nayi kitaab - samane se mere - chandreshwar

विवरण: चंद्रेश्वर प्रतिरोध और प्रेम के समकालीन कवि हैं। पढ़ने में उनकी कविताएँ जितनी सरल हैं, लिखने में उतनी ही कठिन। वे अदृश्य विडम्बनाओं को सहज ही दृश्यमान कर देने की कला में माहिर हैं। उनकी कविताओं में निहित सूक्ष्म व्यंग्य चूंकि ऊपर से दिखाई तक नहीं देता, इसलिए गहरी मार करता है। आत्मीय संवाद करती उनकी कविताएँ कब आपको अपना दोस्त बना कर आपके कंधों पर सवार हो जाएंगी, आप जान ही नहीं पाएंगे। सीधी-सादी मगर मर्मभरी पंक्तियों के ज़रिए कवि न केवल कविता के वर्तमान परिदृश्य पर टिप्पणी करते हैं, जिनमें सायास जटिलता और महानता ओढ़े कविताओं की भरमार है, बल्कि इस कठिन समय का सौन्दर्यशास्त्र भी गढ़ते हैं। यहाँ सबसे कठिन, दुर्गम, अभेद्य और उलझी हुई चीज़ें धूर्तता और धोखे से भरी हुई हैं। इस धोखे को समझ लेना और उजागर कर देना ही जीवन का सबसे बड़ा सौन्दर्य है। लेकिन यही सबसे कठिन काम भी है।

चंद्रेश्वर के यहाँ सरलता प्रतिरोध का सौन्दर्यशास्त्र है। सरल-सहज होना ही प्रतिरोध है। ठीक उस बच्चे की तरह जो राजा को नंगा देखकर औरों की तरह उसके भव्य परिधान की झूठी प्रशंसा नहीं कर सकता। जो सहज ही कह उठता है कि राजा तो नंगा है। यों वह अनायास ही राजा के कठिन छद्म को तार-तार कर देता है। संयोग से चंद्रेश्वर ने ‘राजा जी’ के इर्द-गिर्द कई कविताएँ लिखी हैं। ये कविताएँ लोकतंत्र के भीतर किसी निरंकुश राजा के उदय को फासीवाद के उभार के रूप में व्यंग्य-चित्रित करती हैं। ये कविताएँ राजा के बहाने फासीवाद की भयानक शक्ल भी दिखाती हैं और उसके खोखलेपन का भरपूर मज़ाक भी उड़ाती हैं। – डॉ. आशुतोष कुमार

  • Format: Paperback
  • Publisher: Rashmi prakashan pvt. ltd. (2017)
  • ISBN-10: 8193557530
  • ISBN-13: 978-8193557532

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