निबन्ध | Essay

‘पंच महाराज’ – बालकृष्ण भट्ट

‘पंच महाराज’ – बालकृष्ण भट्ट माथे पर तिलक, पाँव में बूट चपकन और पायजामा के एवज में कोट और पैंट पहने हुए पंच जी को आते देख मैं बड़े भ्रम में आया कि इन्‍हें मैं Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘खोल दो’ – सआदत हसन मंटो

‘खोल दो’ – सआदत हसन मंटो अमृतसर से स्पेशल ट्रेन दोपहर दो बजे चली और आठ घंटों के बाद मुगलपुरा पहुंची। रास्ते में कई आदमी मारे गए। अनेक जख्मी हुए और कुछ इधर-उधर भटक गए। Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘ढलान से उतरते हुए’

विवरण: निर्मल वर्मा के निबन्धों की सार्थकता इस बात में है कि वे सत्य को पाने की सम्भावनाओं के नष्ट होने के कारणों का विश्लेषण करते हुए उन्हें पुनः मूर्त करने के लिए हमें प्रेरित Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फोन कॉल्स’ – रोबेर्तो बोलान्यो

‘फोन कॉल्स’ – रोबेर्तो बोलान्यो बी, एक्स का प्रेमी है। दुखी होकर भी, बेशक। जैसा कि हरेक प्यार करने वाला कहता और सोचता है, बी भी अपने जीवन के एक खास दौर में एक्स के Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘लाल टीन की छत’

विवरण: निर्मल वर्मा (1929-2005) भारतीय मनीषा की उस उज्ज्वल परम्परा के प्रतीक-पुरुष हैं, जिनके जीवन में कर्म, चिन्तन और आस्था के बीच कोई फाँक नहीं रह जाती। कला का मर्म जीवन का सत्य बन जाता है Read more…

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कहानी | Story

‘कहानी का प्लॉट’ – शिवपूजन सहाय

‘कहानी का प्लॉट’ – शिवपूजन सहाय मैं कहानी-लेखक नहीं हूँ। कहानी लिखने-योग्य प्रतिभा भी मुझ में नहीं है। कहानी-लेखक को स्वभावतः कला-मर्मज्ञ होना चाहिये, और मैं साधारण कलाविद् भी नहीं हूँ। किंतु कुशल कहानी-लेखकों के Read more…

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कविताएँ | Poetry

कल मैं एक महाग्रन्थ प्रारम्भ करने वाला हूँ

कन्नड़ कविता: ‘कल का ग्रन्थ’ – रामचन्द्र देव अनुवाद: बी. आर. नारायण कल मैं एक महाग्रन्थ प्रारम्भ करने वाला हूँ नेस्ट्रोडमस के ग्रन्थ जैसा आगे किस शताब्दी में कहाँ और किस गाँव में पड़ेगा अकाल, Read more…

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कहानी | Story

‘एक चिंगारी घर को जला देती है’ – तोल्सतोय

‘एक चिंगारी घर को जला देती है’ – तोल्सतोय अनुवाद: प्रेमचंद एक समय एक गांव में रहीम खां नामक एक मालदार किसान रहता था। उसके तीन पुत्र थे, सब युवक और काम करने में चतुर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘एक चिथड़ा सुख’

विवरण: निर्मल वर्मा ने इस उपन्यास में ‘दुख का मन’ परखना चाहा है- ऐसा दुख, जो ज़िन्दगी के चमत्कार और मृत्यु के रहस्य को उघाड़ता है…मध्यवर्गीय जीवन-स्थितियों के बीच उन्होंने बिट्टी, इरा, नित्ती भाई और डैरी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कफ़न’ – प्रेमचंद

‘कफ़न’ – प्रेमचंद झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर Read more…

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कविताएँ | Poetry

कन्नड़ कविता: ‘रोकना है न!’ – पी. एस. रामानुजम्

‘रोकना है न!’ – पी. एस. रामानुजम् (रूपान्तर: बी. आर. नारायण) कितनी बसी है रक्त की बास इस धरती में कितने लोग मरे, कितने लोग रोये दुर्दैव है यह, आश्चर्य है यह तब भी धरती Read more…

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कहानी | Story

‘अप्रैल की एक खूबसूरत सुबह बिल्कुल सही लड़की को देखने के बाद’ – हारुकी मुराकामी

‘अप्रैल की एक खूबसूरत सुबह बिल्कुल सही लड़की को देखने के बाद’ – हारुकी मुराकामी (अनुवाद: सरिता शर्मा) अप्रैल की एक खूबसूरत सुबह मैं टोक्यो के आधुनिक पड़ोस हाराजुकू में एक सँकरी सड़क पर, बिल्कुल Read more…

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कविताएँ | Poetry

इस धरती को तुम थोड़ा-थोड़ा कर ही सही समझना तो शुरू करो।

बांग्ला कविता: ‘हिमशिला’ – विप्लव माझी मैं चाहता हूँ इस धरती को तुम थोड़ा-थोड़ा कर ही सही समझना तो शुरू करो। तुम खुद अपनी आँखों से देखो किस तरह खण्डहर में तब्दील हो गये हैं Read more…

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उद्धरण | Quotes

महात्मा गाँधी – कुछ पंक्तियाँ

महात्मा गाँधी – कुछ पंक्तियाँ मैं कितना ही तुच्छ होऊँ, पर जब मेरे माध्यम से सत्य बोलता है तब मैं अजेय हो जाता हूँ। मेरा अनुयायी सिर्फ एक है और वह खुद मैं हूँ। भला Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: कुमार रवीन्द्र कृत ‘यात्राएं और भी’

विवरण: “ये यात्राएँ आज की नहीं हैं और न केवल बाहर-बाहर की। ये तो पूरी उम्र में बिखरी हुई हैं और जितनी बाहर की हैं, उससे ज़्यादा अंतर्मन में सँजोई स्मृतियों की हैं। मित्रो, आशा Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘हमारा मुल्क’ – इब्ने इंशा

‘हमारा मुल्क’ – इब्ने इंशा ”ईरान में कौन रहता है?” ”ईरान में ईरानी कौम रहती है।” ”इंग्लिस्तान में कौन रहता है?” ”इंग्लिस्तान में अंग्रेजी कौम रहती है।” ”फ्रांस में कौन रहता है?” ”फ्रांस में फ्रांसीसी Read more…

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पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

नरेन्द्र कोहली की ‘क्षमा करना जीजी’

‘क्षमा करना जीजी’ – नरेन्द्र कोहली आज सुबह “क्षमा करना जीजी” पढ़ना शुरू किया. यह नरेन्द्र कोहली लिखित सामाजिक उपन्यास है. यह अपने आप में कुछ अधिक महत्वपूर्ण इसलिए हो जाता है कि सामान्यतः नरेन्द्र Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘अन्तिम अरण्य’

विवरण: निर्मल वर्मा (1929-2005) भारतीय मनीषा की उस उज्ज्वल परम्परा के प्रतीक-पुरुष हैं, जिनके जीवन में कर्म, चिन्तन और आस्था के बीच कोई फाँक नहीं रह जाती। कला का मर्म जीवन का सत्य बन जाता है Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘दम्पति’ – फ़्रेंज़ काफ़्का

‘दम्पति’ – फ़्रेंज़ काफ़्का (‘द मैरिड कपल’ का अनुवाद: सुशांत सुप्रिय) व्यापार है ही बुरी चीज। मुझे ही लीजिए। दफ्तर के काम से जब थोड़ी देर के लिए भी मुझे छुट्टी मिलती है तो मैं Read more…

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लेख । Articles

काजी नजरुल इस्लाम – संजय कृष्ण

काजी नजरुल इस्लाम – संजय कृष्ण चुरुलिया गांव का तालाब वैसे ही था, जैसे काजी नजरूल इस्लाम के समय में था। सौ सालों में कोई तब्दीली नहीं। जैसे तालाब में समय ठहर गया हो। यह Read more…

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कविताएँ | Poetry

सिन्धी कविता: ‘कौन है’ – नामदेव

‘कौन है’ – नामदेव कौन है जो बन्दूक की नली से गुलाब को घायल कर रहा है? कौन है जो बन्सरी की चोट से किसी का सर फोड़ रहा है? कौन है जो बाल-मन्दिर की Read more…

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कविताएँ | Poetry

नज़्म: ‘रस की अनोखी लहरें’ – मीराजी

‘रस की अनोखी लहरें’ – मीराजी मैं ये चाहती हूँ कि दुनिया की आँखें मुझे देखती जाएँ यूँ देखती जाएँ जैसे कोई पेड़ की नर्म टहनी को देखे लचकती हुई नर्म टहनी को देखे मगर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: ‘जगदीश पीयूष कृत ‘किस्से अवध के’

विवरण: अवध के किस्सों में लम्बी यात्राएँ हैं। ए भगवान् राम के साथ वन-वन घूमे हैं, तो प्रवासी भारतियों के साथ मारीशस, फिजी, गयाना आदि सुदूर देशों तक जाकर आज भी वहां सुने-कहे जा रहे हैं। Read more…

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संस्मरण | Memoirs

‘तीन गोले’ – सआदत हसन मंटो

‘तीन गोले’ – सआदत हसन मंटो हसन बिल्डिंगज़ के फ़्लैट नंबर एक में तीन गोले मेरे सामने मेज़ पर पड़े थे। मैं ग़ौर से उनकी तरफ़ देख रहा था और मीराजी बातें सुन रहा था। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘आदमी और कुत्ता’ – वनमाली

‘आदमी और कुत्ता’ – वनमाली मैं आपके सामने अपने एक रेल के सफर का बयान पेश कर रहा हूँ। यह बयान इसीलिए है कि सफर में मेरे साथ जो घटना घटी उसका कभी आप अपने Read more…

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कविताएँ | Poetry

ख्यालों को बहने दो, बनके नदिया..

मुदित श्रीवास्तव की कविताएँ मुदित श्रीवास्तव भोपाल में रहते हैं। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और कॉलेज में सहायक प्राध्यापक भी रहे हैं। साहित्य से लगाव के कारण बाल पत्रिका ‘इकतारा’ से जुड़े Read more…

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कविताएँ | Poetry

इस बार जीवित रहे तो…

कविता: ‘इस बार जीवित रहे तो’ – जसबीरसिंह आहलूवालिया यदि इस बार सावन आया यदि जमकर बादल बरसे यदि रिमझिम-रिमझिम हो गयी कोई भीगा मन तक आया काग़ज़ की कश्तियों को तुम्हारी और अपनी को Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कानों में कँगना’ – राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह 

‘कानों में कँगना’ – राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह  “किरन! तुम्हारे कानों में क्या है?” उसने कानों से चंचल लट को हटाकर कहा – “कँगना।” “अरे! कानों में कँगना?” सचमुच दो कंगन कानों को घेरकर बैठे थे। Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘वे दिन’

विवरण: निर्मल वर्मा (1929-2005) भारतीय मनीषा की उस उज्ज्वल परम्परा के प्रतीक-पुरुष हैं, जिनके जीवन में कर्म, चिन्तन और आस्था के बीच कोई फाँक नहीं रह जाती। कला का मर्म जीवन का सत्य बन जाता है Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मौसी’ – भुवेनश्वर

‘मौसी’ – भुवेनश्वर मानव-जीवन के विकास में एक स्थल ऐसा आता है, जब वह परिवर्तन पर भी विजय पा लेता है। जब हमारे जीवन का उत्थान या पतन, न हमारे लिए कुछ विशेषता रखता है, Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘चौराहे पर घर’ – नन्द जवेरी

‘चौराहे पर घर’ – नन्द जवेरी अनुवाद: श्याम जयसिंघाणी कल तक मेरा घर एक चौराहे पर था पर आज सवेरे घर के बाहर लठधर चौकीदार की जगह बन्दूकधारी जवान तैनात था और चौराहा गुम था। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मौत का बीज’ – शरलॉक होल्म्स की कहानी

कहानी: ‘मौत का बीज’ – शरलॉक होल्म्स की कहानी (‘द फाइव ऑरेंज पिप्स’ का अनुवाद) सितम्बर के महीने का अंत चल रहा था। पूरे दिन काफी तेज़ हवा चलती रही। इसके साथ ही बारिश की Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: गिरिराज किशोर कृत ‘आंजनेय जयते’

विवरण: ‘आंजनेय जयते’ गिरिराज किशोर का सम्भवत: पहला मिथकीय उपन्यास है। इसकी कथा संकटमोचन हनुमान के जीवन-संघर्ष पर केन्द्रित है। रामकथा में हनुमान की उपस्थिति विलक्षण है। वे वनवासी हैं, वानरवंशी हैं, लेकिन वानर नहीं हैं। Read more…

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उद्धरण | Quotes

वर्जिनिया वूल्फ – कुछ पंक्तियाँ

वर्जिनिया वूल्फ – कुछ पंक्तियाँ दूसरों की आँखें हमारे कैदखाने हैं; उनके विचार हमारी गुफाएँ। कुछ लोग पुजारियों के पास जाते हैं; कुछ कविताई करते हैं; मैं अपने दोस्तों के पास जाती हूँ। जीवन को Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘अतिथि! तुम कब जाओगे’ – शरद जोशी

‘अतिथि! तुम कब जाओगे’ – शरद जोशी तुम्हारे आने के चौथे दिन, बार-बार यह प्रश्न मेरे मन में उमड़ रहा है, तुम कब जाओगे अतिथि! तुम कब घर से निकलोगे मेरे मेहमान! तुम जिस सोफे Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: शशिकांत मिश्र कृत ‘वैलेंटाइन बाबा’

विवरण: Non-Resident Bihari की सफलता के बाद एक और दिलकश पेशकश—बागी बलिया की मिटटी से उपजी एक मीठी-सी प्रेम कहानी! मोहब्बत के मुद्दे पर दो विचारधाराओं की टकराहट। एक धारा मोहब्बत के नाम पर मौज-मस्ती Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: निर्मल वर्मा कृत ‘भारत और यूरोप: प्रतिश्रुति के क्षेत्र’

विवरण: ‘ये निबन्ध मेरे उन अकेले वर्षों के साक्षी हैं जब मैं…अपने साहित्यिक समाज की पूर्वनिर्धारित धारणाओं से अपने को असहमत और अलग पाता था…मैं अपने निबन्धों और कहानियों में किसी तरह की फाँक नहीं देखता। Read more…

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पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ – एक टिप्पणी

‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ – एक टिप्पणी असग़र वजाहत की किताब ‘पाकिस्तान का मतलब क्या’ पर आदित्य भूषण मिश्रा की एक टिप्पणी मैं अभी पिछले दिनों, असग़र वजाहत साब की क़िताब “पाकिस्तान का मतलब क्या” Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘देर से, बहुत देर से बतानी चाहिए जाने की ख़बर!!’ – गौरव अदीब की नयी कविताएँ

गौरव अदीब की कुछ नयी कविताएँ गौरव सक्सेना ‘अदीब’ बतौर स्पेशल एजुकेटर इंटरनेशनल स्कूल में कार्यरत हैं और थिएटर व शायरी में विशेष रुचि रखते हैं। दस वर्षों से विभिन्न विधाओं में लेखन के साथ-साथ Read more…

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निबन्ध | Essay

खड़ी बोली में प्रथम सफल कविता आप ही कर सके हैं।

‘कविवर श्री सुमित्रानन्दन पन्त’ – सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ “मग्न बने रहते हैं मोद में विनोद में क्रीड़ा करते हैं कल कल्पना की गोद में, सारदा के मन्दिर में सुमन चढ़ाते हैं प्रेम का ही पुण्यपाठ Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘अब माँ शांत है!’ – शिवा

‘अब माँ शांत है!’ – शिवा मुझे लोगों पर बहुत प्यार आया ज़रा संकोच न हुआ मैंने प्यार बरसा दिया अब मन शांत है मुझे लोगों पर बहुत गुस्सा आया ज़रा संकोच हुआ मैंने माँ Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर

‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से नज़र आ जाता है। टीले के ऐन नीचे पहाड़ी झील है। एक बल खाती सड़क Read more…

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उद्धरण | Quotes

‘युवा प्रेमियों के लिए लाल गुलाब। पुराने रिश्तों के लिए फ्रेंच बीन्स।’

रस्किन बॉन्ड की कुछ पंक्तियाँ … युवा प्रेमियों के लिए लाल गुलाब। पुराने रिश्तों के लिए फ्रेंच बीन्स। प्रेम जो मृत्यु से परे है, वही जीवन को बचाए रखता है। और जब सारी जंग खत्म Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: भानु भारती कृत ‘तमाशा न हुआ’

विवरण: मानवीय सभ्यता के ‘आधुनिकतावादी’ दौर में ऐसा प्रतीत होने लगा था कि मनुष्य ने अन्ततः अपनी मुक्ति का पथ प्रशस्त कर लिया है और अब वह अपनी नियति के मकड़जाल से निकल कर, अधिक तर्कसंगत Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर

‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष लगाया Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘जेठ’ पर हाइकु

‘जेठ’ पर हाइकु जेठ (ज्येष्ठ) हिन्दू पंचांग के अनुसार साल का तीसरा महीना होता है और इस माह को गर्मी का महीना भी कहा जाता है। आई. आई. टी. रुड़की में कार्यरत रमाकांत जी ने Read more…

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निबन्ध | Essay

‘आचरण की सभ्यता’ – सरदार पूर्ण सिंह

‘आचरण की सभ्यता’ – सरदार पूर्ण सिंह विद्या, कला, कविता, साहित्‍य, धन और राजस्‍व से भी आचरण की सभ्‍यता अधिक ज्‍योतिष्‍मती है। आचरण की सभ्‍यता को प्राप्‍त करके एक कंगाल आदमी राजाओं के दिलों पर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: प्रो. शेरसिंह बिष्ट कृत ‘समीक्षा की कसौटी पर’

विवरण: ‘समीक्षा की कसौटी पर’ पुस्तक में समीक्षा के परम्परित प्रतिमानों पर नये सिरे से विचार किया गया है। समीक्षा के मानकों के परम्परित स्वरूप, साहित्य के बदलते सन्दर्भों में उनकी उपादेयता तथा साहित्यिक मूल्यबोध Read more…

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निबन्ध | Essay

‘जी’ – बालकृष्ण भट्ट

‘जी’ – बालकृष्ण भट्ट साधारण बातचीत में यह जी भी जी का जंजाल सा हो रहा है। अजी बात ही चीत क्‍या जहाँ और जिसमें देखो उसी में इस जी से जीते जी छुटकारा नहीं Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘दुलाईवाली’ – बंग महिला

‘दुलाईवाली’ – बंग महिला काशी जी के दशाश्‍वमेध घाट पर स्‍नान करके एक मनुष्‍य बड़ी व्‍यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती Read more…

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कविताएँ | Poetry

विशेष चंद्र ‘नमन’ की कविताएँ

विशेष चंद्र नमन दिल्ली विवि, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में तृतीय वर्ष, स्नातक (गणित) में अध्ययनरत हैं। गुज़रे तीन वर्षों में कॉलेज के दिनों में साहित्यिक रुचि खूब जागी, नया पढ़ने का मौका Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: जय प्रकाश मानस कृत ‘सपनों के करीब हो आँखें’

विवरण: जय प्रकाश मानस के प्रस्तुत संकलन की कविताएं आम आदमी की फ़िक्र में लिखी गयी कविताएँ हैं। उनकी कविताओं के सरोकार के केन्द्र में उनके आसपास का मामूली आदमी है। वे अपनी कविताओं में Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद

‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद ”यह तुम्हारा दुस्साहस है, चन्द्रदेव!” ”मैं सत्य कहता हूँ, देवकुमार।” ”तुम्हारे सत्य की पहचान बहुत दुर्बल है, क्योंकि उसके प्रकट होने का साधन असत् है। समझता हूँ कि तुम प्रवचन Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी लम्बे देवदारों का झुरमुट झक-झुककर गेठिया सैनेटोरियम की बलैया-सी ले रहा था। काँच की खिड़कियों पर सूरज की आड़ी-तिरछी किरणें मरीज़ों के क्लांत चेहरों पर पड़कर उन्हें उठा देती थीं। मौत Read more…

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लेख । Articles

‘अद्भुत मक्खियाँ’ – महावीर प्रसाद द्विवेदी

‘अद्भुत मक्खियाँ’ – महावीर प्रसाद द्विवेदी ईश्वर की सृष्टि में अनेक जीव-जंतु ऐसे हैं जिनकी विचित्रता का वृत्तांत सुनकर आश्चर्य चकित होना पड़ता है। अभी, कुछ ही समय पूर्व, जॉन जे वार्ड (John J. Ward) Read more…

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निबन्ध | Essay

‘समय’ – बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’

‘समय’ – बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ काव्यशासस्त्र विनोदेन कालो गच्छति धीमताम। व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा॥ यह विख्यात है कि त्रिभुवन में विजय की पताका फहराने वाला, अपने कुटिल कुत्सित परिवार से ब्राह्मणों को दुःख Read more…

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कविताएँ | Poetry

बालकवि बैरागी की बाल कविताएँ

बालकवि बैरागी की बाल कविताएँ यह केवल पाठकों का ही नहीं, हिन्दी साहित्य का भी दुर्भाग्य है, कि हिन्दी के लेखक और कवियों को भारत का एक बड़ा वर्ग उनके निधन के बाद पढ़ना शुरू Read more…

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पत्र | Letters

‘पगली का पत्र’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

‘पगली का पत्र’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध तुम कहोगे कि छि:, इतनी स्वार्थ-परायणता! पर प्यारे, यह स्वार्थ-परायणता नहीं है, यह सच्चे हृदय का उद्गार है, फफोलों से भरे हृदय का आश्वासन है, व्यथित हृदय Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: उषाकिरण खान कृत ‘गई झुलनी टूट’

विवरण: उषाकिरण खान का यह नया उपन्यास गई झुलनी टूट उनकी प्रसिद्धि को एक कदम आगे लेकर जाता है। इसमें उन्होंने एक सीधा-सादा मगर मार्मिक सवाल उठाया है, ‘…जीवन केवल संग-साथ नहीं है। संग-साथ है तो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्‍पन्‍न हुई : मैं अपने स्‍थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा Read more…

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निबन्ध | Essay

निबन्ध: ‘पेट’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘पेट’ – प्रतापनारायण मिश्र इन दो अक्षरों की महिमा भी यदि अपरंपार न कहिए तौ भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि बहुत बड़ी है। जितने प्राणी और अप्राणी, नाम रूप देखने सुनने में आते Read more…

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कविताएँ | Poetry

जोशना बैनर्जी आडवानी की कविताएँ

आज पोषम पा पर प्रस्तुत हैं जोशना बैनर्जी आडवानी की कुछ कविताएँ। जोशना इन्टर कॉलेज में प्राचार्या हैं और कत्थक व भरतनाट्यम में प्रभाकर कर चुकी हैं। जोशना को कविताएँ लिखना बेहद पसंद है और Read more…

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कहानी | Story

लोककथा: ‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान

‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान एक सीप ने पड़ोसी सीप से कहा, “मुझे बड़ा तेज दर्द महसूस हो रहा है। कोई भारी और गोल चीज़ है। मेरा दम निकला जा रहा है।” दूसरी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर

‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर चारपाई को घेरकर बैठे हुए उन सब लोगों ने एक साथ एक गहरी साँस ली। वह सब थके-हारे हुए खामोश थे। कमरे में पूरी खामोशी थी, मरने वाले की साँस भी थकी Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘माँ’ के लिए कुछ कविताएँ

‘माँ’ के लिए कुछ कविताएँ ‘माँ’ – मोहनजीत मैं उस मिट्टी में से उगा हूँ जिसमें से माँ लोकगीत चुनती थी हर नज्म लिखने के बाद सोचता हूँ- क्या लिखा है? माँ कहाँ इस तरह Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘माँ’ – प्रेमचंद

‘माँ’ – प्रेमचंद आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, Read more…

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बाल साहित्य | Children's Literature

बाल कहानी: ‘गिरगिट का सपना’ – मोहन राकेश

‘गिरगिट का सपना’ – मोहन राकेश एक गिरगिट था। अच्‍छा, मोटा-ताजा। काफी हरे जंगल में रहता था। रहने के लिए एक घने पेड़ के नीचे अच्‍छी-सी जगह बना रखी थी उसने। खाने-पीने की कोई तकलीफ Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘दरवाज़े गर ज़बान की चिटखनी खोल पाते तो बताते..’ – गौरी चुघ की नज्में

गौरी चुघ स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक दशक से ज़्यादा समय से सक्रिय हैं। उन्होंने शिक्षा जगत से जुड़े विभिन्न सरकारी, ग़ैर-सरकारी और निजी संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। 2008 में Read more…

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कहानी | Story

‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज

‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज अनुवाद – सरिता शर्मा बच्चों ने सबसे पहले समुद्र से तेजी से आते काले उभार को देखा, तो उन्होंने उसे दुश्मन का जहाज समझा। Read more…

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पत्र | Letters

नेहरू के नाम मंटो का खत

‘नेहरू के नाम मंटो का खत’ – सआदत हसन मंटो (उर्दू से अनुवाद : डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा) पंडित जी, अस्‍सलाम अलैकुम। यह मेरा पहला खत है जो मैं आपको भेज रहा हूँ। आप माशा अल्‍लाह Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘बू’ – सआदत हसन मंटो

‘बू’ – सआदत हसन मंटो बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे सागवन के स्प्रिन्गदार पलंग पर, जो अब खिड़की के पास थोड़ा इधर सरका दिया Read more…

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लेख । Articles

‘मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ!’ – सआदत हसन मंटो

‘मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ’ – सआदत हसन मंटो मेरी जिंदगी में तीन बड़ी घटनाएँ घटी हैं। पहली मेरे जन्म की। दूसरी मेरी शादी की और तीसरी मेरे कहानीकार बन जाने की। लेखक के तौर Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय

‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।। प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर चल रही है और देवताओं की Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘उत्कृष्टता’ – उदय प्रकाश

‘उत्कृष्टता’ – उदय प्रकाश सुन्दर और उत्कृष्ट कविताएँ धीरे-धीरे ले जाएँगी सत्ता की ओर सूक्ष्म संवेदनाओं और ख़फ़ीफ़ भाषा का कवि देखा जाएगा अत्याचारियों के भोज में शामिल सबसे ज़्यादा स्वादों का बखान करता हुआ Read more…

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कविताएँ | Poetry

क्यों पीछे रह जाएगा युवा होने का अद्भुत आश्चर्य

कविता: ‘अकेले क्यों?’ – अशोक वाजपेयी हम उस यात्रा में अकेले क्यों रह जाएँगे? साथ क्यों नहीं आएगा हमारा बचपन, उसकी आकाश-चढ़ती पतंगें और लकड़ी के छोटे से टुकड़े को हथियार बना कर दिग्विजय करने Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: कृपाशंकर चौबे कृत ‘हिन्दी और पूर्वोत्तर’

विवरण: प्रो. कृपाशंकर चौबे द्वारा सम्पादित यह किताब पूर्वोत्तर भारत की भाषाई विविधता और सकारात्मक पहचान से परिचित कराती है। इस किताब का महत्त्व इस बात में है कि यह पूर्वोत्तर के बारे में एकतरफा Read more…

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लेख । Articles

‘सुन्दरता और त्वचा का रंग’ – राममनोहर लोहिया

‘सुन्दरता और त्वचा का रंग’ – राममनोहर लोहिया सौंदर्य की परख की यह विकृति राजनैतिक प्रभाव के कारण आई है। गोरी चमड़ी के यूरोपियन लोग सारी दुनिया पर तीन सदियों से हावी रहे हैं। अधिकांश Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘पत्ते नीम के’ – कुमार शिव

‘पत्ते नीम के’ – कुमार शिव तालियों से बजे पत्ते नीम के। अनवरत चलती रही थी, थक गयी, तनिक आवे पर ठहर कर पक गयी, अब चढ़ी है हवा हत्थे नीम के। था बहुत कड़वा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: राजेश्वर वशिष्ठ कृत ‘प्रेम का पंचतंत्र’

विवरण: कोई प्रेयसी क्षण भर के लिए भी नहीं लौटाती उसे लिखे गये वे प्रेम-पत्र जिन्हें कभी तकिये के लिहा़फ में तो कभी वैनिटी-केस में छिपाया गया था। उन पत्रों में शब्दबद्ध हैं हृदय की धड़कनें Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु

‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है… पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार, मोरंग राज नेपाल से धान Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय

‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय ‘प्रोपगंडा’-प्रभु का प्रताप प्रचंड है – ‘जिन्‍हके जस-प्रताप के आगे, ससि मलीन रवि सीतल लागे।’ यदि आज ‘भूषण’ और ‘पद्माकर’ जीवित होते तो इनके यश और प्रताप का भड़कीला Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: तसनीफ़ हैदर कृत ‘मोहब्बत की नज़्में’

विवरण: मोहब्बत की नज़में एक शायर की ज़िन्दगी में आने वाली मोहब्बत की छोटी सी कहानी को बयान करती हैं। इन नज़्मों मे कहीं मुलाक़ातों की फुआर है, कहीं शामों की सौंधी ख़ुश्बू है। कभी दीदार Read more…

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कहानी | Story

लघुकथा: ‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता

‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता “आंटी जी चंदा इकठ्ठा कर रहें हैं। आप भी कुछ अपनी इच्छा से दे दीजिए।” “अरे लड़कियों, ये काॅलेज छोड़ कर किस बात का चंदा इकठ्ठा करती फिर रही हो?” Read more…

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कविताएँ | Poetry

वह दीवाल के पीछे खड़ी है

कविता: ‘वह दीवाल के पीछे खड़ी है’ – सुदीप बनर्जी वह दीवाल के पीछे खड़ी है दीवाल का वह तरफ़ उसके कमरे में है जिस पर कुछ लिखा है कोयले से कोयले से की गयी Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘कोशिश’ – इन्दु जैन

कविता: ‘कोशिश’ – इन्दु जैन एक चीख लिखनी थी एक बच्चे की चीख अरबी में, तुर्की में, यिद्दिश में, यैंकीस्तानी में असमिया, हिन्दी, गुरमुखी में चिथड़े उड़े बाप और ऐंठी पड़ी माँ के बीच उठी Read more…

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निबन्ध | Essay

‘भय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘भय’ – रामचंद्र शुक्ल किसी आती हुई आपदा की भावना या दुःख के कारण के साक्षात्‍कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्‍तंभ-कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुःख के Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: राकेश कायस्थ कृत ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’

विवरण: नोएडा में एक पकौड़ेवाला था— रामभरोसे। देश की तरह उसकी जिंदगी भी रामभरोसे ही थी। एक दिन किस्मत ने पलटा खाया और एक महापुरुष के दर्शन ने रामभरोसे को रातों-रात युगपुरुष बना दिया। भारत में Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: ‘दक्षायणी’ – अरुणा मुकीम

विवरण: ‘दक्षायणी’ एक सशक्त उपन्यास है। इसमें शिव और शक्ति के प्रेम के वास्तविक स्वरूप की अद्भुत व्याख्या मिलती है। लेखिका ने इसमें अपने को सती के रूप में परिकल्पना कर, नारी जीवन के संघर्षों एवं Read more…

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निबन्ध | Essay

निबन्ध: ‘एक सलाह’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘एक सलाह’ – प्रतापनारायण मिश्र हमारे मान्‍यवर, मित्र, ‘पीयूषप्रवाह’ संपादक, साहित्‍याचार्य पंडित अंबिकादत्त व्‍यास महोदय पूछते हैं कि हिन्दी भाषा में “में से के” आदि विभक्ति चिह्न शब्‍दों के साथ मिला के लिखने चाहिए अथवा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: अरुणा रॉय कृत ‘RTI कैसे आई!’

विवरण: ‘‘ब्यावर की गलियों से उठकर राज्य की विधानसभा से होते हुए संसद के सदनों और उसके पार विकसित होते एक जनान्दोलन को मैंने बड़े उत्साह के साथ देखा है। यह पुस्तक, अपनी कहानी की Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सहपाठी’ – सत्यजित राय

‘सहपाठी’ – सत्यजित राय अभी सुबह के सवा नौ बजे हैं। मोहित सरकार ने गले में टाई का फंदा डाला ही था कि उस की पत्नी अरुणा कमरे में आई और बोली, ‘तुम्हारा फोन।’ ‘अब अभी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद

‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। Read more…

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लेख । Articles

‘बलराज साहनी का असंतोष’ – जयप्रकाश चौकसे

‘बलराज साहनी का असंतोष’ – जयप्रकाश चौकसे भारतीय सिनेमा का शताब्दी वर्ष अभिनेता बलराज साहनी का भी जन्म शताब्दी वर्ष है। उनका जन्म 1 मई 1913 को हुआ था। बलराज साहनी वामपंथी विचारधारा के व्यक्ति Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा

‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा बाईं आँख रह-रह कर फड़क रही थी। कई बार मला मगर कोई फायदा न हुआ। उसे याद आया कि माँ बाईं आँख फड़कने को कितना बुरा मानती थी। Read more…

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कविताएँ | Poetry

बलराज साहनी की कविताएँ

बलराज साहनी एक अभिनेता के रूप में ही ज्यादा जाने जाते हैं, जबकि उन्होंने एक साहित्यकार के रूप में भी काफी कार्य किया है। उन्होंने कविताओं और कहानियों से लेकर, नाटक और यात्रा-वृत्तान्त तक लिखे हैं। Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘समाज’ – पुनीत कुसुम

‘समाज’ – पुनीत कुसुम कल एक प्राणी से मुलाक़ात हुई जब मैंने उससे उसका नाम पूछा तो वह बोला- ‘समाज’ प्राणी इसलिए कहा क्योंकि उसकी शक्ल और हरकतें मानवों से तो नहीं मिलती थीं संवेदनाओं Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: विमलेश त्रिपाठी कृत ‘हमन हैं इश्क़ मस्ताना’

विवरण: प्रेम को खोजकर पाया जा सकता है क्या? क्या देह और प्रेम दो अलग बातें हैं? क्या सदियों से चली आ रही एकनिष्ठता की परिभाषा महज एक मिथक है? क्या एक ही साथ एक व्यक्ति Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: उदय प्रकाश कृत ‘अरेबा परेबा’

विवरण: “उदय प्रकाश समाज के हाशिए में जीने वाले लोगों के कहानीकार हैं। वे समाज की विद्रूपताओं को बेनकाब करते हैं। समर्थों द्वारा असमर्थों को दबाने-कुचलने के षड्यन्त्रों की पोल खोलते हैं। उनकी कहानियों में एक Read more…

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लेख । Articles

दादा साहब फाल्के – भारतीय सिनेमा के पितामह

धुंडीराज गोविन्द फाल्के यानि दादा साहेब फाल्के को भारतीय फिल्मों का जनक माना जाता है। जब अमेरिका में डी. डब्ल्यू. ग्रिफिथ अपनी पहली फिल्म ‘द बर्थ ऑफ़ अ नेशन’ बना रहे थे, उसके पूरी होने Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे- ”मैं विचार किया करता था कि मनुष्य सृष्टि का सबसे सुन्दर निर्माण है, किन्तु मेरा विचार भ्रामक सिद्ध हुआ। Read more…

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