कविता | Poetry

नज़्म: ‘गर्ल्स कॉलेज की लारी’ – जाँ निसार अख़्तर

“‘गर्ल्स कॉलेज की लारी’ जाँ निसार अख़्तर की पहली नज़्म है जिसने उन्हें ख्याति की सीढ़ी पर ला खड़ा किया। यह एक वर्णात्मक (Narrative) नज़्म थी और जाँ निसार अख़्तर के कथनानुसार ‘जवानी की एक Read more…

By Posham Pa, ago
कविता | Poetry

बांके दयाल की कविता ‘पगड़ी सम्भाल जट्टा’

भगत सिंह पर आधारित फिल्मों में अक्सर आने वाला यह गीत ‘पगड़ी सम्भाल जट्टा’ असल में बांके दयाल जी की एक कविता है जो अंग्रेजों के खिलाफ हो रहे एक आन्दोलन के दौरान सुनायी गयी Read more…

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कविता | Poetry

प्रेम की एक कविता ताल्लुक़ के कई सालों का दस्तावेज़ है

त्याग, समर्पण और यहाँ तक कि अनकंडीशनल लव भी प्रेम में पुरानी बातें हैं। और पुरानी इसलिए क्योंकि जब भी किसी ने इन शब्दों को इनके शाब्दिक अर्थों में ही साधना चाहा, हमेशा प्रेम हारा Read more…

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बिल्क़ीस ज़फ़िरुल हसन की नज़्म ‘मैं’

‘मैं’ – बिल्क़ीस ज़फ़िरुल हसन कोई गिला तुझसे शिकायत कुछ नहीं है तेरी ही तरह मैंने भी लिखे हैं ऐसे अफ़साने निहायत पाक-तीनत1, बेख़ता मासूम करैक्टर तराशे फिर उनको दर्द, नाकामी, ग़म व हसरत सज़ाएँ और Read more…

By Posham Pa, ago
कविता | Poetry

कुँवर नारायण: अबकी बार लौटा तो..

लेखक लक्ष्मण राव को एक वीडियो में कहते सुना था कि कोई कवि या लेखक पचास वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद जन्मता है और उसकी ज़िन्दगी उसकी मृत्यु के बाद शुरू होती है। Read more…

By Puneet Kusum, ago
कविता | Poetry

छायावाद का बह चला ‘झरना’

कोई भी बहुत लम्बे समय तक केवल मनोरंजन के लिए कविताएँ नहीं सुन सकता। चाहे कविताओं के विषय हों या कवि की कथन-शैली, एक पाठक कहीं न कहीं खुद को उन कविताओं में ढूँढने लगता Read more…

By Posham Pa, ago
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‘कविता’ पर कविताएँ

जब कविताएँ पढ़ते या लिखते हुए कुछ समय बीत जाता है तो कोई भी पाठक या कविता-प्रेमी अनायास ही कभी-कभी कुछ ऐसे सवालों में खोने लगता है जिनका कोई एक नियत जवाब नहीं हो सकता। Read more…

By Puneet Kusum, ago
कविता | Poetry

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की प्रेम कविताएँ

अमूमन रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का नाम आते ही जो पंक्तियाँ किसी भी कविता प्रेमी की ज़बान पर आती हैं, वे या तो ‘कुरुक्षेत्र’ की ये पंक्तियाँ होती हैं- “वह कौन रोता है वहाँ- इतिहास के Read more…

By Puneet Kusum, ago
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सर्वेश्वरदयाल सक्सेना का जूता, मोजा, दस्ताने, स्वेटर और कोट

आप सोच रहे होंगें कि मैं सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कपड़ों की अलमारी क्यों खोलकर बैठा हूँ। लेकिन आप ग़लत सोच रहे हैं। ये सब चीज़ें उनकी कपड़ों की अलमारी से नहीं, उनके कविता संग्रह ‘खूटियों पर Read more…

By Puneet Kusum, ago
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