कक्षा आठ और कॉपी

तुमको याद तो होगा हम स्कूल में साथ पढ़ते थे
तुम जब क्लास में बैठी रहती तो मैं तुम्हें देखता रहता।
फिर जब तुम देख लेती तो मैं नज़रें हटा लेता।
तुमको याद तो है न?
कहीं तुम भूल तो नहीं गयी बचपन के उन दिनों को?
अच्छा बताओ,
तुमको वो बात याद है
जब तुमको कॉपी चाहिए होती थी,
तो तुम मांगने से शर्माती थी
फिर तुम अपनी सहेली को भेजती थी कॉपी लेने,
और फिर चुपके से देखती थी कॉपी को,
कॉपी के बहाने मुझको
जब टीचर कुछ बाँटने के लिए तुमसे कहती ,
तुम मेरा नाम लेने पर थोड़ा असहज हो जाती,
फिर शर्मा जाती
बड़ी शर्मीली थी तुम
तुम्हारा वो शर्माता हुआ चेहरा सोचकर मैं आज भी मुस्कुरा देता हूँ।
मेरी वो बचपन वाली मुस्कान आज भी वैसी ही है
तुम्हारी भी नहीं बदली है न?
अब शायद हमारी हंसी का मिलन न हो
पर ये हंसी, ये यादें
कभी मिटेंगी नहीं…