भिखारिन

'भिखारिन' - जयशंकर प्रसाद  जाह्नवी अपने बालू के कम्बल में ठिठुरकर सो रही थी। शीत कुहासा बनकर प्रत्यक्ष हो रहा था। दो-चार…

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साँवली मालकिन

'साँवली मालकिन' - इ हरिकुमार (रूपांतरण: पूर्णिमा वर्मन, रीना तंगचन) हर रोज़ झोपड़ी के चबूतरे पर बैठी हुई सुलू पिता…

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दुःख का अधिकार

'दुःख का अधिकार' - यशपाल मनुष्यों की पोशाकें उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बाँट देती हैं। प्रायः पोशाक ही समाज में…

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हींगवाला

'हींगवाला' - सुभद्राकुमारी चौहान लगभग पैंतीस साल का एक खान आंगन में आकर रुक गया। हमेशा की तरह उसकी आवाज…

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वो

'वो' - विजय शर्मा वो यूँ तो बेहद आम सा दिखने वाला लड़का था, लेकिन दिलो- दिमाग़ के जद्दो जहद…

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तक़सीम

'तक़सीम' - गुलजार (अनुवाद: शम्भू यादव)  जिन्दगी कभी-कभी जख्मी चीते की तरह छलाँग लगाती दौड़ती है, और जगह-जगह अपने पंजों के निशान…

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डाची 

'डाची' - उपेंद्रनाथ अश्क  काट (काट - दस-बीस सिरकियों के खैमों का छोटा-सा गाँव) 'पी सिकंदर' के मुसलमान जाट बाकर को अपने माल…

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समाज का शिकार
Portrait of Indian author and poet Rabindranath Tagore, circa 1935. (Photo by Fox Photos/Hulton Archive/Getty Images)

समाज का शिकार

'समाज का शिकार' - रवींद्रनाथ टैगोर  मैं जिस युग का वर्णन कर रहा हूँ उसका न आदि है न अंत! वह एक…

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माँ आकाश है!

'माँ आकाश है' - गिरिराज किशोर बाप जहाज का मास्टर था। माँ एक अफ़सर की बेटी। दोनों का संयोग विवाह में…

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जीना तो पड़ेगा

'जीना तो पड़ेगा' - अब्दुल बिस्मिल्लाह जून की चिलचिलाती हुई गर्मी और धुर दुपहरी का समय। दुहरे बदन और मझोले…

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पासंग

'पासंग' - मेहरुन्निसा परवेज़ आज सुबह से ही बड़ी उमस थी, हवा बन्द सी थी। पत्ते तक जरा नहीं हिल…

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