‘जेठ’ पर हाइकु

‘जेठ’ पर हाइकु

जेठ (ज्येष्ठ) हिन्दू पंचांग के अनुसार साल का तीसरा महीना होता है और इस माह को गर्मी का महीना भी कहा जाता है। आई. आई. टी. रुड़की में कार्यरत रमाकांत जी ने हमें इसी हिन्दी महीने पर उनके स्वर्गीय पिता और वरिष्ठ हाइकुकार राधे श्याम जी द्वारा लिखे गए कुछ हाइकु भेजे हैं जो आज यहाँ प्रस्तुत हैं! इन सभी हाइकुओं में जेठ की गर्मी में उभरे गाँव-मोहल्ले के विभिन्न दृश्य दिखाई देते हैं, जिन्हें राधे श्याम जी ने बड़े ही कलात्मक ढंग से हाइकु में बाँध दिया है। यहाँ यह भी ध्यान रखा जाए कि ‘जेठ’ शब्द का एक और अर्थ होता है और वह है ‘पति का बड़ा भाई’। कुछ हाइकुओं में इन दोनों अर्थों का प्रयोग बड़े ही मजेदार ढंग से किया गया है, जो पढ़ते ही बनता है।

जेठ के घर
सूर्य करे गुजर
धूप प्रखर

जेठ मनाई
लू ताप की सगाई
धूल उड़ाई

जेठ जो आते
पानी पी न अघाते
पीते ही जाते

जेठ की मसकी
हाय चोली धरा की
छूते दरकी

जेठ ने दला
तो हिमालय गला
दिल पिघला

जेठ की माया
सिन्धु ऐसा तपाया
उबाल खाया

जेठ के ताप
पानी उड़ा हो भाप
यूँ चुपचाप

जेठ की भूख
ताल मिटाई सूख
झुलसे रूख

जेठ के मारे
कीट त्राहि पुकारे
फिरत मारे

जेठ तपाया
मृग तृष्णा की माया
मरू फंसाया

जेठ ही हारा
देख गंगा की धारा
जल अपारा

ग्रीष्म में ओले
जेठ का दम तोले
धरा न बोले

पसीना बहे
जेठ चोलिका दहे
नायिका सहे

गर्मी के मारे
ज्यों ही पट उतारे
जेठ पधारे

■■■

चित्र श्रेय: श्री राधे श्याम

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