कहानी | Story

कहानी: ‘धुआँ’ – गुलज़ार

‘धुआँ’ – गुलज़ार बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में ‘धुआँ’ भर गया। चौधरी की मौत सुबह चार बजे हुई थी। सात बजे तक चौधराइन ने रो-धो कर Read more…

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उद्धरण | Quotes

कुछ पंक्तियाँ – ‘जंगल के दावेदार’ (महाश्वेता देवी)

उलगुलान की आग में जंगल नहीं जलता; आदमी का रक्त और हृदय जलता है। अचेत होते-होते भी अपने खून का रंग देखकर बिरसा मुग्ध हो गया था। खून का रंग इतना लाल होता है! सबके Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

क्यों बीरसा मुण्डा ने कहा था कि वह भगवान है?

बीरसा मुण्डा, जिसके पूर्वज जंगल के आदि पुरुष थे और जिन्होंने जंगल में जीवन को बसाया था, आज वही बीरसा और उसका समुदाय जंगल की धरती, पेड़, फूल, फल, कंद और संगीत से बेदखल कर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: सुकृता कृत ‘समय की कसक’

विवरण: “सुकृता की कविताओं में संवेदना का घनत्व हमेशा आकर्षित करता है। देश-देशान्तर में घूमते हुए कई चीज़ें उनका ध्यान खींच लेती हैं। चाहे वह पगोडा के मन्दिर हों, हनोई के मिथक, एलोरा की गुफ़ाएँ या Read more…

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कविताएँ | Poetry

तेरे अनन्य प्रतिरूप अपने लिए बनाये हैं मैंने।

उड़िया कविता: ‘प्रतिरूप’ – अपर्णा महान्ति पास नहीं हो इसीलिए न! कल्पना के सारे श्रेष्ठ रंग लगाकर इतने सुन्दर दिख रहे हो आज! विरह की छेनी से ठीक से तराश-तराश कर तमाम अनावश्यक असुन्दरता काट-छाँटकर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी

‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी राइफल की बुलेट आड़ के लिए रखी हुई शिला पर से फिसलती हुई जसवंतसिंह के बाएँ कंधे में धँसी थी, मगर फिर भी काफी गहरी चोट लग Read more…

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उद्धरण | Quotes

चैप्लिन कहिन..

मैं सिर्फ और सिर्फ एक चीज हूँ और वह है जोकर। यह मुझे राजनीतिज्ञों की तुलना में कहीं ऊँचे आसन पर स्थापित करता है। मैं ईश्वर के साथ मजे में हूँ, मेरा टकराव इंसानों के Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई

‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई जब मैं जाड़ों में लिहाफ ओढ़ती हूँ तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है। और एकदम से मेरा दिमाग बीती हुई दुनिया के Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी

‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया। ‘मामाजी! मामाजी!’ – लड़के ने लपक कर चरण छूए। वे पहचाने नहीं। बोले – Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: डॉ. बीना श्रीवास्तव कृत ‘सतरंगी यादें: यात्रा में यात्रा’

विवरण: एक तरह का उद्वेलन। बिना कहे रह न पाने की मजबूरी। जैसा कि अक्सर यात्राओं में होता है। राह में कहीं फूल मिले तो कहीं काँटे। कहीं चट्टानें अवरोधक बनीं तो कहीं शीतल बयार ने Read more…

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कविताएँ | Poetry

मराठी कविता: ‘श्वेतपत्र’ – शरण कुमार लिंबाले

‘श्वेतपत्र’ – शरण कुमार लिंबाले (रूपान्तर: प्रकाश भातम्ब्रेकर) खोये हुए बालक-सा प्रजातन्त्र जो माँ-बाप का नाम भी नहीं बता सकता न ही अपना पता और सत्ता भी मानो नीची निगाहों से रास्ता नाप रही पतिव्रता Read more…

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निबन्ध | Essay

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी गेहूँ हम खाते हैं, गुलाब सूँघते हैं। एक से शरीर की पुष्टि होती है, दूसरे से मानस तृप्‍त होता है। गेहूँ बड़ा या गुलाब? हम क्‍या चाहते हैं – Read more…

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कविताएँ | Poetry

अंकल आई एम तिलोत्तमा!

कविता: ‘पहचान और परवरिश’ – प्रज्ञा मिश्रा कौन है ये? मेरी बिटिया है, इनकी भतीजी है, मट्टू की बहन है, वी पी साहब की वाइफ हैं, शर्मा जी की बहू है। अपने बारे में भी Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: शशिभूषण द्विवेदी कृत ‘कहीं कुछ नहीं’

विवरण: खामोशी और कोलाहल के बीच की किसी जगह पर वह कहीं खड़ा है। और इस खेल का मजा ले रहा है। क्या सचमुच खामोशी और कोलाहल के बीच कोई स्पेस था, जहां वह खड़ा था।’उपर्युक्त Read more…

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कविताएँ | Poetry

पोर उँगलियों के बंसी टटोलते रहे रात भर..

असमिया कविता: ‘पर्वत के उस पार’ – समीर ताँती पर्वत के उस पार कहीं लो बुझी दीपशिखा इस पार हुआ धूसर नभ उतरे पंछी कुछ अजनबी नौका डूबी… उस पार मगर वो पेड़ ताकता रहा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: दिलीप पाण्डेय, चंचल शर्मा कृत ‘कॉल सेंटर’

विवरण: दिलीप पाण्डेय और चंचल शर्मा की कहानियाँ हिंदी कहानियों में कुछ नए ढंग का हस्तक्षेप करती हैं। यहाँ बहुत-सी कहानियाँ हैं जिनका मैं जिक्र करना चाहता हूँ, लेकिन दो-तीन कहानियाँ तो अद्भुत हैं। आमतौर पर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कुत्ते की पूँछ’ – यशपाल

‘कुत्ते की पूँछ‘ – यशपाल श्रीमती जी कई दिन से कह रही थीं- “उलटी बयार” फ़िल्म का बहुत चर्चा है, देख लेते तो अच्छा था। देख आने में ऐतराज़ न था परन्तु सिनेमा शुरू होने Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: नीरज नीर कृत ‘जंगल में पागल हाथी और ढोल’

विवरण: क्या आप नए कवि हैं और आप बड़ी साहित्यिक पत्रिकाओं में छपना चाहते हैं? आप अपनी कवितायें पत्रिकाओं में भेजते हैं और वहाँ से आपको कोई जवाब नहीं आता है? तो आपके लिए यह जानना जरूरी Read more…

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कविताएँ | Poetry

संस्कृत कविता: ‘विवशता’ – सीताराम द्विवेदी

‘विवशता’ – सीताराम द्विवेदी जब जब मैंने, धरती पर, सनी धूल में, शोकालीन लता को चाहा- फिर से डालना बाँहों में वृक्ष की, तभी आँधी के झौंके से धूल भरी- आँखें हो गयीं लाल। थोड़ा Read more…

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बाल साहित्य | Children's Literature

‘एक चोर की कहानी’ – श्रीलाल शुक्ल

माघ की रात। तालाब का किनारा। सूखता हुआ पानी। सड़ती हुई काई। कोहरे में सब कुछ ढँका हुआ। तालाब के किनारे बबूल, नीम, आम और जामुन के कई छोटे-बड़े पेड़ों का बाग। सब सर झुकाए Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: कृष्ण बलदेव वैद कृत ‘अब्र क्या चीज़ है? हवा क्या है?’

  विवरण: कृष्ण बलदेव वैद की डायरियों की जो पुस्तकें इससे पहले प्रकाशित हुई हैं उन्होंने अपनी बेबाकी, लेखक के निर्मम आत्मालोचन, व्यक्तियों और घटनाओं पर तात्कालिक प्रतिक्रियाओं, अनेक देशी-विदेशी लेखकों और कृतियों के आस्वादन और Read more…

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कविताएँ | Poetry

के. एल. सहगल की कविता ‘परदेस में रहने वाले आ’

यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि के. एल. सहगल एक कवि/शायर भी थे और निजी महफिलों में वे अपनी कविताएँ/छंद सुनाया भी करते थे, हालांकि ‘मैं बैठी थी फुलवारी में’ के अलावा उन Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

पुस्तक अंश: ‘कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’

पुस्तक अंश: ‘कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’ महात्मा गाँधी हमेशा अपने महान कार्यों, सिद्धांतों और बलिदानों के लिए याद किए जाते हैं, लेकिन एक पारिवारिक इंसान या पिता और पति के रूप में भी उन्हें जानने Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

दुनिया में कोई दूसरा सहगल नहीं आया..

कुंदन लाल सहगल का जन्म जम्मू के निकट एक छोटे से गाँव में 11 अप्रैल, 1904 को हुआ। उनके पिता श्री अमरचंद सहगल कश्मीर के महाराजा प्रताप सिंह के दरबार में पदाधिकारी थे। माँ श्रीमती Read more…

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कविताएँ | Poetry

नज़्म: ‘आख़िरी दुआ’ – शहरयार

‘आख़िरी दुआ’ – शहरयार आख़िरी दुआ माँगने को हूँ आसमान पर, रात के सिवा, कुछ नहीं रहा कौन मुट्ठियाँ, रेत से भरे पानियों का रुख, शहर की तरफ़, अब नहीं रहा। कितने मुतमइन लोग आज Read more…

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लेख । Articles

‘अथातो घुम्मकड़ जिज्ञासा’ – राहुल सांकृत्यायन

‘अथातो घुम्मकड़ जिज्ञासा’ – राहुल सांकृत्यायन संस्कृत से ग्रंथ को शुरू करने के लिए पाठकों को रोष नहीं होना चाहिए। आखिर हम शास्‍त्र लिखने जा रहे हैं, फिर शास्‍त्र की परिपाटी को तो मानना ही Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: ज्ञान चतुर्वेदी कृत ‘पागलख़ाना’

विवरण: ज्ञान चतुर्वेदी का यह पाँचवाँ उपन्यास है। इसलिए उनके कथा-शिल्प या व्यंग्यकार के रूप में वह अपनी औपन्यासिक कृतियों को जो वाग-वैदग्ध्य, भाषिक, शाब्दिक तुर्शी, समाज और समय को देखने का एक आलोचनात्मक नजरिया Read more…

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लेख । Articles

‘मैं क्यों लिखता हूँ’ – सआदत हसन मंटो

‘मैं क्यों लिखता हूँ’ – सआदत हसन मंटो मैं क्यों लिखता हूँ? यह एक ऐसा सवाल है कि मैं क्यों खाता हूँ.. मैं क्यों पीता हूँ.. लेकिन इस दृष्टि से मुख़तलिफ है कि खाने और Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बंबूकार्टवालों की Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘गर्मियों की शुरुआत’ – मंगलेश डबराल

‘गर्मियों की शुरुआत’ – मंगलेश डबराल पास के पेड़ एकदम ठूँठ हैं वे हमेशा रहते आए हैं बिना पत्तों के हरे पेड़ काफी दूर दिखाई देते हैं जिनकी जड़ें हैं, जिनकी परछाईं हैं उन्हीं में Read more…

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कहानी | Story

‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी

‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी ‘कला और साहित्य‘ से 1. उस दिन स्मरना पर ग्रीक लोगों का कब्ज़ा हो गया था और कमालपाशा टर्की के भाग्य की डोरी अपनी ज़िन्दगी और मौत से बाँधकर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा

‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा ‘एल्प्स’ के सामने कारीडोर में अंग्रेजी-अमरीकी पत्रिकाओं की दुकान है। सीढ़ियों के नीचे जो बित्ते-भर की जगह खाली रहती है, वहीं पर आमने-सामने दो बेंचें बिछी हैं। इन बेंचों पर सेकंड Read more…

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निबन्ध | Essay

‘धोखा’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘धोखा’ – प्रतापनारायण मिश्र इन दो अक्षरों में भी न जाने कितनी शक्ति है कि इनकी लपेट से बचना यदि निरा असंभव न हो तो भी महा कठिन तो अवश्य है। जबकि भगवान रामचंद्र ने Read more…

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कविताएँ | Poetry

केदारनाथ अग्रवाल के कविता संग्रह ‘अपूर्वा’ से कविताएँ

केदारनाथ अग्रवाल के कविता संग्रह ‘अपूर्वा’ में उनकी 1968 से 1982 तक की कविताओं का संकलन है। इस कविता संग्रह को इसके प्रकाशित वर्ष में ही साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। बकौल केदारनाथ अग्रवाल- Read more…

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कविताएँ | Poetry

आसान है एक मर्द पाना जिसे तुम प्यार कर सको

कमला दास की पाँच कविताएँ अंग्रेजी और मलयालम की प्रख्यात लेखिका कमला दास अपनी कविताओं के ज़रिए स्त्री विमर्श को आंदोलित करने के लिए जानी जाती हैं। आज अगर भारतीय महिलाओं से जुड़ी समस्याओं पर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: अमीर इमाम कृत ‘सुब्ह-बख़ैर ज़िन्दगी’

विवरण: कई बरस पहले नवंबर की एक सर्द शाम में एक लड़का एक जोड़ी आंखों का तआकुब करता हुआ अपने आप से बड़ी दूर निकल गया था कि दिल की सरजमीन पर उन आंखों के Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: अयोध्या प्रसाद कृत ‘चौथा धंधा – किस्से जर्नलिज़्म के’

विवरण: मीडिया, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, एक धंधे में बदल चुका है- ‘चौथा धंधा’। धंधा शब्द देह व्यापार के लिए भी प्रयोग में आता है। अलीशा, नगर के रेड लाइट एरिया की एक सेक्स Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो

‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो बंटवारे के दो-तीन साल बाद पकिस्तान और हिंदुस्तान की सरकारों को ख्याल आया कि साधारण कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए। यानी जो मुस्लमान पागल Read more…

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गद्य | Prose

हो सकता है कि मैं कवि ही न होऊँ

‘दूसरा सप्तक’ से भवानी प्रसाद मिश्र का वक्तव्य कोई भी अनचाहा, बे-मन का काम करणीय नहीं होता। अपनी कविता और अपने कवि पर वक्तव्य देने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी। मगर ‘सप्तक’ की बनावट का Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: महेन्द्र प्रताप सिंह कृत ‘राम वनगमन पथ की वनस्पतियाँ’

विवरण: स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा था कि यदि भारत के जनमानस के अन्तर्मन में कोई विचार स्थापित करना हो तो उसे धर्म से जोड़ देना चाहिए। राम और कृष्ण भारत के सर्वमान्य महापुरुष हैं तथा Read more…

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कविताएँ | Poetry

कन्नड़ कविता: ‘स्टापू’ – ए. के. रामानुजन्

‘स्टापू’ – ए. के. रामानुजन् रूपांतर: बी. आर. नारायण यह चतुरंग नहीं, घर की पिछली गली का स्टापू का खेल है। दोनों टाँगों पर सारी देह सम्भाले एक ख़ाने से दूसरे ख़ाने में फेंकते हैं Read more…

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पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘आधे-अधूरे’: अपूर्ण महत्त्वाकांक्षाओं की कलह

मोहन राकेश का नाटक ‘आधे-अधूरे’ एक मध्यमवर्गीय परिवार की आंतरिक कलह और उलझते रिश्तों के साथ-साथ समाज में स्त्री-पुरुष के बीच बदलते परिवेश तथा एक-दूसरे से दोनों की अपेक्षाओं को चित्रित करता है। महेन्द्रनाथ बहुत Read more…

By Puneet Kusum, ago
निबन्ध | Essay

‘स्त्री: दान ही नहीं, आदान भी’ – महादेवी वर्मा

‘स्त्री: दान ही नहीं, आदान भी’ – महादेवी वर्मा संपन्न और मध्यम वर्ग की स्त्रियों की विवशता, उनके पतिहीन जीवन की दुर्वहता समाज के निकट चिरपरिचित हो चुकी है। वे शून्य के समान पुरुष की Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती

‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुंची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के परदे पर लालिमा फैलती जा रही थी। Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘भोलाराम का जीव’ – हरिशंकर परसाई

‘भोलाराम का जीव’ – हरिशंकर परसाई ऐसा कभी नहीं हुआ था। धर्मराज लाखों वर्षो से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग और नरक में निवास-स्थान अलॉट करते आ रहे थे। पर ऐसा कभी Read more…

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लेख । Articles

‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ – भगत सिंह

‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ – भगत सिंह एक नया प्रश्न उठ खड़ा हुआ है। क्या मैं किसी अहंकार के कारण सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी तथा सर्वज्ञानी ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता हूँ? मेरे कुछ दोस्त Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

‘वो विल (will) करेगी ही नहीं, जब करेगी वोंट (won’t) करेगी’

पुस्तक अंश: ‘हीरा फेरी’ – सुरेन्द्र मोहन पाठक वसीयत एक ऐसा काम है जिस की अहमियत को आज लोग – पढ़े लिखे भी – तरीके से नहीं समझते। जो समझते हैं, वो उसे अपनी जिन्दगी Read more…

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कविताएँ | Poetry

कुछ लघु काव्य – इन्द्रा वासवाणी

कुछ लघु काव्य – इन्द्रा वासवाणी रूपान्तर: नामदेव एकलव्य की गुरु-दक्षिणा: लटका दो – सर द्रोणाचार्य का युगों तक! दर्द ने मेरा सीना चीर कर मौत को टाल दिया! सिन्धु! तेरे सीने पर छोड़े हैं Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा

‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा उसने अपना सूटकेस दरवाजे के आगे रख दिया। घंटी का बटन दबाया और प्रतीक्षा करने लगा। मकान चुप था। कोई हलचल नहीं – एक क्षण के लिए भ्रम Read more…

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कविताएँ | Poetry

पंजाबी कविता: ‘पूरा एक साल’ – अम्बरीश

‘पूरा एक साल’ – अम्बरीश मर्तबान में वह भर रही है आम की खट्टी, रसदार, महकती फाँकें और न जाने क्यों भला लगता है मुझे गहरे में कहीं लगता है कि ठीक-ठाक रहेगा आगामी साल Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी

‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: देवेश ‘अलख’ कृत ‘ख़्वाब अधखुली आँखों के’

विवरण: देवेश ‘अलख’ की कविताओं का संकलन अद्भुत दृश्यों का संग्रह है जिनमें विरल संवेदनशीलता एवं विविधता देखने को मिलती है। इनकी कविताओं में प्यार है कायनात से, इंसान से, इंसानी रिश्तों से, यदि एक शब्द Read more…

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कविताएँ | Poetry

कन्नड़ कविता: ‘सती’ – शशिकला वीरय्य स्वामी

‘सती’ – शशिकला वीरय्य स्वामी प्रेम माने क्या है पता है मित्र? मात्र मेरे होंठ, कटि सहलाकर रमना नहीं मात्र बातों का महल बना उसमें दफना देना नहीं। आओ कम-से-कम एक बार भीगो मेरे आँसुओं Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘एक था राजा’ – सुशील सिद्धार्थ

व्यंग्य: ‘एक था राजा’ – सुशील सिद्धार्थ यह एक सरल, निष्कपट, पारदर्शी और दयालु समय की कहानी है। एक दिन किसी देश का राजा चिंता में पड़ गया। उसे देखकर रानी भी पड़ गई। पड़कर Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: रवीश कुमार कृत ‘बोलती आवाज़: लोकतंत्र, संस्कृति और राष्ट्र’

विवरण: लोगों में डर बैठाने की राष्ट्रीय योजना समाप्त हो चुकी है। वादा किए गए राष्ट्रीय राजमार्गों और नौकरियों से पहले, सभी को बिना चूके एक चीज़ दे दी गयी है- डर। प्रत्येक व्यक्ति के लिए Read more…

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यात्रा वृत्तांत | Travelogue

जापान.. एक ख़ूबसूरत सफ़र – पूजा भाटिया

जापान.. एक ख़ूबसूरत सफ़र – पूजा भाटिया जब हम कोई किताब पढ़ते हैं या कोई फ़िल्म देखते हैं, या किसी की ज़ुबानी कोई क़िस्सा सुनते हैं, तो दरअसल हम उस शख़्स का नज़रिया पढ़, देख Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री सन् १९१७ का दिसम्बर था। भयानक सर्दी थी। दिल्ली के दरीबे-मुहल्ले की एक तंग गली में एक अँधेरे और गन्दे मकान में तीन प्राणी थे। कोठरी के एक कोने में एक Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ रेवतीशंकर तथा पंडित कामताप्रसाद में बड़ी घनिष्ठ मित्रता थी। दोनों एक ही स्कूल तथा एक ही क्लास में वर्षों तक साथ-साथ पढ़े थे। बाबू रेवतीशंकर एक धनसम्पन्न व्यक्ति थे। उनके Read more…

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कविताएँ | Poetry

एक किताब खरीदी जाएगी कविताओं की

‘इस बार’ – कुमार अम्बुज एक किताब खरीदी जाएगी कविताओं की और एक फ्रॉक बिटिया के लिए छेदों वाली साड़ी माँ की दिनचर्या से अलग हो जाएगी एक बिन्दी का पत्ता चुन कर खरीदने का Read more…

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कविताएँ | Poetry

तेलुगु कविता: ‘अक्षय अक्षर’ – मद्दूरू श्रीनिवासुलु

‘अक्षय अक्षर’ – मद्दूरू श्रीनिवासुलु अनुवाद: डॉ. एस. ए. सूर्यनारायण शर्मा अक्षर उपजता है बीज-सा, शब्द-टहनियों में पल्लवित होता है कोंपल-सा, खिल उठता है फूल-सा। अक्षर गूँज उठता है मृदंग नाद-सा, जनता के मुक्तकंठ से Read more…

By Posham Pa, ago
पुस्तक समीक्षा | Book Reviews

‘हीरा फेरी’ – सुरेन्द्र मोहन पाठक का इकसठ माल

जितना बड़ा नाम सुरेन्द्र मोहन पाठक हिन्दी के अपराध लेखन या पोपुलर साहित्य में रखते हैं, उस हिसाब से आज भी मुझे लगता है कि उन्हें कम पढ़ा गया है। मेरी इस बात को पाठक Read more…

By Puneet Kusum, ago
कविताएँ | Poetry

नज़्म: ‘आख़री सच’ – निदा फाज़ली

‘आख़री सच’ – निदा फाज़ली वही है ज़िन्दा गरजते बादल सुलगते सूरज छलकती नदियों के साथ है जो ख़ुद अपने पैरों की धूप है जो ख़ुद अपनी पलकों की रात है जो बुज़ुर्ग सच्चाइयों की Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘हार की जीत’ – सुदर्शन

‘हार की जीत’ – सुदर्शन माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद् – भजन से जो Read more…

By Posham Pa, ago
कविताएँ | Poetry

बांग्ला कविता ‘माँ और बेटी’ – जय गोस्वामी

जय गोस्वामी बंगाल के विख्यात साहित्यकार व कवि हैं। सन 2000 में जय को उनके कविता संग्रह ‘पागली तोमार संगे’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आज पोषम पा पर पढ़िए Read more…

By Posham Pa, ago
गद्य | Prose

‘अशोक के फूल’ – हजारी प्रसाद द्विवेदी

‘अशोक के फूल’ – हजारी प्रसाद द्विवेदी अशोक के फिर फूल आ गए हैं। इन छोटे-छोटे, लाल-लाल पुष्पों के मनोहर स्तबकों में कैसा मोहन भाव है! बहुत सोच-समझकर कंदर्प देवता ने लाखों मनोहर पुष्पों को Read more…

By Posham Pa, ago
ब्लॉग | Blog

मुराकामी में ऐसा क्या है?

मुराकामी में ऐसा क्या है? हारुकी मुराकामी जापान के मशहूर लेखक हैं, जिनके नॉवेल और कहानियां पढ़ने वालों का दुनिया भर में एक बहुत बड़ा दायरा है। यह नाम किसी त’आरुफ़ का मुहताज नहीं है। Read more…

By Tasneef Haidar, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश

‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश इस घटना का संबंध पिताजी से है। मेरे सपने से है और शहर से भी है। शहर के प्रति जो एक जन्म-जात भय होता है, उससे भी है। पिताजी तब पचपन Read more…

By Posham Pa, ago
कविताएँ | Poetry

‘खटमलों की फ़रियाद’ – ‘तालिब’ ख़ुंदमीरी

‘खटमलों की फ़रियाद’ – सैयद महमूद ख़ुंदमीरी ‘तालिब’ एक दिन एक जोंक से कुछ खटमलों ने ये कहा दीजिए ख़ाला हमें भी कोई ऐसा मशवरा अब बजाए खून कोई और ही शै पी सकें आदमी से Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पिता’ – ज्ञानरंजन

‘पिता’ – ज्ञानरंजन उसने अपने बिस्तरे का अंदाज लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फर्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया, ‘आ गए’ और बच्चे की तरफ Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार

‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार बाजार में एक नई तरह की पाजेब चली है। पैरों में पड़कर वे बड़ी अच्छी मालूम होती हैं। उनकी कड़ियां आपस में लचक के साथ जुड़ी रहती हैं कि पाजेब का Read more…

By Posham Pa, ago
कविताएँ | Poetry

तुम दिन भर करती क्या हो!

हमारे समाज में सदियों से एक स्त्री को लेकर आम जन की अवधारणाएं और अपेक्षाएं एक कुंठित सोच से घिरी रही हैं। पुरुष वर्ग के द्वारा स्त्री वर्ग की भावनाओं और अधिकारों की अनदेखी हुई Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय

‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय दोपहर में उस सूने आँगन में पैर रखते हुए मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके वातावरण में कुछ ऐसा अकथ्य, अस्पृश्य, किन्तु Read more…

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कविताएँ | Poetry

मैं तुम्हें बताऊँगा अपनी देह का प्रत्येक मर्मस्थल..

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ प्रयोगवाद के कवि थे और अपने समकालीन कवियों से काफी अलग। उनकी कविताएँ और यहाँ तक कि कहानियाँ भी मनुष्य के बाहरी संघर्षों से साथ-साथ उसके आंतरिक द्वंद्वों को एक मनोवैज्ञानिक Read more…

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कविताएँ | Poetry

महेश नेणवाणी की सिन्धी कविता ‘लाठी’

‘लाठी’ – महेश नेणवाणी जो भगवान को मानता है वह लँगड़ा है और उसे बैसाखियों की ज़रुरत है, जो भगवान को नहीं मानता वह अन्धा है उसे लाठी की ज़रुरत है, आपको तय सिर्फ़ इतना करना Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘निंदा रस’ – हरिशंकर परसाई

‘निंदा रस’ – हरिशंकर परसाई ‘क’ कई महीने बाद आए थे। सुबह चाय पीकर अखबार देख रहा था कि वे तूफ़ान की तरह कमरे में घुसे, ‘साइक्लोन’ की तरह मुझे अपनी भुजाओं में जकड़ा तो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘बहादुर’ – अमरकांत

‘बहादुर’ – अमरकांत सहसा मैं काफी गम्भीर था, जैसा कि उस व्यक्ति को हो जाना चाहिए, जिस पर एक भारी दायित्व आ गया हो। वह सामने खड़ा था और आंखों को बुरी तरह मटका रहा था। Read more…

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कविताएँ | Poetry

घर, माँ, पिता, पत्नी, पुत्र, बंधु! – कुँअर बेचैन की कविताएँ

कुँअर बेचैन हिन्दी की वाचिक परम्परा के प्रख्यात कवि हैं, जो अपनी ग़ज़लों, गीतों व कविताओं के ज़रिए सालों से हिन्दी श्रोताओं के बीच एक खास स्थान रखते आए हैं। शब्दों की गेयता के साथ Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: शिवरतन थानवी कृत ‘जग दर्शन का मेला’

विवरण: कुछ लेख मेरे पढ़े हुए थे, कई अन्य पहली बार पढ़े और छात्रों को भी दिए (यद्यपि आज के सामान्य छात्रों से यह आशा रखना प्राय: व्यर्थ सिद्ध होता है कि वे ध्यान दे-देकर कोई Read more…

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कविताएँ | Poetry

‘सदा एकांत में मैं सूंघता हूँ उठाकर चंद ढेले..’ – फणीश्वरनाथ रेणु की दो कविताएँ

‘मैला आँचल’ से आँचलिक उपन्यासों की परम्परा की शुरुआत करने वाले तथा ‘तीसरी कसम’ व ‘पंचलैट’ जैसी यादगार कहानियां लिखने वाले फणीश्वरनाथ रेणु अपने उपन्यासों और कहानियों के लिए जाने जाते हैं। आज रेणु की Read more…

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कविताएँ | Poetry

धरती ने अपनी त्रिज्या समेटनी शुरू कर दी है..

मेरी तबीयत कुछ नासाज़ है; बस ये देखकर कि ये विकास की कड़ियाँ किस तरह हाथ जोड़े भीख मांग रहीं मानवता के लिए; मैं कहता हूँ कि बस परछाईयाँ बची है, अपना अस्तित्व टटोलते मर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी

‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी खाट की पाटी पर बैठा चाचा मंगलसेन हाथ में चिलम थामे सपने देख रहा था। उसने देखा कि वह समधियों के घर बैठा है और वीरजी की सगाई हो Read more…

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कविताएँ | Poetry

गौरव अदीब की कविताएँ

गौरव सक्सेना ‘अदीब’ बतौर स्पेशल एजुकेटर इंटरनेशनल स्कूल में कार्यरत हैं और थिएटर व शायरी में विशेष रुचि रखते हैं। दस वर्षों से विभिन्न विधाओं में लेखन के साथ-साथ हिन्दी में असगर वज़ाहत के चार Read more…

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ब्लॉग | Blog

कविता का कोई अर्थ नहीं है!

रज़ा उत्सव पर रज़ा फॉउण्डेशन द्वारा आयोजित कवि समवाय के एक सत्र ‘तम शून्य में जगत समीक्षा: कविता के अँधेरे-उजाले’ में मुक्तिबोध की इस पंक्ति पर वक्तव्य दिए गए। उनमें से नन्दकिशोर आचार्य जी का Read more…

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कविताएँ | Poetry

गुलज़ार की ‘पाजी नज्में’

गुलज़ार साहब की नज़्मों की नयी किताब ‘पाजी नज़्में’ लगभग एक महीना पहले आयी है, उसी किताब से पाँच खूबसूरत नज्में यहाँ प्रस्तुत हैं। पढ़ते समय यह कल्पना कि इन नज़्मों का पाठ गुलज़ार साहब Read more…

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कविताएँ | Poetry

कुछ हादसे प्रेम के दरमियान भी होते हैं..

पंखुरी सिन्हा की पाँच कविताएँ परिचय: पंखुरी सिन्हा कवि और कहानीकार हैं और इनकी कहानी व कविताओं की हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। पंखुरी का नवीनतम कविता संग्रह ‘बहस पार Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कर्मनाशा की हार’ – शिवप्रसाद सिंह

काले सांप का काटा आदमी बच सकता है, हलाहल ज़हर पीने वाले की मौत रुक सकती है, किंतु जिस पौधे को एक बार कर्मनाशा का पानी छू ले, वह फिर हरा नहीं हो सकता. कर्मनाशा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: सुधीर चन्द्र कृत ‘गाँधी एक असम्भव सम्भावना’

विवरण: गांधी: एक असम्भव सम्भावना.. साल-दर-साल दो बार गांधी को रस्मन याद कर बाक़ी वक़्त उन्हें भुलाये रखने के ऐसे आदी हो गए हैं हम कि उनके साथ हमारा विच्छेद कितना गहरा और पुराना है, इसकी Read more…

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कविताएँ | Poetry

हरिवंशराय बच्चन की पहली और अन्तिम कविता

यह जानना एक आम जिज्ञासा है कि एक कविता लिखते समय किसी कवि के मन में क्या चल रहा होता है! इसके बावजूद कि वह कविता हमारे खुद के मन को एक दर्पण दिखाती हो, Read more…

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संस्मरण | Memoirs

संस्मरण: ‘वसंत का अग्रदूत’ – अज्ञेय

‘वसंत का अग्रदूत’ – अज्ञेय ‘निराला’ जी को स्मरण करते हुए एकाएक शांतिप्रिय द्विवेदी की याद आ जाए, इसकी पूरी व्यंजना तो वही समझ सकेंगे जिन्होंने इन दोनों महान विभूतियों को प्रत्यक्ष देखा था। यों Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘पत्नी का पत्र’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘पत्नी का पत्र’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर श्रीचरणकमलेषु, आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे पास ही बनी रही – न जाने कितनी बातें Read more…

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कविताएँ | Poetry

कविता: ‘झेलम’ – आशीष मनचंदा

प्रेम, भरोसा, समर्पण.. ये सारे शब्द एक ऐसी गुत्थी में उलझे रहते हैं कि किसी एक की डोर खिंचे तो तनाव दूसरों में भी पैदा होता है। बिना प्रेम भरोसा नहीं, बिना भरोसे समर्पण नहीं। Read more…

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व्यंग्य | Satire

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र (लगभग सवा सौ साल पहले की बात है। इस लेखक ने देखा ‘एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न’। स्वप्न में उसने बिचारा कि देह लीला समाप्त हो जाने के Read more…

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कविताएँ | Poetry

नज़्म: ‘गर्ल्स कॉलेज की लारी’ – जाँ निसार अख़्तर

“‘गर्ल्स कॉलेज की लारी’ जाँ निसार अख़्तर की पहली नज़्म है जिसने उन्हें ख्याति की सीढ़ी पर ला खड़ा किया। यह एक वर्णात्मक (Narrative) नज़्म थी और जाँ निसार अख़्तर के कथनानुसार ‘जवानी की एक Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

मौलवीजी, आपाँ चले! (ज़िन्दगीनामा से)

कृष्णा सोबती का ‘ज़िन्दगीनामा’ अविभाजित पंजाब के लोगों का सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास समेटता एक बेहद पठनीय उपन्यास है। इसके लिए कृष्णा सोबती को 1980 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसी Read more…

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कविताएँ | Poetry

बांके दयाल की कविता ‘पगड़ी सम्भाल जट्टा’

भगत सिंह पर आधारित फिल्मों में अक्सर आने वाला यह गीत ‘पगड़ी सम्भाल जट्टा’ असल में बांके दयाल जी की एक कविता है जो अंग्रेजों के खिलाफ हो रहे एक आन्दोलन के दौरान सुनायी गयी Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

मंटो की ‘एक प्रेम कहानी’

‘एक प्रेम कहानी’ – सआदत हसन मंटो मुझसे सम्बंधित आम लोगों को यह शिकायत है कि मैं प्रेम कहानी नहीं लिखता। मेरे अफ़सानों में चूंकि इश्क़ो-मुहब्बत की चाशनी नहीं होती इसलिए वो बिलकुल सपाट होते Read more…

By Posham Pa, ago
ब्लॉग | Blog

बाउजी की ‘आँखों देखी’ – एकदम। टोटल।

“बस यही सपना मुझे बार बार आता है कि मैं उड़ रहा हूँ आकाश में पंछी की तरह गगन को चीरता मैं चला जा रहा हूँ, चला जा रहा हूँ ये हवा जो मेरे चेहरे Read more…

By Shiva, ago
कविताएँ | Poetry

प्रेम की एक कविता ताल्लुक़ के कई सालों का दस्तावेज़ है

त्याग, समर्पण और यहाँ तक कि अनकंडीशनल लव भी प्रेम में पुरानी बातें हैं। और पुरानी इसलिए क्योंकि जब भी किसी ने इन शब्दों को इनके शाब्दिक अर्थों में ही साधना चाहा, हमेशा प्रेम हारा Read more…

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नयी किताबें | New Books

नयी किताब: उदय प्रकाश कृत ‘मैंगोसिल’

विवरण: उदय प्रकाश की कहानियों का संसार व्यापक है, जहाँ वह नयी सोच के साथ कहानियों की रचना कर नये कीर्तिमान स्थापित करते हैं। इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं कि कहानियाँ समाज को जागरूक करने और कोई Read more…

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