1
प्रिये,
माफ़ करना यह
कि कभी दुलार से नहीं पुकारा तुझे।
बहुत व्यस्त मैं आज
अपने दोनों के अनेक मिलनों की कथा लिखने में।

2
सब्र करना, सखि आज ज़रा;
यदि कोई पत्र न भेज सकूँ मैं,
सखि,
हमारे प्रणय के गीत रचने में

3
हूँ पूरा तल्लीन।
सहना प्रिय, ज़िन्दगी में
नहीं पाया प्रणयामृत पूरा।
कवि मैं,
सुधा की प्याऊ पीछे छोड़ जाने के लिए
जीवन में जूझता।

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