कविता संग्रह ‘सच सुने कई दिन हुए’ से

मेरे कुरते में चाँद का कॉलर
और तारे का बटन

मेरे कुरते में
पहाड़ों की पीठ पर प्यासी भागती हिरणी के धुंधते पाँव
मेरे कुरते में
सोने के केशों वाली लड़की से मिलने की चाह

मेरे कुरते में
पिताओं का गुस्सा
और सामाजिकों का आक्रोश

गर्मी की साँझ की रुमानियत
और शरद का आवेग
मेरे कुरते में,
मेरे कुरते में
ऋतुओं के बाजे
हाँ प्रिये, मेरे कुरते में
मेघों के नगाड़े!


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बद्रीनारायण
बद्रीनारायण

जन्म: 5 अक्टूबर 1965, भोजपुर, बिहार.
कविता संग्रह: सच सुने कई दिन हुए, शब्दपदीयम, खुदाई में हिंसा.
भारत भूषण पुरस्कार, बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, शमशेर सम्मान, राष्ट्र कवि दिनकर पुरस्कार, स्पंदन सम्मान, केदार सम्मान

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