रुत

दिल का सामान उठाओ जान को नीलाम करो और चलो दर्द का चाँद सर-ए-शाम निकल आएगा क्या मुदावा है चलो…

आदत

कविता संग्रह 'लौटा है विजेता' से मरदों ने घर को लौटने का पर्याय बना लिया और लौटने को मर जाने…

चिरश्री

अभी तो हुई थी हमारी मुलाक़ात पिछली रात विजय इंटरनेशनल के भीतरी प्रांगण में कोणार्क से कानों-कान आयी छोटी-सी ख़बर…

यतीम औलादें

मैं कुछ यतीम बच्चों को जानती हूँ जिनके वालिदैन ज़िंदा हैं, उनके साथ रहते हैं पर वो शजर नहीं बन…

प्यास

दूर से चल के आया था मैं नंगे पाँव नंगे सर सर में गर्द ज़बाँ में काँटे पाँव में छाले…

क्षमा-याचना

1 प्रिये, माफ़ करना यह कि कभी दुलार से नहीं पुकारा तुझे। बहुत व्यस्त मैं आज अपने दोनों के अनेक…

नन्ही पुजारन

'नन्ही पुजारन' - मजाज़ लखनवी इक नन्ही मुन्नी सी पुजारन पतली बाँहें पतली गर्दन भोर भए मंदिर आई है आई…

नीरज के दोहे

गोपालदास 'नीरज' के दोहे हम तो बस इक पेड़ हैं खड़े प्रेम के गाँव खुद तो जलते धूप में औरों…

स्वर्ग दूत से

'स्वर्ग दूत से' - गोपालदास 'नीरज' ऐसी क्या बात है, चलता हूँ अभी चलता हूँ गीत एक और ज़रा झूम…

महाभारत के बाद

'महाभारत के बाद' - उदय प्रकाश (कविता संग्रह 'रात में हारमोनियम' से) धोबी का लड़का कुछ शैतान है और सभ्यता…

किराये का घर

'किराये का घर' - विष्णु डे (अनुवाद: डॉ भारतभूषण अग्रवाल) किराये का घर रूखी ज़मीन की तरह है, जड़ें जमाने…

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