काग़ज़ की नाव सा

चाहता हूँ ख़्वाहिशों की गुरुत्वाकर्षण शक्ति
ताउम्र कम ही रहे
इतनी कम कि ज़िन्दगी मुझे अपनी ओर खींच
रही हो
तब मैं चला न जाऊँ ख़्वाहिशों की ओर
जो झूठी है, बनावटी है
दुनिया के अनुरूप है
जिसमें मेरे लिए कुछ भी नहीं
ज़िन्दगी का खिंचाव
सत्यों का खिंचाव है
जहाँ हार का ग़म नहीं
जीत की खास खुशी नहीं
यहाँ अनंत हारे हैं
अनंत जीते हैं
हम सबकुछ हारे भी नहीं है
हम सबकुछ जीत भी नहीं सकते

मैं चाहता हूँ हर प्रतियोगिता से भाग जाना
इन प्रतियोगिताओं में मेरे लिए कुछ भी नहीं है

मेरा ईश्वर, मेरी श्रद्धा
मेरी आस्था, मेरा सबकुछ
तुम सबसे अलग है

मेरी ज़िंदगी बस उतनी ही है
जितनी बारिश में तैरती हुई नाव की है
मैं काग़ज़ की एक नाव हूँ
जो दुनिया के फाड़े जाने के डर से
निरन्तर बहती रहती है
एक निश्चित समय के बाद
वो घुल जाती है पानी में
वो अदृश्य हो जाती है
मैं भी चाहता हूँ अदृश्य होना
पानी में, काग़ज़ की नाव-सा।