कश्मीर के बच्चे के नाम

वो खेलता गर्मियों में यहाँ
घास के दूर तक फ़ैले मैदान में
सर्दियों में वो बनाता बर्फ़ के गोले
और उछाल देता सूरज की ओर

माँ की काँगड़ी के लिए दहकता कोयला
और खेत से लौटे पिता को देता कहवा

वो शर्त लगाता कि मुट्ठी में दबाकर
फोड़ सकता है अख़रोट
एक दिन जाता नौकरी पर
और इस बार छत नहीं टपकती घर की

ऐसा और कितना कुछ हो सकता था सुन्दर
अगर मोर्टार के निशाने से बच जाता वो बच्चा
युद्ध में लोग ही नहीं मरते
मरते हैं अनगिन सपने!!