सुनो लड़की

सुनो लड़की!
शक्लें छिपाए और
आँखें गड़ाए हुए
गिद्ध जैसे निशाना साधे
बैठे हैं कई लोग यहाँ।
तुम छुपना मत
आँखें नीची मत करना,
दुपट्टा कहीं खिसका तो नहीं,
इसकी भी परवाह न करना,
सिर उठाना और
भस्म कर देना उन्हें
अपने तेज से।
ललचाएंगे, बहलाएंगे
फुसलाएंगे वो और
देंगे धमकियाँ भी।
दरअसल ये भेड़िए नहीं
गीदड़ हैं,
उनकी हवस में गल मत जाना,
बेचारी मत बन जाना तुम।
सुनो लड़की!
हिम्मत रखना
क्योंकि फिर भी ग़लत
तुम ही कहलाओगी।
चुुप रहना-
यह नसीहत भी दी जाएगी।
तुम्हारा चरित्र धुंधला होगा,
यह बतलाया जाएगा।
लेकिन सुनो लड़की!
तुम समर्पण मत करना,
रौंदा जाएगा, कुचला जाएगा
घृणित आँखों से तरेरा जाएगा,
फिर भी तुम अंकुरित होती रहना।
इतिहास में नाम
तुम्हारा ही नाम दर्ज होगा,
पूजा भी तुमको जाएगा
डर है मुझे कि
तुम दम न तोड़ दो इससे पहले।
मालूम है मुझे,
तुम्हें इतिहास नहीं बनना,
तुम्हें पूज्य भी नहीं होना।
सामान्य ज़िन्दगी चाहिए तुम्हें
जहाँ-
दहश्त न हो अपनी देह
के नोचे जाने की,
फिक्र न हो दबोच कर
पर काटे जाने की,
जहाँ खिली रहे
तुम्हारी मुस्कुराहट
बिना इस डर के
कि-
तुम्हें चरित्रहीन कहा जाएगा।