कहानी | Story

कहानी: ‘कानों में कँगना’ – राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह 

‘कानों में कँगना’ – राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह  “किरन! तुम्हारे कानों में क्या है?” उसने कानों से चंचल लट को हटाकर कहा – “कँगना।” “अरे! कानों में कँगना?” सचमुच दो कंगन कानों को घेरकर बैठे थे। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मौसी’ – भुवेनश्वर

‘मौसी’ – भुवेनश्वर मानव-जीवन के विकास में एक स्थल ऐसा आता है, जब वह परिवर्तन पर भी विजय पा लेता है। जब हमारे जीवन का उत्थान या पतन, न हमारे लिए कुछ विशेषता रखता है, Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मौत का बीज’ – शरलॉक होल्म्स की कहानी

कहानी: ‘मौत का बीज’ – शरलॉक होल्म्स की कहानी (‘द फाइव ऑरेंज पिप्स’ का अनुवाद) सितम्बर के महीने का अंत चल रहा था। पूरे दिन काफी तेज़ हवा चलती रही। इसके साथ ही बारिश की Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘अतिथि! तुम कब जाओगे’ – शरद जोशी

‘अतिथि! तुम कब जाओगे’ – शरद जोशी तुम्हारे आने के चौथे दिन, बार-बार यह प्रश्न मेरे मन में उमड़ रहा है, तुम कब जाओगे अतिथि! तुम कब घर से निकलोगे मेरे मेहमान! तुम जिस सोफे Read more…

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निबन्ध | Essay

खड़ी बोली में प्रथम सफल कविता आप ही कर सके हैं।

‘कविवर श्री सुमित्रानन्दन पन्त’ – सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ “मग्न बने रहते हैं मोद में विनोद में क्रीड़ा करते हैं कल कल्पना की गोद में, सारदा के मन्दिर में सुमन चढ़ाते हैं प्रेम का ही पुण्यपाठ Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर

‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से नज़र आ जाता है। टीले के ऐन नीचे पहाड़ी झील है। एक बल खाती सड़क Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर

‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष लगाया Read more…

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निबन्ध | Essay

‘आचरण की सभ्यता’ – सरदार पूर्ण सिंह

‘आचरण की सभ्यता’ – सरदार पूर्ण सिंह विद्या, कला, कविता, साहित्‍य, धन और राजस्‍व से भी आचरण की सभ्‍यता अधिक ज्‍योतिष्‍मती है। आचरण की सभ्‍यता को प्राप्‍त करके एक कंगाल आदमी राजाओं के दिलों पर Read more…

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निबन्ध | Essay

‘जी’ – बालकृष्ण भट्ट

‘जी’ – बालकृष्ण भट्ट साधारण बातचीत में यह जी भी जी का जंजाल सा हो रहा है। अजी बात ही चीत क्‍या जहाँ और जिसमें देखो उसी में इस जी से जीते जी छुटकारा नहीं Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘दुलाईवाली’ – बंग महिला

‘दुलाईवाली’ – बंग महिला काशी जी के दशाश्‍वमेध घाट पर स्‍नान करके एक मनुष्‍य बड़ी व्‍यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद

‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद ”यह तुम्हारा दुस्साहस है, चन्द्रदेव!” ”मैं सत्य कहता हूँ, देवकुमार।” ”तुम्हारे सत्य की पहचान बहुत दुर्बल है, क्योंकि उसके प्रकट होने का साधन असत् है। समझता हूँ कि तुम प्रवचन Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी लम्बे देवदारों का झुरमुट झक-झुककर गेठिया सैनेटोरियम की बलैया-सी ले रहा था। काँच की खिड़कियों पर सूरज की आड़ी-तिरछी किरणें मरीज़ों के क्लांत चेहरों पर पड़कर उन्हें उठा देती थीं। मौत Read more…

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लेख । Articles

‘अद्भुत मक्खियाँ’ – महावीर प्रसाद द्विवेदी

‘अद्भुत मक्खियाँ’ – महावीर प्रसाद द्विवेदी ईश्वर की सृष्टि में अनेक जीव-जंतु ऐसे हैं जिनकी विचित्रता का वृत्तांत सुनकर आश्चर्य चकित होना पड़ता है। अभी, कुछ ही समय पूर्व, जॉन जे वार्ड (John J. Ward) Read more…

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निबन्ध | Essay

‘समय’ – बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’

‘समय’ – बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ काव्यशासस्त्र विनोदेन कालो गच्छति धीमताम। व्यसनेन च मूर्खाणां निद्रया कलहेन वा॥ यह विख्यात है कि त्रिभुवन में विजय की पताका फहराने वाला, अपने कुटिल कुत्सित परिवार से ब्राह्मणों को दुःख Read more…

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पत्र | Letters

‘पगली का पत्र’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध

‘पगली का पत्र’ – अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध तुम कहोगे कि छि:, इतनी स्वार्थ-परायणता! पर प्यारे, यह स्वार्थ-परायणता नहीं है, यह सच्चे हृदय का उद्गार है, फफोलों से भरे हृदय का आश्वासन है, व्यथित हृदय Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्‍पन्‍न हुई : मैं अपने स्‍थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा Read more…

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निबन्ध | Essay

निबन्ध: ‘पेट’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘पेट’ – प्रतापनारायण मिश्र इन दो अक्षरों की महिमा भी यदि अपरंपार न कहिए तौ भी यह तो मानना ही पड़ेगा कि बहुत बड़ी है। जितने प्राणी और अप्राणी, नाम रूप देखने सुनने में आते Read more…

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कहानी | Story

लोककथा: ‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान

‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान एक सीप ने पड़ोसी सीप से कहा, “मुझे बड़ा तेज दर्द महसूस हो रहा है। कोई भारी और गोल चीज़ है। मेरा दम निकला जा रहा है।” दूसरी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर

‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर चारपाई को घेरकर बैठे हुए उन सब लोगों ने एक साथ एक गहरी साँस ली। वह सब थके-हारे हुए खामोश थे। कमरे में पूरी खामोशी थी, मरने वाले की साँस भी थकी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘माँ’ – प्रेमचंद

‘माँ’ – प्रेमचंद आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, Read more…

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बाल साहित्य | Children's Literature

बाल कहानी: ‘गिरगिट का सपना’ – मोहन राकेश

‘गिरगिट का सपना’ – मोहन राकेश एक गिरगिट था। अच्‍छा, मोटा-ताजा। काफी हरे जंगल में रहता था। रहने के लिए एक घने पेड़ के नीचे अच्‍छी-सी जगह बना रखी थी उसने। खाने-पीने की कोई तकलीफ Read more…

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कहानी | Story

‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज

‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज अनुवाद – सरिता शर्मा बच्चों ने सबसे पहले समुद्र से तेजी से आते काले उभार को देखा, तो उन्होंने उसे दुश्मन का जहाज समझा। Read more…

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पत्र | Letters

नेहरू के नाम मंटो का खत

‘नेहरू के नाम मंटो का खत’ – सआदत हसन मंटो (उर्दू से अनुवाद : डॉ. जानकी प्रसाद शर्मा) पंडित जी, अस्‍सलाम अलैकुम। यह मेरा पहला खत है जो मैं आपको भेज रहा हूँ। आप माशा अल्‍लाह Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘बू’ – सआदत हसन मंटो

‘बू’ – सआदत हसन मंटो बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे सागवन के स्प्रिन्गदार पलंग पर, जो अब खिड़की के पास थोड़ा इधर सरका दिया Read more…

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लेख । Articles

‘मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ!’ – सआदत हसन मंटो

‘मैं कहानीकार नहीं, जेबकतरा हूँ’ – सआदत हसन मंटो मेरी जिंदगी में तीन बड़ी घटनाएँ घटी हैं। पहली मेरे जन्म की। दूसरी मेरी शादी की और तीसरी मेरे कहानीकार बन जाने की। लेखक के तौर Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय

‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।। प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर चल रही है और देवताओं की Read more…

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लेख । Articles

‘सुन्दरता और त्वचा का रंग’ – राममनोहर लोहिया

‘सुन्दरता और त्वचा का रंग’ – राममनोहर लोहिया सौंदर्य की परख की यह विकृति राजनैतिक प्रभाव के कारण आई है। गोरी चमड़ी के यूरोपियन लोग सारी दुनिया पर तीन सदियों से हावी रहे हैं। अधिकांश Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु

‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है… पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार, मोरंग राज नेपाल से धान Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय

‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय ‘प्रोपगंडा’-प्रभु का प्रताप प्रचंड है – ‘जिन्‍हके जस-प्रताप के आगे, ससि मलीन रवि सीतल लागे।’ यदि आज ‘भूषण’ और ‘पद्माकर’ जीवित होते तो इनके यश और प्रताप का भड़कीला Read more…

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कहानी | Story

लघुकथा: ‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता

‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता “आंटी जी चंदा इकठ्ठा कर रहें हैं। आप भी कुछ अपनी इच्छा से दे दीजिए।” “अरे लड़कियों, ये काॅलेज छोड़ कर किस बात का चंदा इकठ्ठा करती फिर रही हो?” Read more…

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निबन्ध | Essay

‘भय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘भय’ – रामचंद्र शुक्ल किसी आती हुई आपदा की भावना या दुःख के कारण के साक्षात्‍कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्‍तंभ-कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुःख के Read more…

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निबन्ध | Essay

निबन्ध: ‘एक सलाह’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘एक सलाह’ – प्रतापनारायण मिश्र हमारे मान्‍यवर, मित्र, ‘पीयूषप्रवाह’ संपादक, साहित्‍याचार्य पंडित अंबिकादत्त व्‍यास महोदय पूछते हैं कि हिन्दी भाषा में “में से के” आदि विभक्ति चिह्न शब्‍दों के साथ मिला के लिखने चाहिए अथवा Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सहपाठी’ – सत्यजित राय

‘सहपाठी’ – सत्यजित राय अभी सुबह के सवा नौ बजे हैं। मोहित सरकार ने गले में टाई का फंदा डाला ही था कि उस की पत्नी अरुणा कमरे में आई और बोली, ‘तुम्हारा फोन।’ ‘अब अभी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद

‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। Read more…

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लेख । Articles

‘बलराज साहनी का असंतोष’ – जयप्रकाश चौकसे

‘बलराज साहनी का असंतोष’ – जयप्रकाश चौकसे भारतीय सिनेमा का शताब्दी वर्ष अभिनेता बलराज साहनी का भी जन्म शताब्दी वर्ष है। उनका जन्म 1 मई 1913 को हुआ था। बलराज साहनी वामपंथी विचारधारा के व्यक्ति Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा

‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा बाईं आँख रह-रह कर फड़क रही थी। कई बार मला मगर कोई फायदा न हुआ। उसे याद आया कि माँ बाईं आँख फड़कने को कितना बुरा मानती थी। Read more…

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लेख । Articles

दादा साहब फाल्के – भारतीय सिनेमा के पितामह

धुंडीराज गोविन्द फाल्के यानि दादा साहेब फाल्के को भारतीय फिल्मों का जनक माना जाता है। जब अमेरिका में डी. डब्ल्यू. ग्रिफिथ अपनी पहली फिल्म ‘द बर्थ ऑफ़ अ नेशन’ बना रहे थे, उसके पूरी होने Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे- ”मैं विचार किया करता था कि मनुष्य सृष्टि का सबसे सुन्दर निर्माण है, किन्तु मेरा विचार भ्रामक सिद्ध हुआ। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर

‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर मैं चुपचाप खड़ा सब देख रहा हूँ और अब न जाने क्यों मुझे मन में लग रहा है कि दीवानचंद की शवयात्रा में कम से कम मुझे तो शामिल Read more…

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संस्मरण | Memoirs

संस्मरण: ‘अरुंधती’ – शिवानी

‘अरुंधती’ – शिवानी उसका साथ यद्यपि तीन ही वर्ष रहा, पर उस संक्षिप्त अवधि में भी हम दोनों अटूट मैत्री की डोर में बँध गए। उन दिनों पूरा आश्रम ही संगीतमय था। कभी ‘चित्रांगदा’ का Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे

‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे 1. शहर का रंगमंडल सभागार दर्शकों से खचाखच भर चुका है। वे सभी देश के प्रख्यात नाट्य निर्देशक इरफान अहमद साहब का नाटक देखने आए हैं। इरफान Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ग्यारह वर्ष की आयु से ही अनुपमा उपन्यास पढ़-पढ़कर मष्तिष्क को एकदम बिगाड़ बैठी थी। वह समझती थी, मनुष्य के हृदय में जितना प्रेम, जितनी माधुरी, जितनी शोभा, जितना Read more…

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लेख । Articles

बाईस गज में सिमटे चौबीस वर्ष – जयप्रकाश चौकसे

बाईस गज में सिमटे चौबीस वर्ष – जयप्रकाश चौकसे चार्ली चैपलिन को बरसात बहुत पसंद थी क्योंकि उसमें आंसू लोगों को नहीं दिखाई देते। हॉलीवुड की ‘गुडबॉय अगेन’ में नायिका इन्ग्रिड बर्गमैन अपने प्रेमी से Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘हिन्दी की आखिरी किताब’ – यशवंत कोठारी

‘हिन्दी की आखिरी किताब’ – यशवंत कोठारी अकहानी : अकहानी वह है जो न तो कहानी है और न ही जिसमें अ अक्षर का प्रयोग होता है। वास्तव में अकहानी असफल अकहानीकारों की आंतरिक व्यथा है। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ठण्डा गोश्त’ – सआदत हसन मंटो

‘ठण्डा गोश्त’ – सआदत हसन मंटो ईशरसिंह ज्यों ही होटल के कमरे में दाखिल हुआ, कुलवन्त कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज-तेज आँखों से उसकी तरफ घूरकर देखा और दरवाजे की चिटखनी बन्द कर Read more…

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निबन्ध | Essay

‘कुटज’ – हजारी प्रसाद द्विवेदी

ललित निबन्ध: ‘कुटज’ – हजारीप्रसाद द्विवेदी कहते हैं, पर्वत शोभा-निकेतन होते हैं। फिर हिमालय का तो कहना ही क्‍या। पूर्व और अपार समुद्र – महोदधि और रत्‍नाकर – दोनों को दोनों भुजाओं से थाहता हुआ Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद

‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद आर्द्रा नक्षत्र; आकाश में काले-काले बादलों की घुमड़, जिसमें देव-दुन्दुभी का गम्भीर घोष। प्राची के एक निरभ्र कोने से स्वर्ण-पुरुष झाँकने लगा था।-देखने लगा महाराज की सवारी। शैलमाला के अञ्चल में Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘धुआँ’ – गुलज़ार

‘धुआँ’ – गुलज़ार बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में ‘धुआँ’ भर गया। चौधरी की मौत सुबह चार बजे हुई थी। सात बजे तक चौधराइन ने रो-धो कर Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

क्यों बीरसा मुण्डा ने कहा था कि वह भगवान है?

बीरसा मुण्डा, जिसके पूर्वज जंगल के आदि पुरुष थे और जिन्होंने जंगल में जीवन को बसाया था, आज वही बीरसा और उसका समुदाय जंगल की धरती, पेड़, फूल, फल, कंद और संगीत से बेदखल कर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी

‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी राइफल की बुलेट आड़ के लिए रखी हुई शिला पर से फिसलती हुई जसवंतसिंह के बाएँ कंधे में धँसी थी, मगर फिर भी काफी गहरी चोट लग Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई

‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई जब मैं जाड़ों में लिहाफ ओढ़ती हूँ तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है। और एकदम से मेरा दिमाग बीती हुई दुनिया के Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी

‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया। ‘मामाजी! मामाजी!’ – लड़के ने लपक कर चरण छूए। वे पहचाने नहीं। बोले – Read more…

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निबन्ध | Essay

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी गेहूँ हम खाते हैं, गुलाब सूँघते हैं। एक से शरीर की पुष्टि होती है, दूसरे से मानस तृप्‍त होता है। गेहूँ बड़ा या गुलाब? हम क्‍या चाहते हैं – Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कुत्ते की पूँछ’ – यशपाल

‘कुत्ते की पूँछ‘ – यशपाल श्रीमती जी कई दिन से कह रही थीं- “उलटी बयार” फ़िल्म का बहुत चर्चा है, देख लेते तो अच्छा था। देख आने में ऐतराज़ न था परन्तु सिनेमा शुरू होने Read more…

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बाल साहित्य | Children's Literature

‘एक चोर की कहानी’ – श्रीलाल शुक्ल

माघ की रात। तालाब का किनारा। सूखता हुआ पानी। सड़ती हुई काई। कोहरे में सब कुछ ढँका हुआ। तालाब के किनारे बबूल, नीम, आम और जामुन के कई छोटे-बड़े पेड़ों का बाग। सब सर झुकाए Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

पुस्तक अंश: ‘कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’

पुस्तक अंश: ‘कस्तूरबा की रहस्यमयी डायरी’ महात्मा गाँधी हमेशा अपने महान कार्यों, सिद्धांतों और बलिदानों के लिए याद किए जाते हैं, लेकिन एक पारिवारिक इंसान या पिता और पति के रूप में भी उन्हें जानने Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

दुनिया में कोई दूसरा सहगल नहीं आया..

कुंदन लाल सहगल का जन्म जम्मू के निकट एक छोटे से गाँव में 11 अप्रैल, 1904 को हुआ। उनके पिता श्री अमरचंद सहगल कश्मीर के महाराजा प्रताप सिंह के दरबार में पदाधिकारी थे। माँ श्रीमती Read more…

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लेख । Articles

‘अथातो घुम्मकड़ जिज्ञासा’ – राहुल सांकृत्यायन

‘अथातो घुम्मकड़ जिज्ञासा’ – राहुल सांकृत्यायन संस्कृत से ग्रंथ को शुरू करने के लिए पाठकों को रोष नहीं होना चाहिए। आखिर हम शास्‍त्र लिखने जा रहे हैं, फिर शास्‍त्र की परिपाटी को तो मानना ही Read more…

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लेख । Articles

‘मैं क्यों लिखता हूँ’ – सआदत हसन मंटो

‘मैं क्यों लिखता हूँ’ – सआदत हसन मंटो मैं क्यों लिखता हूँ? यह एक ऐसा सवाल है कि मैं क्यों खाता हूँ.. मैं क्यों पीता हूँ.. लेकिन इस दृष्टि से मुख़तलिफ है कि खाने और Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बंबूकार्टवालों की Read more…

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कहानी | Story

‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी

‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी ‘कला और साहित्य‘ से 1. उस दिन स्मरना पर ग्रीक लोगों का कब्ज़ा हो गया था और कमालपाशा टर्की के भाग्य की डोरी अपनी ज़िन्दगी और मौत से बाँधकर Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा

‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा ‘एल्प्स’ के सामने कारीडोर में अंग्रेजी-अमरीकी पत्रिकाओं की दुकान है। सीढ़ियों के नीचे जो बित्ते-भर की जगह खाली रहती है, वहीं पर आमने-सामने दो बेंचें बिछी हैं। इन बेंचों पर सेकंड Read more…

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निबन्ध | Essay

‘धोखा’ – प्रतापनारायण मिश्र

‘धोखा’ – प्रतापनारायण मिश्र इन दो अक्षरों में भी न जाने कितनी शक्ति है कि इनकी लपेट से बचना यदि निरा असंभव न हो तो भी महा कठिन तो अवश्य है। जबकि भगवान रामचंद्र ने Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो

‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो बंटवारे के दो-तीन साल बाद पकिस्तान और हिंदुस्तान की सरकारों को ख्याल आया कि साधारण कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए। यानी जो मुस्लमान पागल Read more…

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गद्य | Prose

हो सकता है कि मैं कवि ही न होऊँ

‘दूसरा सप्तक’ से भवानी प्रसाद मिश्र का वक्तव्य कोई भी अनचाहा, बे-मन का काम करणीय नहीं होता। अपनी कविता और अपने कवि पर वक्तव्य देने की बिल्कुल इच्छा नहीं थी। मगर ‘सप्तक’ की बनावट का Read more…

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निबन्ध | Essay

‘स्त्री: दान ही नहीं, आदान भी’ – महादेवी वर्मा

‘स्त्री: दान ही नहीं, आदान भी’ – महादेवी वर्मा संपन्न और मध्यम वर्ग की स्त्रियों की विवशता, उनके पतिहीन जीवन की दुर्वहता समाज के निकट चिरपरिचित हो चुकी है। वे शून्य के समान पुरुष की Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती

‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुंची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के परदे पर लालिमा फैलती जा रही थी। Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘भोलाराम का जीव’ – हरिशंकर परसाई

‘भोलाराम का जीव’ – हरिशंकर परसाई ऐसा कभी नहीं हुआ था। धर्मराज लाखों वर्षो से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग और नरक में निवास-स्थान अलॉट करते आ रहे थे। पर ऐसा कभी Read more…

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लेख । Articles

‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ – भगत सिंह

‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ – भगत सिंह एक नया प्रश्न उठ खड़ा हुआ है। क्या मैं किसी अहंकार के कारण सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी तथा सर्वज्ञानी ईश्वर के अस्तित्व पर विश्वास नहीं करता हूँ? मेरे कुछ दोस्त Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

‘वो विल (will) करेगी ही नहीं, जब करेगी वोंट (won’t) करेगी’

पुस्तक अंश: ‘हीरा फेरी’ – सुरेन्द्र मोहन पाठक वसीयत एक ऐसा काम है जिस की अहमियत को आज लोग – पढ़े लिखे भी – तरीके से नहीं समझते। जो समझते हैं, वो उसे अपनी जिन्दगी Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा

‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा उसने अपना सूटकेस दरवाजे के आगे रख दिया। घंटी का बटन दबाया और प्रतीक्षा करने लगा। मकान चुप था। कोई हलचल नहीं – एक क्षण के लिए भ्रम Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी

‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘एक था राजा’ – सुशील सिद्धार्थ

व्यंग्य: ‘एक था राजा’ – सुशील सिद्धार्थ यह एक सरल, निष्कपट, पारदर्शी और दयालु समय की कहानी है। एक दिन किसी देश का राजा चिंता में पड़ गया। उसे देखकर रानी भी पड़ गई। पड़कर Read more…

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यात्रा वृत्तांत | Travelogue

जापान.. एक ख़ूबसूरत सफ़र – पूजा भाटिया

जापान.. एक ख़ूबसूरत सफ़र – पूजा भाटिया जब हम कोई किताब पढ़ते हैं या कोई फ़िल्म देखते हैं, या किसी की ज़ुबानी कोई क़िस्सा सुनते हैं, तो दरअसल हम उस शख़्स का नज़रिया पढ़, देख Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री सन् १९१७ का दिसम्बर था। भयानक सर्दी थी। दिल्ली के दरीबे-मुहल्ले की एक तंग गली में एक अँधेरे और गन्दे मकान में तीन प्राणी थे। कोठरी के एक कोने में एक Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ रेवतीशंकर तथा पंडित कामताप्रसाद में बड़ी घनिष्ठ मित्रता थी। दोनों एक ही स्कूल तथा एक ही क्लास में वर्षों तक साथ-साथ पढ़े थे। बाबू रेवतीशंकर एक धनसम्पन्न व्यक्ति थे। उनके Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘हार की जीत’ – सुदर्शन

‘हार की जीत’ – सुदर्शन माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद् – भजन से जो Read more…

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गद्य | Prose

‘अशोक के फूल’ – हजारी प्रसाद द्विवेदी

‘अशोक के फूल’ – हजारी प्रसाद द्विवेदी अशोक के फिर फूल आ गए हैं। इन छोटे-छोटे, लाल-लाल पुष्पों के मनोहर स्तबकों में कैसा मोहन भाव है! बहुत सोच-समझकर कंदर्प देवता ने लाखों मनोहर पुष्पों को Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश

‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश इस घटना का संबंध पिताजी से है। मेरे सपने से है और शहर से भी है। शहर के प्रति जो एक जन्म-जात भय होता है, उससे भी है। पिताजी तब पचपन Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘पिता’ – ज्ञानरंजन

‘पिता’ – ज्ञानरंजन उसने अपने बिस्तरे का अंदाज लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फर्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया, ‘आ गए’ और बच्चे की तरफ Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार

‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार बाजार में एक नई तरह की पाजेब चली है। पैरों में पड़कर वे बड़ी अच्छी मालूम होती हैं। उनकी कड़ियां आपस में लचक के साथ जुड़ी रहती हैं कि पाजेब का Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय

‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय दोपहर में उस सूने आँगन में पैर रखते हुए मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके वातावरण में कुछ ऐसा अकथ्य, अस्पृश्य, किन्तु Read more…

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व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘निंदा रस’ – हरिशंकर परसाई

‘निंदा रस’ – हरिशंकर परसाई ‘क’ कई महीने बाद आए थे। सुबह चाय पीकर अखबार देख रहा था कि वे तूफ़ान की तरह कमरे में घुसे, ‘साइक्लोन’ की तरह मुझे अपनी भुजाओं में जकड़ा तो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘बहादुर’ – अमरकांत

‘बहादुर’ – अमरकांत सहसा मैं काफी गम्भीर था, जैसा कि उस व्यक्ति को हो जाना चाहिए, जिस पर एक भारी दायित्व आ गया हो। वह सामने खड़ा था और आंखों को बुरी तरह मटका रहा था। Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी

‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी खाट की पाटी पर बैठा चाचा मंगलसेन हाथ में चिलम थामे सपने देख रहा था। उसने देखा कि वह समधियों के घर बैठा है और वीरजी की सगाई हो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘कर्मनाशा की हार’ – शिवप्रसाद सिंह

काले सांप का काटा आदमी बच सकता है, हलाहल ज़हर पीने वाले की मौत रुक सकती है, किंतु जिस पौधे को एक बार कर्मनाशा का पानी छू ले, वह फिर हरा नहीं हो सकता. कर्मनाशा Read more…

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संस्मरण | Memoirs

संस्मरण: ‘वसंत का अग्रदूत’ – अज्ञेय

‘वसंत का अग्रदूत’ – अज्ञेय ‘निराला’ जी को स्मरण करते हुए एकाएक शांतिप्रिय द्विवेदी की याद आ जाए, इसकी पूरी व्यंजना तो वही समझ सकेंगे जिन्होंने इन दोनों महान विभूतियों को प्रत्यक्ष देखा था। यों Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘पत्नी का पत्र’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘पत्नी का पत्र’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर श्रीचरणकमलेषु, आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे पास ही बनी रही – न जाने कितनी बातें Read more…

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व्यंग्य | Satire

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र (लगभग सवा सौ साल पहले की बात है। इस लेखक ने देखा ‘एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न’। स्वप्न में उसने बिचारा कि देह लीला समाप्त हो जाने के Read more…

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पुस्तक अंश | Book Excerpt

मौलवीजी, आपाँ चले! (ज़िन्दगीनामा से)

कृष्णा सोबती का ‘ज़िन्दगीनामा’ अविभाजित पंजाब के लोगों का सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास समेटता एक बेहद पठनीय उपन्यास है। इसके लिए कृष्णा सोबती को 1980 में साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसी Read more…

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कहानी | Story

मंटो की ‘एक प्रेम कहानी’

‘एक प्रेम कहानी’ – सआदत हसन मंटो मुझसे सम्बंधित आम लोगों को यह शिकायत है कि मैं प्रेम कहानी नहीं लिखता। मेरे अफ़सानों में चूंकि इश्क़ो-मुहब्बत की चाशनी नहीं होती इसलिए वो बिलकुल सपाट होते Read more…

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कहानी | Story

‘आजा फटाफट, चिल मारेंगे’ – प्रद्युम्न आर. चौरे

“रात सोने के लिए है।” यह एक जुमला है और यही सच भी क्योंकि मुद्दतों से फ़र्द इस जुमले की ताईद करते आए हैं। यह जुमला या यूँ कहूं कि नियम इंसान ने ही गढ़ा होगा Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘सौत’ – प्रेमचंद

‘सौत’ – प्रेमचंद 1 जब रजिया के दो-तीन बच्चे होकर मर गये और उम्र ढल चली, तो रामू का प्रेम उससे कुछ कम होने लगा और दूसरे ब्याह की धुन सवार हुई। आये दिन रजिया Read more…

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व्यंग्य | Satire

परसाई के हनुमान: प्रथम साम्यवादी या प्रथम स्मगलर?

हरिशंकर परसाई सदियों पुराने मिथकों में अपनी कल्पना जोड़कर उसे आज के समाज की विसंगतियों का रूप दे देने के लिए जाने जाते हैं, चाहे वो कृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग हो या फिर त्रिशंकु की Read more…

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साक्षात्कार | Interviews

अमृता के इमरोज़ से ‘सात सवाल’

अमृता-इमरोज़ का नाम आते ही या तो प्रेम-तिकोनों के कोण नपने लगते हैं या फिर एक में खुद को भुला चुका कोई दूसरा ‘एक’ याद आने लगता है। दो पर एक की छाया हमेशा रहती Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद

‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी। गंगी से बोला- “यह कैसा पानी है? मारे बास के पिया नहीं जाता। गला सूखा जा रहा है Read more…

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रिपोर्ताज | Reportage

‘अदम्य जीवन’ – रांगेय राघव का रिपोर्ताज

पचास के दशक के आरम्भ में पड़े बंगाल के अकाल के बारे में रांगेय राघव ने यह रिपोर्ताज लिखा था, जो ‘तूफानों के बीच’ रिपोर्ताज संग्रह में प्रकाशित हुआ। बंगाल के अकाल के दौरान जो Read more…

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कहानी | Story

कहानी: ‘ईदगाह’ – प्रेमचंद

‘ईदगाह’ – प्रेमचंद 1 रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब Read more…

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कहानी | Story

रानी पद्मावती/पद्मिनी की कहानी (जायसी की ‘पद्मावत’ का व्याख्यान)

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ के कारण फिर से चर्चा में आयी रानी पद्मावती की कहानी, हिन्दी साहित्य के प्रेममार्गी शाखा के कवि मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ के महान और चर्चित ग्रन्थ ‘पद्मावत’ में पायी Read more…

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कहानी | Story

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पंचलाइट’ (पंचलैट)

अपने उपन्यासों और कहानियों में लोकजीवन को एक कविता के जैसे पेश करने वाले फणीश्वरनाथ रेणु के कहानी संग्रह ‘ठुमरी’ की यह कहानी बड़ी मजेदार है। एक गाँव में विभिन्न जातियों की विभिन्न टोलियाँ हैं। Read more…

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