़, जिसमें देव-दुन्दुभी का गम्भीर घोष। प्राची के एक निरभ्र कोने से स्वर्ण-पुरुष झाँकने लगा था।-देखने लगा महाराज की सवारी। शैलमाला के अञ्चल में Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘धुआँ’ – गुलज़ार

‘धुआँ’ – गुलज़ार बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में ‘धुआँ’ भर गया। चौधरी की मौत सुबह चार बजे हुई थी। सात बजे तक चौधराइन ने रो-धो कर Read more…

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उद्धरण | Quotes

कुछ पंक्तियाँ – ‘जंगल के दावेदार’ (महाश्वेता देवी)

उलगुलान की आग में जंगल नहीं जलता; आदमी का रक्त और हृदय जलता है। अचेत होते-होते भी अपने खून का रंग देखकर बिरसा मुग्ध हो गया था। खून का रंग इतना लाल होता है! सबके Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

क्यों बीरसा मुण्डा ने कहा था कि वह भगवान है?

बीरसा मुण्डा, जिसके पूर्वज जंगल के आदि पुरुष थे और जिन्होंने जंगल में जीवन को बसाया था, आज वही बीरसा और उसका समुदाय जंगल की धरती, पेड़, फूल, फल, कंद और संगीत से बेदखल कर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: सुकृता कृत ‘समय की कसक’

विवरण: “सुकृता की कविताओं में संवेदना का घनत्व हमेशा आकर्षित करता है। देश-देशान्तर में घूमते हुए कई चीज़ें उनका ध्यान खींच लेती हैं। चाहे वह पगोडा के मन्दिर हों, हनोई के मिथक, एलोरा की गुफ़ाएँ या Read more…

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कविताएँ | Poetry

तेरे अनन्य प्रतिरूप अपने लिए बनाये हैं मैंने।

उड़िया कविता: ‘प्रतिरूप’ – अपर्णा महान्ति पास नहीं हो इसीलिए न! कल्पना के सारे श्रेष्ठ रंग लगाकर इतने सुन्दर दिख रहे हो आज! विरह की छेनी से ठीक से तराश-तराश कर तमाम अनावश्यक असुन्दरता काट-छाँटकर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी

‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी राइफल की बुलेट आड़ के लिए रखी हुई शिला पर से फिसलती हुई जसवंतसिंह के बाएँ कंधे में धँसी थी, मगर फिर भी काफी गहरी चोट लग Read more…

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उद्धरण | Quotes

चैप्लिन कहिन..

मैं सिर्फ और सिर्फ एक चीज हूँ और वह है जोकर। यह मुझे राजनीतिज्ञों की तुलना में कहीं ऊँचे आसन पर स्थापित करता है। मैं ईश्वर के साथ मजे में हूँ, मेरा टकराव इंसानों के Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई

‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई जब मैं जाड़ों में लिहाफ ओढ़ती हूँ तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है। और एकदम से मेरा दिमाग बीती हुई दुनिया के Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी

‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया। ‘मामाजी! मामाजी!’ – लड़के ने लपक कर चरण छूए। वे पहचाने नहीं। बोले – Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: डॉ. बीना श्रीवास्तव कृत ‘सतरंगी यादें: यात्रा में यात्रा’

विवरण: एक तरह का उद्वेलन। बिना कहे रह न पाने की मजबूरी। जैसा कि अक्सर यात्राओं में होता है। राह में कहीं फूल मिले तो कहीं काँटे। कहीं चट्टानें अवरोधक बनीं तो कहीं शीतल बयार ने Read more…

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कविताएँ | Poetry

मराठी कविता: ‘श्वेतपत्र’ – शरण कुमार लिंबाले

‘श्वेतपत्र’ – शरण कुमार लिंबाले (रूपान्तर: प्रकाश भातम्ब्रेकर) खोये हुए बालक-सा प्रजातन्त्र जो माँ-बाप का नाम भी नहीं बता सकता न ही अपना पता और सत्ता भी मानो नीची निगाहों से रास्ता नाप रही पतिव्रता Read more…

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निबन्ध | Essay

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी गेहूँ हम खाते हैं, गुलाब सूँघते हैं। एक से शरीर की पुष्टि होती है, दूसरे से मानस तृप्‍त होता है। गेहूँ बड़ा या गुलाब? हम क्‍या चाहते हैं – Read more…

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कविताएँ | Poetry

अंकल आई एम तिलोत्तमा!

कविता: ‘पहचान और परवरिश’ – प्रज्ञा मिश्रा कौन है ये? मेरी बिटिया है, इनकी भतीजी है, मट्टू की बहन है, वी पी साहब की वाइफ हैं, शर्मा जी की बहू है। अपने बारे में भी Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: शशिभूषण द्विवेदी कृत ‘कहीं कुछ नहीं’

विवरण: खामोशी और कोलाहल के बीच की किसी जगह पर वह कहीं खड़ा है। और इस खेल का मजा ले रहा है। क्या सचमुच खामोशी और कोलाहल के बीच कोई स्पेस था, जहां वह खड़ा था।’उपर्युक्त Read more…

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कविताएँ | Poetry

पोर उँगलियों के बंसी टटोलते रहे रात भर..

असमिया कविता: ‘पर्वत के उस पार’ – समीर ताँती पर्वत के उस पार कहीं लो बुझी दीपशिखा इस पार हुआ धूसर नभ उतरे पंछी कुछ अजनबी नौका डूबी… उस पार मगर वो पेड़ ताकता रहा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: दिलीप पाण्डेय, चंचल शर्मा कृत ‘कॉल सेंटर’

विवरण: दिलीप पाण्डेय और चंचल शर्मा की कहानियाँ हिंदी कहानियों में कुछ नए ढंग का हस्तक्षेप करती हैं। यहाँ बहुत-सी कहानियाँ हैं जिनका मैं जिक्र करना चाहता हूँ, लेकिन दो-तीन कहानियाँ तो अद्भुत हैं। आमतौर पर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कुत्ते की पूँछ’ – यशपाल

‘कुत्ते की पूँछ‘ – यशपाल श्रीमती जी कई दिन से कह रही थीं- “उलटी बयार” फ़िल्म का बहुत चर्चा है, देख लेते तो अच्छा था। देख आने में ऐतराज़ न था परन्तु सिनेमा शुरू होने Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: नीरज नीर कृत ‘जंगल में पागल हाथी और ढोल’

विवरण: क्या आप नए कवि हैं और आप बड़ी साहित्यिक पत्रिकाओं में छपना चाहते हैं? आप अपनी कवितायें पत्रिकाओं में भेजते हैं और वहाँ से आपको कोई जवाब नहीं आता है? तो आपके लिए यह जानना जरूरी Read more…

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कविताएँ | Poetry

संस्कृत कविता: ‘विवशता’ – सीताराम द्विवेदी

‘विवशता’ – सीताराम द्विवेदी जब जब मैंने, धरती पर, सनी धूल में, शोकालीन लता को चाहा- फिर से डालना बाँहों में वृक्ष की, तभी आँधी के झौंके से धूल भरी- आँखें हो गयीं लाल। थोड़ा Read more…

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बाल साहित्य | Children's Literature

‘एक चोर की कहानी’ – श्रीलाल शुक्ल

माघ की रात। तालाब का किनारा। सूखता हुआ पानी। सड़ती हुई काई। कोहरे में सब कुछ ढँका हुआ। तालाब के किनारे बबूल, नीम, आम और जामुन के कई छोटे-बड़े पेड़ों का बाग। सब सर झुकाए Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: कृष्ण बलदेव वैद कृत ‘अब्र क्या चीज़ है? हवा क्या है?’

  विवरण: कृष्ण बलदेव वैद की डायरियों की जो पुस्तकें इससे पहले प्रकाशित हुई हैं उन्होंने अपनी बेबाकी, लेखक के निर्मम आत्मालोचन, व्यक्तियों और घटनाओं पर तात्कालिक प्रतिक्रियाओं, अनेक देशी-विदेशी लेखकों और कृतियों के आस्वादन और Read more…

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