बुरांश

तुम मुझे कोई फूल कहते थे,
पर कौनसा?
यह तुमने मुझपर छोड़ दिया कि मैं कौनसा फूल हूँ,
मैंने बुरांश को चुना,
तुमने पूछा क्यों?
मैंने कहा क्यों नहीं,
और तुम हंस बैठे।
एक बुरांश को तुमने मेरी टहनी से तोड़ कर अपने बालों में ठूंसा दिया,
मैं खिल उठी,
फूल के मानिंद।