अप्रत्यक्ष कविता

‘Hidden Poem’ – Naomi Shihab Nye
अनुवाद: पुनीत कुसुम

यदि फ़र्न के पौधे को तुम रख दो
एक पत्थर के नीचे
अगले दिन वह हो जाएगा
लगभग ग़ायब
ऐसे जैसे पत्थर ने उसे
निगल लिया हो

यदि तुमने दबा रखा हो किसी प्रिय का नाम
अपनी ज़बान के नीचे एक अरसे से
बिना बोले
तो वह बन जाता है खून
हा!
वो हलकी खींची साँस
छुपती हर जगह
तुम्हारे शब्दों के तले

कोई नहीं देख पाता
तुम्हें पोसते उस ईंधन को!