इश्क़ में ठहर जाना

इश्क़ गुज़र जाने का नाम नहीं

ये जानता है सदियों तक
ठहर जाना
जहाँ छूटा था उनका हाथ,
उसका शग़ल नहीं ये
जिसने सीखा नहीं
कच्चे घड़े संग
डूब जाना,
सुना है
जिस दरिया में
सोहनी डूबी थी
वहाँ उठते हैं
बुलबुले अब भी
वहीं रेतों पर बिखरे हैं
दो पांवों के
निशाँ अब भी…