गगन गिल कृत ‘अँधेरे में बुद्ध’

nayi kitaab - andhere mein buddha - gagan gill

विवरण: गगन गिल का समूचा रचना-संसार धीरे-धीरे बुना गया एक ऐसा प्रशान्त संसार है जिसमें कई तरह के उत्तप्त विकल्प दीख तो पड़ते हैं लेकिन उनमें से किसी एक को चुना जा सकना सम्भव नहीं। उनकी कविताएँ जैसे अस्तित्व के अनिवार्य अन्तर्विरोधों के बीच एक खुले अवकाश में जीने के दुःख को चुपचाप बटोरती कविताएँ हैं। अस्तित्व के अध्यात्म को इस या उस दर्शन के बगैर अपनी करुण व्यंजनाओं में टटोलती यह कृति भारतीय कविता की उस परम्परा से नया सम्बन्ध रचती है जिसे समकालीनता के आतंक में बरसों से भूलने की कोशिश की जाती रही है। -राजेन्द्र मिश्र

गगन गिल के काव्य-मानस की बनावट इस कदर प्रगीतात्मक है या अनुभव ही इतना सांघातिक है कि कवि अनुभूति को कुछ दूरी से देखने की बजाय, उससे भर ही नहीं, उसमें घिर भी जाता है। अनुभूति की यह सघनता और तीव्रता जिद की दीवार भेद या थकान का रेतीला विस्तार लाँघकर जितना और जिस रूप में अनुभूति को बाहर सतह पर ला पाती है, उसी से कविता का रूपाकार बनता है। – ललित कार्तिकेय

  • Format: Hardcover
  • Publisher: Vani Prakashan (2018)
  • ISBN-10: 9387889548
  • ISBN-13: 978-9387889545

इस किताब को खरीदने के लिए ‘अँधेरे में बुद्ध’ पर या नीचे दी गयी इमेज पर क्लिक करें!

nayi kitaab - andhere mein buddha - gagan gill

Random Posts:

Recent Posts

रुत

रुत

दिल का सामान उठाओ जान को नीलाम करो और चलो दर्द का चाँद सर-ए-शाम निकल आएगा क्या मुदावा है चलो…

Read more
आदत

आदत

कविता संग्रह 'लौटा है विजेता' से मरदों ने घर को लौटने का पर्याय बना लिया और लौटने को मर जाने…

Read more
नतीजा

नतीजा

पुरबी दी के सामने उद्विग्‍न भाव से रूमा ने 'होम' की बच्चियों की छमाही परीक्षा के कार्ड सरका दिए। नतीजे…

Read more

Featured Posts

मैं पाँचवे का दोषी हूँ

मैं पाँचवे का दोषी हूँ

'मैं पाँचवे का दोषी हूँ' - विशेष चन्द्र 'नमन' शाम के लिए पिघली है धूप लौटा है सूरज किसी गह्वर…

Read more
सा रे गा मा ‘पा’किस्तान

सा रे गा मा ‘पा’किस्तान

सा रे गा मा 'पा'किस्तान - शिवा सामवेद से जन्मे सुरों को लौटा दो हिन्दुस्तान को और कह दो पाकिस्तान से…

Read more
प्यार मत करना

प्यार मत करना

'प्यार मत करना' - कुशाग्र अद्वैत जिस शहर में पुश्तैनी मकान हो बाप की दुकान हो गुज़रा हो बचपन हुए…

Read more

Leave a Reply

Close Menu
error: