मेरी भाषा का व्याकरण
पाणिनि नहीं
पददलित ही जानते हैं
क्योंकि वे ही मेरे दर्द को
पहचानते हैं

मेरी कविता का कमल
बगीचे के जलाशयों में नहीं
झुग्गी-झोपड़ियों के कीचड़ में खिलेगा
मेरी कविता का अर्थ
उत्तर पुस्तिकाओं में नहीं
फुटपाथों पर मिलेगा!

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