इस बार’ – कुमार अम्बुज

एक किताब खरीदी जाएगी कविताओं की
और एक फ्रॉक बिटिया के लिए

छेदों वाली साड़ी
माँ की दिनचर्या से अलग हो जाएगी
एक बिन्दी का पत्ता चुन कर खरीदने का वक़्त होगा
बाहर की खिड़की के लिए पर्दे के कपड़ा
और अचार के लिए
खरीदा जाएगा थोड़ा-सा आँवला
उस पीले फूल के गुलदस्ते का भाव तय करते हुए
एक कॉफी पी जाएगी फुरसत के साथ

बर्फ ज़्यादा नहीं गिरेगी
हवा का गुस्सा कम होगा इस बार
चेहरों का पीलापन मरेगा
और हम
एक-दूसरे को देख कर सचमुच खिल उठेंगे

हाँ, यह सब होना है
इस बार के ऐरिअर्स पर..।

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Kumar Ambuj - Pratinidhi Kavitaaein

 

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