हम कितने विपरीत

मैं ताप तुम शीतलता
मैं शौर्य तुम प्रज्ञा
मैं द्रोही तुम मीत
हम कितने विपरीत

मैं अधीर तुम गंभीर
मैं अग्नि तुम समीर
मैं नवाचार तुम रीत
हम कितने विपरीत

मैं भटकाव तुम राह
मैं तृष्णा तुम चाह
मैं संगीत तुम गीत
हम कितने विपरीत

मैं स्वर तुम व्यंजन
मैं रंग तुम रंजन
मैं पुरुष अहम तुम नेह नीत
हम कितने विपरीत ।

ये विपरीतता सर्वश्रेष्ठ युगल है
नहीं क्षीण पर योग प्रबल है
मानो ये है अमर प्रीत
हम कितने विपरीत ।