फ़्रेंज़ काफ़्का – कुछ पंक्तियाँ/उद्धरण

(अनुवाद: पुनीत कुसुम)

“मैं एक पिंजरा हूँ, खोज में एक पक्षी की।”

“एकांत स्वयं को जानने का एक ज़रिया है।”

“तुम एक ही समय में मेरे हृदय की शांति और भ्रांति दोनों हो।”

“रास्ते चलने से बनते हैं।”

“कुछ किताबें स्वयं अपने ही घर के अपरिचित कमरों की चाभी जैसी लगती हैं।”

“सभी भाषाएँ और कुछ नहीं बस खराब अनुवाद हैं।”

“कोई भी जो सुंदरता को पहचानने की क्षमता बचाए रखेगा, कभी बूढ़ा नहीं होगा।”

“कृपया – मुझे एक सपना मानो।”

“लिखना प्रार्थना का एक रूप है।”

“मैं कभी आसानी से परिभाषित नहीं होना चाहता।”

“तुम स्वतंत्र होना चुन सकते हो, लेकिन यह तुम्हारे द्वारा लिया गया अंतिम निर्णय होगा।”

“कुछ भी उतना भ्रामक नहीं है, जितना कि एक फोटोग्राफ।”

“मुझे मार दो, अन्यथा तुम एक हत्यारे हो।”

“दुनिया के खिलाफ आदमी के संघर्ष में, दाँव दुनिया पर लगाओ।”

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चित्र श्रेय: deviantart.com/chricko/