कविताएँ: ओरहान वेली
अनुवाद: देवेश पथ सारिया

मेरी पूर्व पत्नी

हर रात तुम मेरे सपनों में आती हो
हर रात मैं तुम्हें साटन की सफ़ेद चादर पर देखता हूँ
हर रात शैतान मुझे तुम्हारे पास सुला देता है

तुम्हें मालूम है क्यों

क्योंकि हे मेरी स्त्री, मैं अब भी तुमसे प्यार करता हूँ
हालाँकि तुम छोड़ चुकी हो मुझे
तुम एक बेहद विशेष औरत हो
तुम जैसी ढूँढ पाना बहुत मुश्किल है।

ख़ुशनुमा मौसम

वसंत के सुंदर दिनों ने तबाह कर दी मेरी ज़िन्दगी
क्षीण हो गए मेरे सारे गुण
अपनी पहली सिगरेट मैंने वसंत में सुलगायी
मुझे प्रेम हुआ वसंत में
वसंत के एक दिन मैं रोटी और मक्खन घर लाना भूल गया
और यह वसंत का ही एक दिन था जब मैंंने कविताएँ लिखने की शुरुआत की
वसंत के इस ख़ुशनुमा मौसम ने मेरी पूरी ज़िन्दगी तबाह कर दी…

तुर्किश कवि ओरहान वेली की ये कविताएँ poemhunter.com वेबसाइट से ली गई हैं। इनका हिन्दी अनुवाद देवेश पथ सारिया ने किया है जो कि रवि कोपरा के अंग्रेज़ी अनुवाद पर आधारित है।
ओरहान वेली की कविता 'मैं समझा नहीं सकता'

Book by Orhan Veli:

देवेश पथ सारिया
हिन्दी कवि-गद्यकार एवं अनुवादक। पुरस्कार : भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार (2023), स्नेहमयी चौधरी सम्मान (2025)। प्रकाशित पुस्तकें : नूह की नाव (कविता संग्रह); स्टिंकी टोफू (कहानी संग्रह); छोटी आँखों की पुतलियों में (कथेतर गद्य); हक़ीक़त के बीच दरार, यातना शिविर में साथिनें (अनुवाद)। संपादन : गोल चक्कर वेब पत्रिका।