कुमार विनोद कृत ‘एकरंगा’

विवरण:

आप जो लोग यहाँ पहले से मौजूद हैं…

मैं दाख़िल होने की इजाज़त चाहता हूँ आप सब की रचाई बसाई दुनिया में- एक प्रेम के साथ। कविताओं में इसे इसके ढाई अक्षरों के साथ पुकारने के साहस के साथ। हाँ, साहस ही तो है आज के दौर में प्रेम को प्रेम के नाम से पुकारना। नजर उठाता हूँ तो यही देखता हूँ चारों तरफ- अखबार से लेकर टीवी पर आ रही खबरों में। अपने आस पड़ोस में।

हजार कोस दूर छोड़ आए गांव से आई किसी किसी कॉल में- कोई पेड़ पर टांग दिया गया। किसी की पीट पीट कर हत्या कर दी गई। किसी को चौराहे पर नंगा कर घुमाया। किसी को जाति से बाहर किया जाता है। कोई गांव छोड़ गया और कोई… वो क्या कहते हैं- ऑनर किलिंग, जो ख़बरों की भाषा में एक अजीब सी दलील के साथ हॉरर किलिंग कर दी गई। कत्ल तो ऑनर के नाम पर ही होता है। अपने गोत्र-खानदान की इज़्ज़त तुमने देखी नहीं और प्रेम करने की हिम्मत कर ली?

नई बात नहीं है ये, और ना ही इसका जानलेवा होना। हाँ, प्रेम करना इस न्यू इंडिया में नए सिरे से खतरनाक हो चुका है। इसकी छवि ही कुछ ऐसी गढ़ दी गई है…

एकरंगा उसी छवि के खिलाफ एक आवाज़ है- प्रेम के साथ। चाहूँगा कि ये पढ़ा जाए…

  • Paperback: 150 pages
  • Publisher: Yash Publishers
  • Language: Hindi
  • ISBN-10: 938113085X
  • ISBN-13: 978-9381130858

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Ekranga


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