किसे जीने का तरीका आता है यहाँ
या सब मशगूल है मरने में,
तबियत एक की पूछो तो;
सब के सब बीमार से दिखने लगते हैं
मैं तोहमतें नही लगाऊंगा
न हवाओं पे, न ही पेड़ पे
न इसके परों पे, न ही परवाज़ पे
आसमान ने उकसाया था इसको
और ज़मीं ने दख़ल दिया;
इसे जन्नत का अरमान नहीं था
पर ये काफिर भी नहीं था
ये परिंदा नहीं मरा,
इसके घोंसले ने दम तोड़ दिया है;
मौत हमेशा बेहतर होती है,
मरने के एवज़ में।