संस्मरण | Memoirs

संस्मरण: ‘कुआँ प्यासे के पास आया’ – पृथ्वीराज कपूर

‘कुआँ प्यासे के पास आया’ – पृथ्वीराज कपूर दरियागंज की एक छोटी-सी गली में, एक छोटे-से मकान की, एक छोटी सी बैठक के छोटे-से दरवाजे में घुसते ही, एक छोटी-सी चारपाई पर एक विशाल मूर्ति Read more…

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‘तीन गोले’ – सआदत हसन मंटो

‘तीन गोले’ – सआदत हसन मंटो हसन बिल्डिंगज़ के फ़्लैट नंबर एक में तीन गोले मेरे सामने मेज़ पर पड़े थे। मैं ग़ौर से उनकी तरफ़ देख रहा था और मीराजी बातें सुन रहा था। Read more…

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संस्मरण: ‘अरुंधती’ – शिवानी

‘अरुंधती’ – शिवानी उसका साथ यद्यपि तीन ही वर्ष रहा, पर उस संक्षिप्त अवधि में भी हम दोनों अटूट मैत्री की डोर में बँध गए। उन दिनों पूरा आश्रम ही संगीतमय था। कभी ‘चित्रांगदा’ का Read more…

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संस्मरण: ‘वसंत का अग्रदूत’ – अज्ञेय

‘वसंत का अग्रदूत’ – अज्ञेय ‘निराला’ जी को स्मरण करते हुए एकाएक शांतिप्रिय द्विवेदी की याद आ जाए, इसकी पूरी व्यंजना तो वही समझ सकेंगे जिन्होंने इन दोनों महान विभूतियों को प्रत्यक्ष देखा था। यों Read more…

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