प्यार को नमन करो! प्यार का चलन करो!
हर जलन का तुम सदा, प्यार से शमन करो!

गोद में किलक रहा, वह किसी का प्यार है
याद में बिलख रहा, वह किसी का प्यार है

राह जो निहारता, वह किसी का प्यार है
जो कभी न हारता, वह किसी का प्यार है

साथ को पुकारता, वह किसी का प्यार है
शूल जो बुहारता, वह किसी का प्यार है

पालकी सजी कभी, प्यार के लिए सजी
बाँसुरी बजी कभी, प्यार के लिए बजी

स्वप्न जो जगे कहीं, प्यार के लिए जगे
प्राण जो ठगे कहीं, प्यार के लिए ठगे

होंठ मुस्कराए तो, एक प्यार के लिए
बेकरार प्राण जो, एक प्यार के लिए

प्यार की ही राह पर, तुम सदा चरण धरो!
प्यार को नमन करो! प्यार का चलन करो!

फूल हैं खिले जिन्हें, प्यार ने परस दिया
दिल मिले कभी तभी, प्यार ने सरस किया

देखते हो तुम कहीं, जिन्दगी हताश है
उसको सिर्फ एक ही, प्यार की तलाश है

अश्रु जो छलक रहे, हैं किसी की आँख में
प्यार के सपन सभी, मिल गए हैं खाक में

दूरियां मिटी कभी, प्यार से मिटी सभी
पीड़ जो झिली कहीं, प्यार से झिली सभी

प्यार के अभाव में, हारती है जिन्दगी
अश्रु आँख में अटल, धारती है जिन्दगी

पैर जब कभी डिगे, प्यार के लिए डिगे
दाग जब कभी लगे, प्यार के लिए लगे

नफरतों के घाव जो, प्यार से उन्हें भरो!
प्यार को नमन करो! प्यार का चलन करो!

आदमी को आदमी, प्यार ही बना रहा
छाप दिल पे इक अमिट, प्यार ही लगा रहा

जिन्दगी को जिन्दगी, प्यार दे रहा सदा
नाव स्वप्न की यहां, प्यार खे रहा सदा

प्यार से ही जिन्दगी के होठ गीत गा रहे
प्यार से चमन-चमन, फूल मुस्कुरा रहे

प्यार से ही हर तरफ, चाँदनी खिली हुई
प्यार से ही हर दिशा को, रोशनी मिली हुई

कारवां जो चल रहा, चल रहा है प्यार से
दीप जो भी जल रहा, जल रहा है प्यार से

प्यार जब कभी मिटा, गम की आँधियां चली
प्यार जब कभी मिटा, जिन्दगी गयी छली

आदमी के दर्द को, प्यार से सदा हरो!
प्यार को नमन करो! प्यार का चलन करो!

जिन्दगी की नींव यह, प्यार पर टिकी हुई
प्यार के ही हाथ यह, जिन्दगी बिकी हुई

प्यार गर न दे सके, प्यार मिल न पायेगा
घोर-अंधकार आ, जिन्दगी में छायेगा

प्यार के अभाव में, जीत, जीत है नहीं
प्यार के अभाव में, मीत, मीत है नहीं

प्यार के अभाव में, गीत, गीत है नहीं
प्यार के अभाव में, रीत, रीत है नहीं

प्यार जिसमें है नहीं, जिन्दगी वीरान है
प्यार जिसमें है नहीं, घर नहीं, मसान है

प्यार है जहां, वहां वेद हैं, कुरान है
प्यार ही मनुष्य है, प्यार ही भगवान है

मीत मिल के प्यार का, नित्य आचमन करो!
प्यार को नमन करो! प्यार का चलन करो!

दायरों से प्यार की, मुक्ति आज चाहिए
हर हृदय में प्यार की, भक्ति आज चाहिए

कौन प्यार के लिए, इस जहां में गैर है
प्यार है जहां, वहां द्वेष है न वैर है

प्यार की नजर में, कौन तुच्छ, कौन है बड़ा
एकता की सरजमीं में, प्यार का निशां गड़ा

गीत होठ-होठ पर, प्यार के जगाओं तुम
पौध प्यार की यहां, हर जगह लगाओ तुम

आग जो घृणा की है, प्यार से बुझाओ तुम
दूर हो गए हैं जो, प्यार से मिलाओ तुम

विष चढ़ा संदेह का, प्यार से उतारो तुम
प्यार ही है जिन्दगी, बस, यही पुकारो तुम

प्यार के लिए जिओ! प्यार के लिए मरो!
प्यार को नमन करो! प्यार का चलन करो!

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कविता साभार: सीताराम महर्षि

चित्र श्रेय: Erico Marcelino