निराशा

निराशा भाव मात्र नहीं है,
निराशा एक पूरा ब्रह्मांड है
लेकिन
ब्रह्मांड के गुण के विपरीत जाकर
निराशा ने धरा हुआ है गुरुत्वाकर्षण
जो तुम्हारे सूखे कंठ से बहेगा सिगरेट के घुएं से भरे फेफड़ों तक,
एक सिरे से पत्थर होते तुम्हारे दिमाग़ तक,
ये नहीं छोड़ेगा तुम्हारे कमरे, बरामदे, बरतन और गमलों को,
ये लील जाएगा तुम्हारे किताबों की अलमारी,
चौंकना मत!
किताबें तुम्हें बचा सकती थी
अगर इतनी देर न हुई होती,
अगर तुम्हारे शरीर के हिस्से
जहां-तहां से बर्फ़ के सिल्लों में नहीं हो रहे होते तब्दील,
तुम्हें तब ही समझ जाना चाहिये था
जब तुमने कमरा बन्द कर चिल्लाते हुए
पहली बार फाड़ी थी अपनी पसंदीदा किताब,
जब पहली बार तुमने तोड़ फेंका था अपना कमाया पहला मैडल,
जब तुमने आत्महत्या से बचने के लिए लिखी थी आत्महत्या पर कविताएं…
निराशा को तुम्हारी जरूरत है,
क्योंकि तुमने बिना झुठलाए
पूरी श्रद्धा से उसे निभाया है…

घरवालों को दी हुई चिंताएं,
प्रेमिका को दिया गया दुख,
दोस्तों को दिया गया धोखा,
अपने मन को पिलाया गया जहर,
सबकुछ लेकर आ जाओ
इस ब्रह्मांड में तुम्हारे भी नाम का एक सौरमण्ड होना चाहिए…