चंदे का डर

'चंदे का डर' - हरिशंकर परसाई  एक छोटी-सी समिति की बैठक बुलाने की योजना चल रही थी। एक सज्‍जन थे जो…

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ठेले पर हिमालय

'ठेले पर हिमालय' - धर्मवीर भारती  'ठेले पर हिमालय' - खासा दिलचस्‍प शीर्षक है न। और यकीन कीजिए, इसे बिलकुल ढूँढ़ना…

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साँवली मालकिन

'साँवली मालकिन' - इ हरिकुमार (रूपांतरण: पूर्णिमा वर्मन, रीना तंगचन) हर रोज़ झोपड़ी के चबूतरे पर बैठी हुई सुलू पिता…

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दुःख का अधिकार

'दुःख का अधिकार' - यशपाल मनुष्यों की पोशाकें उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बाँट देती हैं। प्रायः पोशाक ही समाज में…

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घुमक्कड़

'घुमक्कड़' - खलील जिब्रान वह मुझे चौराहे पर मिला। एक व्यक्ति जिसके पास केवल एक लबादा और एक छड़ी थी,…

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हींगवाला

'हींगवाला' - सुभद्राकुमारी चौहान लगभग पैंतीस साल का एक खान आंगन में आकर रुक गया। हमेशा की तरह उसकी आवाज…

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वो

'वो' - विजय शर्मा वो यूँ तो बेहद आम सा दिखने वाला लड़का था, लेकिन दिलो- दिमाग़ के जद्दो जहद…

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तक़सीम

'तक़सीम' - गुलजार (अनुवाद: शम्भू यादव)  जिन्दगी कभी-कभी जख्मी चीते की तरह छलाँग लगाती दौड़ती है, और जगह-जगह अपने पंजों के निशान…

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डाची 

'डाची' - उपेंद्रनाथ अश्क  काट (काट - दस-बीस सिरकियों के खैमों का छोटा-सा गाँव) 'पी सिकंदर' के मुसलमान जाट बाकर को अपने माल…

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गलती का सुधार

'गलती का सुधार' - सआदत हसन मंटो "कौन हो तुम?" "तुम कौन हो?" "हर-हर महादेव…हर-हर महादेव!" "हर-हर महादेव!" "सुबूत क्या…

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समाज का शिकार

'समाज का शिकार' - रवींद्रनाथ टैगोर  मैं जिस युग का वर्णन कर रहा हूँ उसका न आदि है न अंत! वह एक…

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