‘इज़्ज़त बरक़रार रहती है!’ – शिवांगी गोयल

उसने मुझसे कहा कि मैं तुमसे ‘प्रेम’ करता हूँ
ये भी कहा कि मैं अपनी पत्नी की ‘इज़्ज़त’ करता हूँ
जब उसके शरीर से बह रहा ख़ून नहीं रुकता है
और वो मेरे शरीर से कस के लिपट जाती है
तो उसे रोता देख मैं भी रो पड़ता हूँ..
और मैंने सोचा कि पति को इतना ही हस्सास होना चाहिए

उसने मुझसे फिर कहा मैं तुमसे ‘प्रेम’ करता हूँ
पर मैं अपनी पत्नी की ‘इज़्ज़त’ करता हूँ
और उसे अब ज़्यादा ख़फ़ा नहीं कर सकता
मैंने उससे वादा किया है कि अब तुमसे बात नहीं होगी..
मैंने सोचा कि पति को इतना ही वफ़ादार होना चाहिए

उसने मेरी दोस्त से कहा मैं तुम्हारी खूबसूरती से ‘प्रेम’ करता हूँ
पर उसे नहीं बताया कि एक पत्नी है जिसकी ‘इज़्ज़त’ करता हूँ
मैंने सोचा कि पति को ऐसा ही होना चाहिए
जो अपनी पत्नी की इज़्ज़त करे..
क्योंकि प्रेम मर सकता है, इज़्ज़त बरक़रार रहती है!

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(यह नज़्म/कविता हैरी अटवाल और तसनीफ़ हैदर द्वारा सम्पादित किताब ‘रौशनियाँ’ से है, जो हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की बीस समकालीन शायरों की कविताओं/नज़्मों का संकलन है। 7 जुलाई 2018 को इस किताब का विमोचन है, जिसकी डिटेल्स यहाँ देखी जा सकती हैं!)