कमला दास की पाँच कविताएँ

अंग्रेजी और मलयालम की प्रख्यात लेखिका कमला दास अपनी कविताओं के ज़रिए स्त्री विमर्श को आंदोलित करने के लिए जानी जाती हैं। आज अगर भारतीय महिलाओं से जुड़ी समस्याओं पर बातें होने लगीं हैं तो इसका श्रेय कमला दास जैसी सशक्त हस्तियों को भी जाता है, जिन्होंने अपने लेखन में बेकार की रूढ़ियों और रीति-रिवाजों पर जमकर प्रहार किया। उनका लेखन और जीवन दोनों हमेशा विवादों से घिरे रहे और जब उनकी आत्मकथा ‘माय स्टोरी’ बाज़ार में आयी तो साहित्य समाज में हलचल पैदा हो गयी।

किसी की परवाह किये बिना अपनी बात बेबाकी से कह देने वाली कमला दास (माधवी कुट्टी) की सालगिरह पर पढ़िए उनकी पाँच कविताएँ!

प्यार

तुम्हें पाने तक
मैंनें कविताएँ लिखीं, तस्वीरें बनाईं,
और, दोस्तों के साथ गई बाहर
सैर के लिए….

और अब
मैं तुम्हें प्यार करती हूँ
एक बूढ़े पालतू कुत्ते की मानिन्द लिपटा
मेरा जीवन बसा है,
तुम में…

कीड़े

अशोक कुमार पाण्डेय द्वारा अनूदित

साँझ ढले, नदी के तट पर
कृष्ण ने आख़िरी बार उसे प्रेम किया
और चले गए फिर उसे छोड़कर

उस रात अपने पति की बाँहों में
ऐसी निष्चेष्ट पड़ी थी राधा
कि जब उसने पूछा
‘क्या परेशानी है?
क्या बुरा लग रहा है तुम्हें मेरा चूमना, मेरा प्रेम’

तो उसने कहा
‘नहीं.. बिल्कुल नहीं’

लेकिन सोचा —
‘क्या फ़र्क पड़ता है किसी लाश को
किसी कीड़े के काटने से!

खिड़की का शोक

ऐसा हमेशा से होता रहा है
यह किसकी दुनिया है, जो मेरी नहीं
मेरा पुरुष, मेरे बच्चे, बस यही धुरी
मैं कहाँ, माँ और पत्नी के बीच
पहना दिया गया है उनकी आंखों पर चश्मा..

आईना

शायक आलोक द्वारा अनूदित

आसान है एक मर्द की तलाश जो तुम्हें प्यार करे
बस, तुम ईमानदार रहो कि एक औरत के रूप में तुम चाहती क्या हो
आईने के सामने उसके साथ नग्न खड़ी हो
ताकि वह देख सके कि वह है तुमसे ज़्यादा मजबूत
और इस पर भरोसा करे
और तुम और ज्यादा कोमल जवान प्यारी दिखो
स्वीकृति दो अपनी प्रशंसा को।

उसके अंगों की पूर्णता पर ध्यान दो
झरने के नीचे लाल होती उसकी आँखें
बाथरूम की फ़र्श पर वही शर्माती चाल
तौलिये को गिराना, और उसका हिला कर पेशाब करने का तरीका
उन सभी बातों का प्रशंसनीय ब्यौरा जो उसे मर्द बनाती है
तुम्हारा इकलौता मर्द।

उसे सब सौंप दो
वह सब सौंप दो जो तुम्हें औरत बनाती है
बड़े बालों की ख़ुशबू
स्तनों के बीच पसीने की कस्तूरी
तुम्हारी माहवारी के लहू की गर्म झनझनाहट
और तुम्हारी वे सब स्त्री भूख।

हाँ, आसान है एक मर्द पाना जिसे तुम प्यार कर सको
लेकिन उसके बाद उसके बिना रहने का सामना करना पड़ सकता है।

ज़िन्दगी के बिना ज़िन्दा रहना
जब तुम आसपास घूमती हो
अजनबियों से मिलती हो
उन आँखों के साथ जिन्होंने अपनी तलाश छोड़ दी है
कान जो बस उसकी अन्तिम आवाज़ सुनते हैं कि वह पुकारता है तुम्हारा नाम
और तुम्हारी देह जो कभी उसके स्पर्श से चमकते पीतल-सा जगमगाती थी
जो अब फीकी और बेसहारा है।

अन्नामलाई कविताओं से

मुझे नहीं दरकार छलनामय घरेलू सुखों,
गुड-नाइट चुंबनों या साप्ताहिक खतों की
जो, ‘माय डियरेस्ट’ संबोधन से शुरू होते हैं
उन वैवाहिक कस्मों का खोखलापन
और डबलबैड का अकेलापन भी मैं जन चुकी हूं,
जिस पर लेटा मेरा संगी स्वप्न देखता है किसी और का
जो उसकी बीबी से कहीं बड़ी छिनाल है..


Posham Pa

भाषाओं को भावनाओं को आपस में खेलना पोषम-पा चाहिए खेलती हैं चिड़िया-उड़..।

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