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कहानी: ‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर

‘फ़ोटोग्राफ़र’ – कुर्रतुल एन हैदर मौसमे-बहार के फलों से घिरा बेहद नज़रफ़रेब गेस्टहाउस हरे-भरे टीले की चोटी पर दूर से नज़र आ जाता है। टीले के ऐन नीचे पहाड़ी झील है। एक बल खाती सड़क Read more…

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कहानी: ‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर

‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष लगाया Read more…

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कहानी: ‘दुलाईवाली’ – बंग महिला

‘दुलाईवाली’ – बंग महिला काशी जी के दशाश्‍वमेध घाट पर स्‍नान करके एक मनुष्‍य बड़ी व्‍यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती Read more…

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कहानी: ‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद

‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद ”यह तुम्हारा दुस्साहस है, चन्द्रदेव!” ”मैं सत्य कहता हूँ, देवकुमार।” ”तुम्हारे सत्य की पहचान बहुत दुर्बल है, क्योंकि उसके प्रकट होने का साधन असत् है। समझता हूँ कि तुम प्रवचन Read more…

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कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी लम्बे देवदारों का झुरमुट झक-झुककर गेठिया सैनेटोरियम की बलैया-सी ले रहा था। काँच की खिड़कियों पर सूरज की आड़ी-तिरछी किरणें मरीज़ों के क्लांत चेहरों पर पड़कर उन्हें उठा देती थीं। मौत Read more…

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कहानी: ‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्‍पन्‍न हुई : मैं अपने स्‍थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा Read more…

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लोककथा: ‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान

‘माँ बनने का सुख’ – खलील जिब्रान एक सीप ने पड़ोसी सीप से कहा, “मुझे बड़ा तेज दर्द महसूस हो रहा है। कोई भारी और गोल चीज़ है। मेरा दम निकला जा रहा है।” दूसरी Read more…

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कहानी: ‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर

‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर चारपाई को घेरकर बैठे हुए उन सब लोगों ने एक साथ एक गहरी साँस ली। वह सब थके-हारे हुए खामोश थे। कमरे में पूरी खामोशी थी, मरने वाले की साँस भी थकी Read more…

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कहानी: ‘माँ’ – प्रेमचंद

‘माँ’ – प्रेमचंद आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, Read more…

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‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज

‘दुनिया के सबसे खूबसूरत आदमी का डूबना’ – गाब्रिएल गार्सिया मार्केज अनुवाद – सरिता शर्मा बच्चों ने सबसे पहले समुद्र से तेजी से आते काले उभार को देखा, तो उन्होंने उसे दुश्मन का जहाज समझा। Read more…

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कहानी: ‘बू’ – सआदत हसन मंटो

‘बू’ – सआदत हसन मंटो बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे सागवन के स्प्रिन्गदार पलंग पर, जो अब खिड़की के पास थोड़ा इधर सरका दिया Read more…

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कहानी: ‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु

‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है… पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार, मोरंग राज नेपाल से धान Read more…

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लघुकथा: ‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता

‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता “आंटी जी चंदा इकठ्ठा कर रहें हैं। आप भी कुछ अपनी इच्छा से दे दीजिए।” “अरे लड़कियों, ये काॅलेज छोड़ कर किस बात का चंदा इकठ्ठा करती फिर रही हो?” Read more…

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कहानी: ‘सहपाठी’ – सत्यजित राय

‘सहपाठी’ – सत्यजित राय अभी सुबह के सवा नौ बजे हैं। मोहित सरकार ने गले में टाई का फंदा डाला ही था कि उस की पत्नी अरुणा कमरे में आई और बोली, ‘तुम्हारा फोन।’ ‘अब अभी Read more…

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कहानी: ‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद

‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। Read more…

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कहानी: ‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा

‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा बाईं आँख रह-रह कर फड़क रही थी। कई बार मला मगर कोई फायदा न हुआ। उसे याद आया कि माँ बाईं आँख फड़कने को कितना बुरा मानती थी। Read more…

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कहानी: ‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे- ”मैं विचार किया करता था कि मनुष्य सृष्टि का सबसे सुन्दर निर्माण है, किन्तु मेरा विचार भ्रामक सिद्ध हुआ। Read more…

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कहानी: ‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर

‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर मैं चुपचाप खड़ा सब देख रहा हूँ और अब न जाने क्यों मुझे मन में लग रहा है कि दीवानचंद की शवयात्रा में कम से कम मुझे तो शामिल Read more…

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कहानी: ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे

‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे 1. शहर का रंगमंडल सभागार दर्शकों से खचाखच भर चुका है। वे सभी देश के प्रख्यात नाट्य निर्देशक इरफान अहमद साहब का नाटक देखने आए हैं। इरफान Read more…

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कहानी: ‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय

‘अनुपमा का प्रेम’ – शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ग्यारह वर्ष की आयु से ही अनुपमा उपन्यास पढ़-पढ़कर मष्तिष्क को एकदम बिगाड़ बैठी थी। वह समझती थी, मनुष्य के हृदय में जितना प्रेम, जितनी माधुरी, जितनी शोभा, जितना Read more…

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कहानी: ‘ठण्डा गोश्त’ – सआदत हसन मंटो

‘ठण्डा गोश्त’ – सआदत हसन मंटो ईशरसिंह ज्यों ही होटल के कमरे में दाखिल हुआ, कुलवन्त कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज-तेज आँखों से उसकी तरफ घूरकर देखा और दरवाजे की चिटखनी बन्द कर Read more…

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कहानी: ‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद

‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद आर्द्रा नक्षत्र; आकाश में काले-काले बादलों की घुमड़, जिसमें देव-दुन्दुभी का गम्भीर घोष। प्राची के एक निरभ्र कोने से स्वर्ण-पुरुष झाँकने लगा था।-देखने लगा महाराज की सवारी। शैलमाला के अञ्चल में Read more…

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कहानी: ‘धुआँ’ – गुलज़ार

‘धुआँ’ – गुलज़ार बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में ‘धुआँ’ भर गया। चौधरी की मौत सुबह चार बजे हुई थी। सात बजे तक चौधराइन ने रो-धो कर Read more…

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कहानी: ‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी

‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी राइफल की बुलेट आड़ के लिए रखी हुई शिला पर से फिसलती हुई जसवंतसिंह के बाएँ कंधे में धँसी थी, मगर फिर भी काफी गहरी चोट लग Read more…

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कहानी: ‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई

‘लिहाफ’ – इस्मत चुग़ताई जब मैं जाड़ों में लिहाफ ओढ़ती हूँ तो पास की दीवार पर उसकी परछाई हाथी की तरह झूमती हुई मालूम होती है। और एकदम से मेरा दिमाग बीती हुई दुनिया के Read more…

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कहानी: ‘कुत्ते की पूँछ’ – यशपाल

‘कुत्ते की पूँछ‘ – यशपाल श्रीमती जी कई दिन से कह रही थीं- “उलटी बयार” फ़िल्म का बहुत चर्चा है, देख लेते तो अच्छा था। देख आने में ऐतराज़ न था परन्तु सिनेमा शुरू होने Read more…

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कहानी: ‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बंबूकार्टवालों की Read more…

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‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी

‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी ‘कला और साहित्य‘ से 1. उस दिन स्मरना पर ग्रीक लोगों का कब्ज़ा हो गया था और कमालपाशा टर्की के भाग्य की डोरी अपनी ज़िन्दगी और मौत से बाँधकर Read more…

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कहानी: ‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा

‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा ‘एल्प्स’ के सामने कारीडोर में अंग्रेजी-अमरीकी पत्रिकाओं की दुकान है। सीढ़ियों के नीचे जो बित्ते-भर की जगह खाली रहती है, वहीं पर आमने-सामने दो बेंचें बिछी हैं। इन बेंचों पर सेकंड Read more…

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कहानी: ‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो

‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो बंटवारे के दो-तीन साल बाद पकिस्तान और हिंदुस्तान की सरकारों को ख्याल आया कि साधारण कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए। यानी जो मुस्लमान पागल Read more…

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कहानी: ‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती

‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुंची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के परदे पर लालिमा फैलती जा रही थी। Read more…

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कहानी: ‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा

‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा उसने अपना सूटकेस दरवाजे के आगे रख दिया। घंटी का बटन दबाया और प्रतीक्षा करने लगा। मकान चुप था। कोई हलचल नहीं – एक क्षण के लिए भ्रम Read more…

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कहानी: ‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी

‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा Read more…

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कहानी: ‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री सन् १९१७ का दिसम्बर था। भयानक सर्दी थी। दिल्ली के दरीबे-मुहल्ले की एक तंग गली में एक अँधेरे और गन्दे मकान में तीन प्राणी थे। कोठरी के एक कोने में एक Read more…

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कहानी: ‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ रेवतीशंकर तथा पंडित कामताप्रसाद में बड़ी घनिष्ठ मित्रता थी। दोनों एक ही स्कूल तथा एक ही क्लास में वर्षों तक साथ-साथ पढ़े थे। बाबू रेवतीशंकर एक धनसम्पन्न व्यक्ति थे। उनके Read more…

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कहानी: ‘हार की जीत’ – सुदर्शन

‘हार की जीत’ – सुदर्शन माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद् – भजन से जो Read more…

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कहानी: ‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश

‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश इस घटना का संबंध पिताजी से है। मेरे सपने से है और शहर से भी है। शहर के प्रति जो एक जन्म-जात भय होता है, उससे भी है। पिताजी तब पचपन Read more…

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कहानी: ‘पिता’ – ज्ञानरंजन

‘पिता’ – ज्ञानरंजन उसने अपने बिस्तरे का अंदाज लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फर्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया, ‘आ गए’ और बच्चे की तरफ Read more…

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कहानी: ‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार

‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार बाजार में एक नई तरह की पाजेब चली है। पैरों में पड़कर वे बड़ी अच्छी मालूम होती हैं। उनकी कड़ियां आपस में लचक के साथ जुड़ी रहती हैं कि पाजेब का Read more…

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कहानी: ‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय

‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय दोपहर में उस सूने आँगन में पैर रखते हुए मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके वातावरण में कुछ ऐसा अकथ्य, अस्पृश्य, किन्तु Read more…

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कहानी: ‘बहादुर’ – अमरकांत

‘बहादुर’ – अमरकांत सहसा मैं काफी गम्भीर था, जैसा कि उस व्यक्ति को हो जाना चाहिए, जिस पर एक भारी दायित्व आ गया हो। वह सामने खड़ा था और आंखों को बुरी तरह मटका रहा था। Read more…

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कहानी: ‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी

‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी खाट की पाटी पर बैठा चाचा मंगलसेन हाथ में चिलम थामे सपने देख रहा था। उसने देखा कि वह समधियों के घर बैठा है और वीरजी की सगाई हो Read more…

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कहानी: ‘कर्मनाशा की हार’ – शिवप्रसाद सिंह

काले सांप का काटा आदमी बच सकता है, हलाहल ज़हर पीने वाले की मौत रुक सकती है, किंतु जिस पौधे को एक बार कर्मनाशा का पानी छू ले, वह फिर हरा नहीं हो सकता. कर्मनाशा Read more…

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कहानी: ‘पत्नी का पत्र’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘पत्नी का पत्र’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर श्रीचरणकमलेषु, आज हमारे विवाह को पंद्रह वर्ष हो गए, लेकिन अभी तक मैंने कभी तुमको चिट्ठी न लिखी। सदा तुम्हारे पास ही बनी रही – न जाने कितनी बातें Read more…

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मंटो की ‘एक प्रेम कहानी’

‘एक प्रेम कहानी’ – सआदत हसन मंटो मुझसे सम्बंधित आम लोगों को यह शिकायत है कि मैं प्रेम कहानी नहीं लिखता। मेरे अफ़सानों में चूंकि इश्क़ो-मुहब्बत की चाशनी नहीं होती इसलिए वो बिलकुल सपाट होते Read more…

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‘आजा फटाफट, चिल मारेंगे’ – प्रद्युम्न आर. चौरे

“रात सोने के लिए है।” यह एक जुमला है और यही सच भी क्योंकि मुद्दतों से फ़र्द इस जुमले की ताईद करते आए हैं। यह जुमला या यूँ कहूं कि नियम इंसान ने ही गढ़ा होगा Read more…

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कहानी: ‘सौत’ – प्रेमचंद

‘सौत’ – प्रेमचंद 1 जब रजिया के दो-तीन बच्चे होकर मर गये और उम्र ढल चली, तो रामू का प्रेम उससे कुछ कम होने लगा और दूसरे ब्याह की धुन सवार हुई। आये दिन रजिया Read more…

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कहानी: ‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद

‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी। गंगी से बोला- “यह कैसा पानी है? मारे बास के पिया नहीं जाता। गला सूखा जा रहा है Read more…

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कहानी: ‘ईदगाह’ – प्रेमचंद

‘ईदगाह’ – प्रेमचंद 1 रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब Read more…

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रानी पद्मावती/पद्मिनी की कहानी (जायसी की ‘पद्मावत’ का व्याख्यान)

संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ के कारण फिर से चर्चा में आयी रानी पद्मावती की कहानी, हिन्दी साहित्य के प्रेममार्गी शाखा के कवि मलिक मुहम्मद ‘जायसी’ के महान और चर्चित ग्रन्थ ‘पद्मावत’ में पायी Read more…

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फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पंचलाइट’ (पंचलैट)

अपने उपन्यासों और कहानियों में लोकजीवन को एक कविता के जैसे पेश करने वाले फणीश्वरनाथ रेणु के कहानी संग्रह ‘ठुमरी’ की यह कहानी बड़ी मजेदार है। एक गाँव में विभिन्न जातियों की विभिन्न टोलियाँ हैं। Read more…

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कहानी: ‘पूस की रात’ – प्रेमचंद

‘पूस की रात’ – प्रेमचंद 1 हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर Read more…

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