फ़ासले

ज़रा फ़ासलों से परेशान हूँ,
ना हो तुम मेरी तो थोड़ा हैरान हूँ,
तुम क़ाबा हो, मैं काशी हूँ,
तुम पैग़म्बर, मैं सन्यासी हूँ,
तुम जीवन, मैं आह्वान हूँ,
तुम क़ब्र, मैं श्म्शान हूँ
इस मोहब्बत का रुझान हूँ,
इस अधूरे इश्क़ की ज़ुबान हूँ,
मैं तुम्हारे ही दरमियान हूँ,
तुम स्याह रात की ख़ामोशी,
मैं उस रात से अनजान हूँ,
खोया हुआ सम्मान हूँ,
तेरे इश्क़ का मेहमान हूँ,
तुम शमा, मैं परवान हूँ,
शहर तुम, मैं वीरान हूँ,
बिन तुम, मैं मसान हूँ,
ज़रा फ़ासलों से परेशान हूँ।