“चार महीने जिम जाकर ये अदरक जैसी बॉडी बनायी तुमने?”

“तुम चाय जैसी क्यों होती जा रही हो?”

“चाय जैसी? मतलब? देखो  रेसिस्ट कॉमेंट किया तो अभी ब्रेक-अप हो जाएगा”

“अरे बाबा! मतलब हर वक़्त तुम्हारी तलब लगी रहती है”

“और, सर्दियों में अदरक बिना चाय अच्छी भी तो नहीं लगती..”


Shiva

अपने बारे में बताने को कुछ आकर्षक सा हो, इसका तो अभी इंतज़ार ही है।
एक परंपरागत भारतीय लड़की की छवि से ज़्यादा दूर नहीं हूँ। समाज की अनेक बातों से बेचैन, खुद को लेकर बहुत असुरक्षित, दिन में सपने देखती और रात में घर की छत को तकती रहती एक आम लड़की। हर तरह की किताबों से बहुत प्यार करती हूँ, तरह तरह से उन्हें अलमारी में सजाया करती हूँ, और एक ‘विश’ माँगने को बोला जाए तो यही चाहूँगी की हज़ारों किताबों का निचोड़ दिमाग़ में समा जाए।
अपनी असुरक्षाओं से लड़ने के लिए कुछ कुछ लिख लेती हूँ, और लोगों की सच्ची-झूठी तारीफों में सुकून पा लेती हूँ।
लिखने- पढ़ने के अलावा संगीत एक और ऐसी चीज़ है जो मैं कस के अपने पास रखे रहना चाहती हूँ।

2 Comments

  • Shilpa · September 19, 2017 at 2:08 pm

    Brilliant thoughts

      Shiva · September 19, 2017 at 10:54 pm

      Shukriya Shilpa 🙂 Keep reading!

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