बरसात

कल रात देर तलक बरसात हुई
देर तलक बिजली चमकती रही
खिड़की के पास कुछ पुरानी यादें थी
जो रख के भूल आया था..
बारिश की बूँदे उन्हें नम कर गईं थी
दीवार पर टाँगी थी कुछ उम्मीदें कभी
उनमें अब सीलन आ गई थी..
कुछ अधूरे ख़्वाब जो सिरहाने तले सोए थे
रात भर सिसकियाँ लेते रहे..
सहर ने जब आँखें खोली
कुछ बूँदे इन पलकों पर महसूस हुईं थी मुझको
हाँ.. कल रात देर तलक बरसात हुई
कल रात ज़हन में तुम्हारी यादों का तूफ़ाँ आया था !!