होड़

होड़ में रहने वाले
होड़ में रह जाते हैं

होड़ के अन्दर, तपकर
होकर ऊर्जावान
लगाते हैं छलांग
एक होड़ से दूसरी होड़ में

और करते हैं प्रेरित,
सोचने को
होड़ से बाहर

दोहराते हैं उदाहरण
उनके, जिन्होंने
होड़ से निकलकर, बनायी
एक नयी होड़

जो उस होड़ में हैं
जो होड़ बनाती है

और इन सबका भार उठाए पृथ्वी,
जो बाहर है
दुर्गम, निर्जीव ग्रहों की होड़ से
पर घूमती है
घूमने की होड़ में
सूरज के चारों ओर

सूरज, अपना तारा
जो एक दिन
अपनी गर्मी खोकर
लेगा समेट
सब कुछ अपने अन्दर
और सब कुछ होगा शान्त और शीतल
जैसा होता है
होड़ के बाहर!