कविता: ‘कोशिश’ – इन्दु जैन

एक चीख लिखनी थी
एक बच्चे की चीख
अरबी में, तुर्की में,
यिद्दिश में, यैंकीस्तानी में
असमिया, हिन्दी, गुरमुखी में

चिथड़े उड़े बाप और
ऐंठी पड़ी माँ
के बीच उठी
बच्चे की चीख – सिर्फ एक चीख

आज अकेले में कोशिश करना
लिखना
बच्चे की चीख – बस एक
अपनी अपनी मादरी जबान में

कल हम कहीं न कहीं इकठ्ठा होंगे
झुलसे हुए हाथ मिलाने..

■■■

चित्र श्रेय: _Javarts_


Posham Pa

भाषाओं को भावनाओं को आपस में खेलना पोषम-पा चाहिए खेलती हैं चिड़िया-उड़..।

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