व्यंग्य | Satire

व्यंग्य: ‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय

‘आलस्य-भक्त’ – बाबू गुलाब राय अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम। दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।। प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर चल रही है और देवताओं की Read more…

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व्यंग्य: ‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय

‘प्रोपगंडा-प्रभु का प्रताप’ – शिवपूजन सहाय ‘प्रोपगंडा’-प्रभु का प्रताप प्रचंड है – ‘जिन्‍हके जस-प्रताप के आगे, ससि मलीन रवि सीतल लागे।’ यदि आज ‘भूषण’ और ‘पद्माकर’ जीवित होते तो इनके यश और प्रताप का भड़कीला Read more…

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व्यंग्य: ‘हिन्दी की आखिरी किताब’ – यशवंत कोठारी

‘हिन्दी की आखिरी किताब’ – यशवंत कोठारी अकहानी : अकहानी वह है जो न तो कहानी है और न ही जिसमें अ अक्षर का प्रयोग होता है। वास्तव में अकहानी असफल अकहानीकारों की आंतरिक व्यथा है। Read more…

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व्यंग्य: ‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी

‘जिसके हम मामा हैं’ – शरद जोशी एक सज्जन बनारस पहुँचे। स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया। ‘मामाजी! मामाजी!’ – लड़के ने लपक कर चरण छूए। वे पहचाने नहीं। बोले – Read more…

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व्यंग्य: ‘भोलाराम का जीव’ – हरिशंकर परसाई

‘भोलाराम का जीव’ – हरिशंकर परसाई ऐसा कभी नहीं हुआ था। धर्मराज लाखों वर्षो से असंख्य आदमियों को कर्म और सिफारिश के आधार पर स्वर्ग और नरक में निवास-स्थान अलॉट करते आ रहे थे। पर ऐसा कभी Read more…

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व्यंग्य: ‘एक था राजा’ – सुशील सिद्धार्थ

व्यंग्य: ‘एक था राजा’ – सुशील सिद्धार्थ यह एक सरल, निष्कपट, पारदर्शी और दयालु समय की कहानी है। एक दिन किसी देश का राजा चिंता में पड़ गया। उसे देखकर रानी भी पड़ गई। पड़कर Read more…

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व्यंग्य: ‘निंदा रस’ – हरिशंकर परसाई

‘निंदा रस’ – हरिशंकर परसाई ‘क’ कई महीने बाद आए थे। सुबह चाय पीकर अखबार देख रहा था कि वे तूफ़ान की तरह कमरे में घुसे, ‘साइक्लोन’ की तरह मुझे अपनी भुजाओं में जकड़ा तो Read more…

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‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र (लगभग सवा सौ साल पहले की बात है। इस लेखक ने देखा ‘एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न’। स्वप्न में उसने बिचारा कि देह लीला समाप्त हो जाने के Read more…

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परसाई के हनुमान: प्रथम साम्यवादी या प्रथम स्मगलर?

हरिशंकर परसाई सदियों पुराने मिथकों में अपनी कल्पना जोड़कर उसे आज के समाज की विसंगतियों का रूप दे देने के लिए जाने जाते हैं, चाहे वो कृष्ण-सुदामा मिलन का प्रसंग हो या फिर त्रिशंकु की Read more…

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