बाज़ारू होती भाषा

सभ्यता के गर्भ को
सुरक्षित रखने के लिए
यदि एक क़लम का
नंगा होना आवश्यक है
तो, उतना ही आवश्यक है
भाषा को मर्यादित रखना…
क्योंकि,
बाज़ारू होती भाषा के,
घुँघरुओं की खनक,
पूरे मोहल्ले को बाज़ारू
बना देती है।