राकेश कायस्थ कृत ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’

nayi kitaab prajatantra ke pakaude

विवरण: नोएडा में एक पकौड़ेवाला था— रामभरोसे। देश की तरह उसकी जिंदगी भी रामभरोसे ही थी। एक दिन किस्मत ने पलटा खाया और एक महापुरुष के दर्शन ने रामभरोसे को रातों-रात युगपुरुष बना दिया। भारत में पकौड़ा क्रांति हो गई और फिर वो दिन भी आया जब रामभरोसे इस देश का प्रधानमंत्री बन गया। चाय से पकौड़े तक समय का एक चक्र पूरा हुआ। ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’ एक ऐसी अनोखी फैंटेसी है जिसकी कोई और मिसाल ढूंढना मुश्किल है। रामभरोसे का सफर इतना दिलचस्प है कि पढ़ना शुरू करने के बाद इसे बीच में छोड़ पाना नामुमकिन है। किताब आपको शुरू से आखिर तक गुदगुदाती है लेकिन बहुत गहराई से सोचने को मजबूर भी करती है।

कृशन चंदर के बाद लगभग खत्म हो चुकी हिंदी-उर्दू की फैंटेसी परंपरा को जिंदा करती यह किताब शुरू से अंत तक आपको चमत्कृत करती है। इसकी भाषा कहीं चुभती है तो कहीं गुदगुदाती है। किताब के कॉमिक सिचुएशन आपको लगातार लाफ्टर का इंजेक्शन लगाते हैं।किताब सम-सामयिक है लेकिन व्यंग्यात्मक शैली की गई किस्सागोई इसे समय की सीमाओं से परे ले जाती है।

  • Format: Kindle Edition
  • File Size: 1021 KB
  • Print Length: 184 pages
  • Publisher: Kissago; 1 edition (12 April 2018)
  • Sold by: Amazon Asia-Pacific Holdings Private Limited
  • Language: Hindi

इस किताब को खरीदने के लिए ‘प्रजातंत्र के पकौड़े’ पर या नीचे दी गयी इमेज पर क्लिक करें!

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